Assam BJP victory analysis: असम की राजनीति में इस बार का चुनाव पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में जाता दिखा, और इस ऐतिहासिक जीत के पीछे कई बड़े फैक्टर काम करते नजर आए। विकास योजनाएं, लाभकारी स्कीमें और हिंदुत्व की राजनीति इन तीनों के मेल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को राज्य में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। राज्य में पार्टी की जीत का श्रेय काफी हद तक मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की रणनीति को दिया जा रहा है, जिन्होंने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाया।
लाभकारी योजनाओं ने बनाया मजबूत वोट बैंक | Assam BJP victory analysis
बीजेपी ने चुनाव से पहले और दौरान कई ऐसी योजनाएं लागू कीं, जिनका सीधा फायदा आम लोगों तक पहुंचा। खासकर महिलाओं और मजदूर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाओं ने बड़ा असर दिखाया। ‘अरुणोदय योजना’ के तहत करीब 40 लाख परिवारों की महिलाओं के खातों में 9-9 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा हर महीने 1250 रुपये की नियमित सहायता भी दी गई।
इसी तरह ‘महिला उद्यमिता योजना’ के तहत 30 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिए गए और भविष्य में एक-एक लाख रुपये देने का वादा भी किया गया। कॉलेज जाने वाली लड़कियों के लिए ‘निजुट स्कीम’ के तहत हर महीने 1000 रुपये की सहायता दी गई, जिससे करीब 5.5 लाख छात्राएं लाभान्वित हुईं।
चाय बागान मजदूरों और ग्रामीण वोटरों पर फोकस
सरकार ने चाय बागान मजदूरों को भी साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लगभग 6 लाख मजदूरों को 5-5 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता दी गई। यह कदम ग्रामीण और श्रमिक वर्ग में काफी प्रभावी माना गया। राज्य में कुल 2.54 करोड़ से अधिक मतदाता हैं और इन योजनाओं ने एक बड़े हिस्से को सीधे तौर पर प्रभावित किया।
हिंदुत्व और घुसपैठ का मुद्दा बना बड़ा फैक्टर
चुनाव में एक और बड़ा मुद्दा रहा अवैध घुसपैठ का। सरकार ने ‘मियां मुसलमानों’ (बांग्लादेशी घुसपैठियों) के खिलाफ सख्त अभियान चलाया, जिसका असर राजनीतिक रूप से काफी गहरा पड़ा। सरमा सरकार ने दावा किया कि करीब 1.5 लाख बीघा जमीन अवैध कब्जे से खाली कराई गई और घुसपैठियों को वापस भेजने के लिए 1950 के कानून को लागू किया गया। इससे बोडो, अहोम, कार्बी, चाय बागान मजदूर और आदिवासी समुदायों के बीच एकजुटता बढ़ी। हालांकि इस अभियान को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी हुई और कुछ विवादित वीडियो को बाद में सोशल मीडिया से हटाना पड़ा, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका राजनीतिक असर साफ दिखा।
हिंदू वोटों का बड़ा ध्रुवीकरण
राज्य की 103 हिंदू बहुल सीटों में से 100 पर बीजेपी की जीत ने साफ कर दिया कि हिंदू वोटों का बड़ा हिस्सा पार्टी के पक्ष में गया। यह ध्रुवीकरण चुनाव परिणामों में निर्णायक साबित हुआ।
कांग्रेस की कमजोर स्थिति
दूसरी ओर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस चुनाव में पूरी तरह कमजोर नजर आई। अंदरूनी कलह, संगठनात्मक कमजोरी और बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने का असर साफ दिखा। प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई को भी 23 हजार से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा, जो कांग्रेस की जमीनी स्थिति को दर्शाता है।
कांग्रेस पर यह भी आरोप लगा कि वह बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं ले पाई, जिससे उसका वोट बैंक और कमजोर हो गया।
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