Bilkis Bano case: कौन है बिलकिस बानो जिसके गुनहगार हुए रिहा, जानें पूरा मामला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 20 अगस्त 2022, 05:30 AM Updated: 20 अगस्त 2022, 05:30 AM
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गुजरात दंगों के दौरान 2002 में बिलकिस बानों का गैंगरेप हुआ था। ये केस देश में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। जिसके बाद बिलकिस बानो ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ 2008 में 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई। लेकिन अब स्वतंत्रता दिवस पर बिलकिस बानो के रेपिस्टों को सजा से मुक्त कर रिहा कर दिया गया।

दरअसल, गुजरात दंगों के दौरान 2002 में बिलकिस बानो का गैंगरेप किया गया था। जिसके बाद इस मामले ने देशभर में सुर्खियां बटोरी। बिलकिस बानो ने न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। आखिरकार अदालत ने 2008 में 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

स्वतंत्रता दिवस पर बिलकिस बानों के रेपिस्ट्स रिहा

लेकिन इस स्वतंत्रता दिवस पर बिलकिस बानों के रेपिस्ट्स जेल से रिहा कर दिए गए। दोषियों को रिहा करने के बाद ये केस एक बार फिर से गरमा गया है। जबकि बिलकिस का रेप करने वालों को सजा सुनाने वाले जज भी दोषियों की रिहाई से बेहद हैरान हैं। 

न्यायमूर्ति यूडी साल्वी ने कहा

दोषियों के रिहा किए जाने के बाद न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) यूडी साल्वी ने कहा, ‘जो पीड़ित है वह इसे बेहतर जानता है।’ मालूम हो कि गुजरात सरकार के पैनल ने दोषियों की सजा में छूट वाले आवेदन को मंजूरी दे दी। ऐसे में बिलकिस बानों के सभी 11 दोषियों को सोमवार को जेल से रिहा कर दिया। ये केस काफी संवेदनशील था जिसकी वजह से इसे मुंबई सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था।

दोषियों की रिहाई पर जस्टिस बोले

तत्कालीन स्पेशल न्यायाधीश जस्टिस साल्वी ने बिल्किस की गवाही को बहादुर औऱ साहसी बताते हुए रेपिस्ट्स को दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी।दोषियों कि रिहाई को लेकर एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए जस्टिस साल्वी ने कहा, ‘मैं केवल यह कहना चाहूंगा कि दिशानिर्देश हैं, राज्य खुद इन दिशानिर्देशों को निर्धारित करता है। इस पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले हैं।’ उन्होंने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस का केस निष्पक्षता से फैसला सुनाने के लिए 2004 में गुजरात से मुंबई ट्रांसफर किया था। जिसके बाद गवाहों के बयानों के आधार पर और साथ ही इस मामले में सबूतों के हजारों पन्नों के आमें थे। तब दोषियों को सजा सुनाई गई थी। न्यायमूर्ति साल्वी ने आगे कहा, ‘फैसला बहुत पहले दिया गया था। अब यह सरकार के हाथ में है। राज्य को निर्णय लेना है। ये सही है या नहीं, यह संबंधित अदालत या हाई कोर्ट को देखना है।’

बिलकिस ने दिया बयान

वहीं दोषियों की रिहाई के बाद बिलकिस ने अपने वकील के जरिए बयान जारी करते हुए कहा है कि ‘आज, मैं केवल यही कह सकती हूं, किसी भी महिला के लिए न्याय इस तरह कैसे समाप्त हो सकता है? मुझे अपने देश की सर्वोच्च अदालतों पर भरोसा था। मुझे सिस्टम पर भरोसा था। मेरे जख्म धीरे-धीरे भर रहे थे। मैं जीना सीख रही थी। इन दोषियों की रिहाई ने मेरी शांति छीन ली है और न्याय में मेरे विश्वास को हिला दिया है।’

फैक्ट्स देखें और फिर फैसला लें- न्यायमूर्ति साल्वी 

वहीं न्यायमूर्ति साल्वी ने कहा, ‘जो फैसला दिया गया, वो बहुत कुछ एक्सप्लेन कर सकता है। मामले की परिस्थितियां, कौन शामिल था और किस तरह से अपराध हुआ है। उसने (बिलकिस) इसमें शामिल लोगों के नाम बताए थे। ये केवल आरोपी की पहचान पर आधारित नहीं था।’ न्यायमूर्ति ने आगे कहा, ‘फैसला खुद बोलेगा। जजमेंट, न्यायालय के समक्ष साक्ष्य, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की पुष्टि को भी देखा जा सकता है। ये सब राज्य के सामने होंगे वास्तविक परिदृश्य के साथ-साथ फैक्ट्स देखें और फिर फैसला लें। इसे इस तरह आइसोलेशन में न लें।’

पीड़िता ने की सुरक्षा की मांग

बता दें कि बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई के बाद पीड़िता ने कहा कि मेरे सामने 20 साल पुराना भयावह अतीत सामने आकर खड़ा हो गया है। सरकार के इस फैसले के बाद बिलकिस बानो ने सुरक्षा की मांग की है।

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