Dhamtan Sahib: वो पवित्र स्थान जिसके दर्शन के बिना ‘हजूर साहिब’ की यात्रा मानी जाती है अधूरी!

Shikha Mishra | Nedrick News Haryana Published: 31 मार्च 2026, 05:34 PM Updated: 31 मार्च 2026, 05:34 PM
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Dhamtan Sahib: आपने सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के सचखंड जाने वाले स्थान हूजूर साहिब के बारे में तो सुना ही होगा..खासकर जो भी सिख धर्म में आस्था रखता है उनके लिए हूजूर साहिब सबसे पवित्र और आस्था से परिपूर्ण स्थान माना जाता है। कहा जाता है कि हर एक सिख के लिए हूजूर साहिब जाये बिना उनकी सिक्खी की यात्रा पूरी ही नहीं होती है।  हूजूर साहिब सिखों के पवित्र पांच तख्तों में से एक तख्त का भी स्थान है.. इसलिए इसकी मान्यता सिखों के लिए सबसे ज्यादा होती है..

लेकिन क्या आप ये जानते है कि एक ऐसा स्थान भी है जहां जाने की आज्ञा खुद दसवे गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने दी है.. ये उनके ही कथन है कि इस स्थान पर जाये बिना हुजुर साहिब की यात्रा अधूरी ही रहेगी.. जी हां हम बात कर रहे है धमतान साहिब.. जो नौवे गुरु गुरु तेग बहादुर के प्रवास और औरंगजेब के आतंक के बीच धर्म का रक्षा करने और आध्यात्मिकता की तरफ जाने का संदेश दिया था.. आखिर क्यों दसवें गुरु ने कहा था कि धमतान साहिब की यात्रा के बिना हूजूर साहिब की यात्रा अधूरी है..जानेंगे सबकुछ अपने इस लेख में..

धमतान साहिब की कहानी

धमतान साहिब असल में महाराष्ट्र के नांदेड़ में मौजूद हुजुर साहिब से करीब 1468 किलोमीटर दूर हरियाणा के जींद जिले के नरवाना टोहना मार्ग पर स्थित है। ये गुरुद्वारा नौवें पातशाह गुरु तेगबहादुर की उस ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक है जब उन्होंने जींद आकर न केवल लोगो को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया था, बल्कि सूखे की मार झेल रहे लोगो की मदद करने के लिए दान दिया था। ये घटना 1665 की है, जब गुरु साहिब अपने परिवार के साथ जींद आये थे, यहां उन्होंने धर्म का प्रचार किया था, औऱ भाई रामदेव जी, जिन्हे गुरु साहिब की सेवा से प्रभावित होकर मिहान नाम दिया था.. उन्हें को नगाड़ा और झंडा देकर सिख धर्म के प्रचार की जिम्मेदारी दी थी.. जो आज भी जींद में मिहानशाही संप्रदाय का प्रतीक है। गुरु साहिब उस वक्त 3 महीने रहे थे।

मदद के लिए दग्गू जाट चौधरी को आर्थिक राशि दी

कहा जाता है कि गुरु साहिब ने सूखे की मार झेल रहे लोगो की मदद के लिए दग्गू जाट चौधरी को आर्थिक राशि दी थी, ताकि वो लोगो के लिए कुएं और धर्म शाला बनवायें, लेकिन वो धूर्त निकला, उसने केवल कुयें बनवायें और कुएं के चारों तरफ तंबाकू की खेती की..जिससे वो पानी भी गरीबों के इस्तेमाल में नहीं रहा। करीब 10 सालो के बाद गुरु साहिब ने फिर से 1675 में यहां की यात्रा कि तो स्थिति जस के तस देखकर दग्गू जाट को चेतावनी भी दी.. लेकिन वो नहीं माना..नतीजा कुछ ही समय में वहां खरपतवार लग गई और फसल बर्बाद हो गई। उसका पूरा परिवार तबाह हो गया.. गुरु साहिब ने कहा था कि जो पैसा उन्होंने दिया था वो नीजि उपयोग के लिए न करें,,लेकिन लालच में दग्गू जाट नहीं माना.. नतीजा उनके खेत, खलिहान, उसका घर सब बर्बाद हो गया।

जानें क्यों नहीं जमती दही

कहा जाता है कि गुरु साहिब की शहीदी से पहले भी वो तीसरी बार धमतान आये थे.. लोगो को जब पता चला कि वो दिल्ली  जा रहे है तो उन्हें डर था कि शायद गुरू जी से दर्शन फिर न हो.. सभी उनके दर्शन के लिए आने लगे.. गुरु साहिब ने तब अपने संगतो को कहा कि भक्तों की सेवा के लिए वो गांव से दूध ले आये.. ताकि उनके लिए भोजन का प्रबंध हो सकें..मगर गांव वालों ने ये कहते हुए इंकार कर दिया कि दूध तो है नहीं क्योंकि उन लोगो ने दूध की दही जमा दी है..जब गुरु साहिब को इसकी जानकारी मिली तो उनके मुख से अनायस ही ये निकल गया कि अगर संगत के लिए दूध नहीं है।

धमतान साहिब में लस्सी औऱ दही नहीं दी जाती

तो इस गांव आगे से कभी भी दूध नहीं जमेगा.. कभी भी दही नहीं जमेगी.. और करीब 350 साल बीच जाने के बाद भी इस गांव में दही नहीं जमती है। यहां दूध तो काफी होता है लेकिन दही नहीं जमता। इस पर कई रिसर्च हो चुकी है.. यहां तक कि धमतान साहिब से दूध ले जाकर दूसरे स्थान पर भी दही जमाने की कोशिश की गई लेकिन दही नहीं जमा। इसलिए गुरुद्वारा धमतान साहिब में कभी लस्सी औऱ दही नहीं दी जाती।

इतिहास के अनुसार दसवे गुरु भी एक बार धमतान साहिब की यात्रा पर आये थे, और यहां पर गुरु तेग बहादुर साहिब का असर देखकर उन्होंने गुरुद्वारे को ये वरदान दिया था कि जो भी सिख संगत हुजुर साहिब जाना चाहता है उसे पहले धमतान साहिब आना होगा.. हूजूर साहिब की यात्रा तभी सफल मानी जायेगी। गुरुद्वारा धमतान साहिब करीब 500 एकड़ में बना हुआ है। कहा जाता है कि गुरु साहिब ने भी मिहान जी के सिर के घर यहीं पर ठीक किये थे, इसलिए गुरु द्वारे धमतान साहिब के सरोवर में नहाने से चर्म रोग सही होता है।

नौवे गुरु को समर्पित सीरी साहिब यहां आज भी सुशोभित है, जो सिखों को महान गुरु गुरु तेगबहादुर जी की याद दिलाता है। धमतान साहिब गुरुद्वारा एक भव्य और आलीशान गुरुद्वारा है जो आध्यत्मिकता और भक्ति का प्रतीक है। ये गुरुद्वारा हर एक सिख के बेहद खास है और यहां की यात्रा उनके लिए बेहद खास और उपयोगी मानी जाती है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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