अमेरिका के नए ग्रीन कार्ड नियमों ने बढ़ाई टेंशन… लेकिन भारतीय प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स को मिली बड़ी राहत| US Green Card Rules

Nandani | Nedrick News USA Published: 26 May 2026, 04:20 PM | Updated: 26 May 2026, 04:20 PM

US Green Card Rules: अमेरिका में ग्रीन कार्ड को लेकर हाल ही में सामने आए नए नियमों ने भारतीयों के बीच चिंता का माहौल बना दिया था। खासकर उन लोगों में ज्यादा बेचैनी थी, जो वर्षों से अमेरिका में नौकरी या पढ़ाई कर रहे हैं और भविष्य में वहीं बसने का सपना देख रहे हैं। लेकिन अब अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी USCIS की तरफ से आए ताजा स्पष्टीकरण ने हजारों भारतीय वर्कर्स, स्टूडेंट्स और रिसर्च स्कॉलर्स को बड़ी राहत दी है।

दरअसल, पहले यह खबर सामने आई थी कि अगर कोई व्यक्ति अमेरिका में स्थायी निवास यानी Permanent Residency (PR) के लिए आवेदन करना चाहता है, तो उसे पहले अमेरिका छोड़कर अपने देश लौटना होगा। आवेदन मंजूर होने तक उसे अपने देश में ही इंतजार करना पड़ेगा। इस खबर के बाद अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय में काफी असमंजस और घबराहट देखने को मिली थी।

हालांकि अब USCIS ने साफ किया है कि हर व्यक्ति पर यह नियम लागू नहीं होगा। जो लोग अमेरिका के आर्थिक या राष्ट्रीय हित से जुड़े क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, उन्हें देश छोड़े बिना भी ग्रीन कार्ड आवेदन की अनुमति मिल सकती है।

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क्या होता है ग्रीन कार्ड? US Green Card Rules

अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाले दस्तावेज को ग्रीन कार्ड कहा जाता है। आमतौर पर विदेशी नागरिक पहले H-1B, L-1 या दूसरे टेंपरेरी वर्क वीजा पर अमेरिका जाते हैं। वहां कुछ वर्षों तक नौकरी या रिसर्च करने के बाद वे ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं। ग्रीन कार्ड मिलने के बाद व्यक्ति को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार मिल जाता है। वह किसी भी कंपनी में नौकरी कर सकता है और बाद में अमेरिकी नागरिकता के लिए भी आवेदन कर सकता है।

ग्रीन कार्ड मिलने के क्या फायदे हैं?

ग्रीन कार्ड को अमेरिका में स्थायी भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी माना जाता है। इसके जरिए व्यक्ति को अमेरिका में हमेशा के लिए रहने की अनुमति मिलती है। इसके अलावा नौकरी बदलने की पूरी स्वतंत्रता होती है और किसी खास कंपनी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

ग्रीन कार्ड होल्डर पांच साल बाद अमेरिकी नागरिकता के लिए भी आवेदन कर सकता है। इतना ही नहीं, उसे कई सरकारी सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और पेंशन जैसे लाभ भी मिल सकते हैं। वहीं स्टूडेंट्स के लिए कॉलेज फीस भी अपेक्षाकृत कम हो जाती है।

नए नियमों से क्यों मची थी अफरातफरी?

राष्ट्रपति Donald Trump प्रशासन की ओर से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को सख्त किए जाने की खबर ने सबसे ज्यादा असर भारतीय IT प्रोफेशनल्स और छात्रों पर डाला। नई व्यवस्था के तहत कहा गया था कि ज्यादातर टेंपरेरी वीजा होल्डर्स को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने से पहले अपने देश लौटना होगा। यही वजह थी कि अमेरिका में नौकरी कर रहे हजारों भारतीय इंजीनियर्स, डॉक्टरों और टेक कर्मचारियों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई थी। USCIS के प्रवक्ता जैक काहलर ने हालांकि बाद में स्पष्ट किया कि कुछ विशेष श्रेणियों के लोगों को इस नियम से राहत दी जा सकती है।

किन लोगों को मिलेगी छूट?

USCIS के मुताबिक वे लोग, जो अमेरिका के राष्ट्रीय हित या आर्थिक विकास से जुड़े क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, उन्हें ग्रीन कार्ड आवेदन के दौरान अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इन क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग, डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर प्रमुख हैं। खासतौर पर सेमीकंडक्टर, नैनो टेक्नोलॉजी, मेडिकल रिसर्च, एयरक्राफ्ट, मिसाइल और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों को इस राहत का फायदा मिलने की संभावना है।

जैक काहलर ने कहा कि राष्ट्रीय हित में योगदान देने वाले लोगों को मौजूदा नियमों के तहत अमेरिका में रहकर आवेदन की अनुमति दी जा सकती है, जबकि अन्य मामलों में व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

भारतीय वर्कर्स को कैसे होगा फायदा?

अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक H-1B और L-1 जैसे वर्क वीजा पर काम कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर प्रोफेशनल्स IT, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और रिसर्च सेक्टर से जुड़े हैं। चूंकि ये सभी क्षेत्र अमेरिका की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक जरूरतों के लिए अहम माने जाते हैं, इसलिए भारतीय वर्कर्स को नए नियमों में राहत मिलने की उम्मीद काफी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर USCIS की नई गाइडलाइन इसी तरह लागू रहती है, तो हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स को ग्रीन कार्ड आवेदन के लिए अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

भारतीय स्टूडेंट्स और रिसर्च स्कॉलर्स को भी राहत

भारत से हर साल बड़ी संख्या में छात्र अमेरिका में PhD और रिसर्च के लिए जाते हैं। इनमें कई स्कॉलर्स डिफेंस, एयरोस्पेस, साइंस और एडवांस टेक्नोलॉजी से जुड़े अहम प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं। अगर कोई भारतीय स्कॉलर ऐसे रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिससे अमेरिका को आर्थिक या रणनीतिक फायदा हो रहा है, तो उसे भी नए नियमों से छूट मिल सकती है।

इसी तरह O-1 वीजा लेने वाले भारतीय स्कॉलर्स और प्रोफेशनल्स को भी राहत मिलने की संभावना है, बशर्ते उनका काम साइंस, एजुकेशन, बिजनेस, आर्ट्स या एथलेटिक्स जैसे क्षेत्रों में अमेरिका के राष्ट्रीय हित से जुड़ा हो।

फिलहाल राहत, लेकिन नजर आगे के फैसलों पर

USCIS की सफाई के बाद अमेरिका में रह रहे भारतीयों ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन ग्रीन कार्ड नियमों को लेकर अभी भी पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा रही। आने वाले समय में अमेरिकी प्रशासन की नई नीतियां यह तय करेंगी कि विदेशी वर्कर्स और स्टूडेंट्स के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करना कितना आसान या मुश्किल होगा।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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