धमतान साहिब गुरुद्वारा: गुरु तेग बहादुरी जी को समर्मित यह गुरुद्वारा कैसे बन गया भाईचारे का प्रतीक

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Published: 26 Jul 2023, 12:00 AM | Updated: 26 Jul 2023, 12:00 AM

धमतान साहिब गुरुद्वारा – सिख धर्म में कई सारे गुरु हुए जिन्होंने जहाँ सिख धर्म को आगे बढ़ाने का काम किया तो वहीं कई सारे गुरुद्वारे का भी निर्माण किया जो सिख धर्म की आस्था का प्रतीक माने जाते हैं. भारत में कई सारे गुरुदारे हैं तो वहीं इनमे से एक गुरुद्वारा ऐसा भी है जिसे भाईचारे का प्रतीक मना जाता है. वहीं इस पोस्ट के जरिए हम आपको इसी गुरूद्वारे के बारे में बताने जा रहे हैं.

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कहां है धमतान साहिब गुरुद्वारा

भाईचारे का प्रतीक माने जाने वाले जिस गुरूद्वारे की हम बात कर रहे हैं वो गुरुद्वारा धमतान साहिब है यह गुरुद्वारा को गांव धमतान, जिला जिंद, हरियाणा में स्थित है और इस गुरूद्वारे नरवाना के करीब 10 किमी पूरब स्थित है. वहीं इस जगह को लेकर मान्यता है कि इस जगह पर ऋषि वाल्मीकि का आश्रम था और भगवान राम के अश्वमेधा यज्ञ का स्थल भी यहीं जगह थी जिसकी वजह से इस जगह धार्मिक स्थान भी कहा जाता है.

गुरु तेग बहादुर साहिब की याद में बना है ये गुरुद्वारा 

यह गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब की याद में बनवाया गया हैं कहा जाता है हिंद की चादर गुरु तेग बहादुर जी का हरियाणा से गहरा नाता रहा है. गुरु महाराज ने हरियाणा के अलग-अलग जिलों में गए और यहाँ पर धर्म प्रचार किया. कि 1655 ई. में जब गुरू तेग बहादुर साहिब बिहार से पटियाला जा रहे थे तब वो धमतान आए थे और यहाँ पर आकर रुके. उनके पास भक्तो द्वारा जमा कि गयी जो भी धन संपत्ति थी वो उन्होंने यहाँ के जाट दंगों को दे दी और कुएं तथा विश्राम गृह और धर्मशाला बनवाने को कहा लेकिन दंगों ने वह सारे पैसे अपने घर और निजी कामों में लगा दिया.

इसी जगह हुई थी गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर की गिरफ्तारी

जिसके बाद 1665 ई. में जब वो फिर यहाँ आए तब उन्होंने लोगों की बात सुनकर कहा कि आगे आप अपने खेतों व घरों में तंबाकू व बीजों का प्रयोग न करें और इसी दौरान गुरु जी ने सिक्ख मिया सिंह को यहाँ पर गुरुद्वारा बनाने के लिए कहा और गुरुद्वारा धमतान साहिब का निर्माण हुआ. जानकारी के लिए बता दें, गुरु साहिब की पहली गिरफ्तारी 8 नवंबर 1665 को मुगल हाकिमों द्वारा यहीं पर की गई थी.

भाईचारे का प्रतीक का है यह गुरुद्वारा

वहीं गांव स्थित इस गुरुद्वारे को भाईचारे का प्रतीक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह गुरुद्वारा आपस में भाईचारे बढ़ाने की प्रेरणा देता है. इस गुरुद्वारा के अंदर बने बाग-बगीचे यहा आने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इसके अलावा यहा पर हर धर्म के लोग नि:स्वार्थ भाव से सेवा करते हैं और इस गुरुद्वारे में मत्था टेकने के लिए पंजाब से भी लोग आते हैं.

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