जीवन भर नाम जप किया पर मृत्यु के समय भूल गए तो क्या होगा? प्रेमानंद महाराज जी से जानिए

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 30 May 2024, 12:00 AM | Updated: 30 May 2024, 12:00 AM

जीवन में मोक्ष प्राप्ति का एकमात्र मार्ग भक्ति ही है। व्यक्ति को मृत्यु के भय में अपना जीवन व्यतीत नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने सांसारिक कार्य करते हुए भी भगवान के नाम का चिंतन करना चाहिए। भगवान ही हैं जो हमारे जीवन का उद्धार कर सकते हैं और हमें इस संसार के सभी दुखों से मुक्ति दिला सकते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो 24 घंटे भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं और अपना पूरा ध्यान भगवान में ही लगाते हैं। हालांकि, अगर जीवन भर भगवान का नाम जपने वाला व्यक्ति अपनी मृत्यु के समय नाम जपना भूल जाए तो भगवान स्वयं उसके लिए स्मरण का माध्यम बन जाते हैं। दरअसल, यह बात वृंदावन के श्रीहित प्रेमानंद महाराज ने कही। अपने सद् विचारों से लाखों लोगों को प्रेरित करने वाले महाराज 13 साल की उम्र से ही भगवान की भक्ति में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं और अपने पास आने वाले भक्तों को जीवन में सही मार्ग पर चलने की शिक्षा देते हैं। वहीं, कई लोग ऐसे भी हैं जो अपने सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने के लिए प्रेमानंद महाराज के पास आते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो महाराज जी से अपनी मृत्यु के समय होने वाली घटनाओं के बारे में जानना चाहते हैं। अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो आपको यह जान लेना चाहिए कि अगर आप जीवनभर नाम जपते रहें लेकिन मृत्यु के समय भूल जाएं तो क्या होगा?

और पढ़ें: जब मृत्यु आती है तो क्या कष्ट होता है? प्रेमानंद महाराज जी से जानिए 

मृत्यु के समय नाम जप भूल जाएं तो क्या होगा

श्रीहित प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि जो व्यक्ति जीवन भर भगवान की भक्ति करता है और प्रतिदिन राधा राधा का नाम जपता है, जब ऐसा व्यक्ति मरता है तो उसका शरीर सुन्न हो जाता है और वह अचेत अवस्था में होता है, तब उस समय भगवान स्वयं उसकी स्मृति बन जाते हैं। भगवान स्मृति के रूप में प्रकट होते हैं और उस समय उस व्यक्ति के जीवन की गति भगवान की कृपा से चलती है। क्योंकि उसने जीवन भर भगवान का ध्यान किया और अंतिम समय में वह अचेत हो जाता है और ऐसी अवस्था में वह भगवान का नाम कैसे ले सकता है, तब ऐसी स्थिति में भगवान स्वयं समरण में आते हैं और जीवन में की गई सभी भक्ति का फल देते हैं। महाराज जी आगे कहते हैं कि कुछ लोग जीवन भर यही कामना करते हैं कि हे भगवान, अंतिम समय में आप मेरी स्मृति में आ जाएं, मैं आपको याद करूं, तो ऐसे लोग अंतिम समय में भगवान को अवश्य याद करते हैं। वहीं दूसरी ओर जो लोग पूरे जीवन में भगवान का नाम नहीं लेते हैं, उन्हें अपने अंतिम समय में वही दिखाई देता है जो वे अपने अगले जन्म में बनते। जैसे यदि किसी को मृत्यु के समय सूअर दिखाई देता है, तो ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति को अपने अगले जन्म की झलक दिखाई देती है। दूसरी ओर, जो ईश्वर के विषय में चिंतन करता रहता है, ईश्वर स्वयं उसके मन में आते हैं।

और पढ़ें: परिवार में कलह-कलेश मचा हो तो क्या करें? प्रेमानंद जी महाराज से जानिए

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds