China-Pakistan Relation Problems: पाकिस्तान में आंतरिक संकट और आर्थिक बदहाली इस कदर बढ़ चुकी है कि अब उसके सबसे भरोसेमंद और ‘सदाबहार’ दोस्त चीन के भी सब्र का बांध टूटने लगा है। देश में सेना के बढ़ते दखल और सिर्फ हथियारों पर केंद्रित नीतियों के बीच हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। इसी बीच जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने एक बड़ा दावा करके पाकिस्तान की सियासत में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा है कि चीन पाकिस्तान की मौजूदा व्यवस्था और सुरक्षा हालातों से बेहद नाखुश है और वह बलूचिस्तान में चल रहे अहम माइनिंग (खनन) प्रोजेक्ट्स से धीरे-धीरे अपने हाथ पीछे खींच रहा है।
खनिज संपदा का असली फायदा किसे? रेको दिक और सैंदक पर दागे सवाल| China-Pakistan Relation Problems
मौलाना फजलुर रहमान ने एक वीडियो बयान जारी कर पाकिस्तान की खनिज संपदा, संप्रभुता और लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि बलूचिस्तान की जमीन में दबे बेशकीमती खजानों का असली फायदा आखिर किसे मिल रहा है? उन्होंने अरबों डॉलर के तांबे और सोने के भंडार वाले ‘रेको दिक’ प्रोजेक्ट का खास तौर पर जिक्र करते हुए पूछा कि वहां असल में खनन कौन कर रहा है और वहां से निकाले जा रहे खनिज आखिर किस देश या किन हाथों में जा रहे हैं? फजलुर रहमान ने बलूचिस्तान की दशकों पुरानी ‘सैंदक’ कॉपर-गोल्ड माइनिंग परियोजना के कामकाज की भी जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट सालों से चल रहा है, लेकिन आज तक पाकिस्तान और स्थानीय बलूच अवाम को इसका कोई ठोस फायदा नहीं दिखा। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि फिलहाल रेको दिक और सैंदक में काम चल रहा है, लेकिन इनका प्रबंधन पूरी तरह सवालों के घेरे में है।
चीन की नाराजगी और ग्वादर में देरी
JUI-F प्रमुख ने दावा किया कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता इतनी खराब हो चुकी है कि चीनी कंपनियां अब बलूचिस्तान के माइनिंग प्रोजेक्ट्स से किनारा करने लगी हैं। चीन पहले भी अपने नागरिकों की सुरक्षा और प्रोजेक्ट्स में अड़ंगों को लेकर इस्लामाबाद को कई बार सख्त चेतावनी दे चुका है। इसके अलावा, रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माने जाने वाले ग्वादर प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी ने भी बीजिंग की बेचैनी और नाराजगी को बढ़ा दिया है। दशकों से लटके प्रोजेक्ट्स के कारण दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट साफ नजर आने लगी है।
‘कर्जदाताओं के गुलाम बने हम, प्रांत बांटना कोई हल नहीं’
देश की बदहाली पर गहरी चिंता जताते हुए मौलाना ने कहा कि पाकिस्तान आज भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और विदेशी कर्जदाताओं के आगे हाथ फैलाने को मजबूर है। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि मुल्क से राजनीतिक गुलामी कभी खत्म ही नहीं हुई, बस उसका चेहरा बदल गया है। आज जो अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पाकिस्तान को कर्ज दे रही हैं, वही उसकी नीतियां और फैसले तय कर रही हैं।
इसके साथ ही पाकिस्तान में प्रशासनिक सुधार के नाम पर नए प्रांत बनाने की उठ रही मांगों पर भी उन्होंने दो टूक राय रखी। उन्होंने साफ कहा कि सूबों का बंटवारा कर देना पाकिस्तान की बुनियादी समस्याओं और आर्थिक संकट का कोई सीधा समाधान नहीं है।












































