Pradeep Bhandari audio controversy: देश के सियासी गलियारों में एक कथित ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद जोरदार हंगामा खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण की एक कथित बातचीत का ऑडियो साझा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के स्पेस (X Spaces) पर हुई बातचीत का हिस्सा बताई जा रही इस क्लिप में प्रशांत भूषण को क्रांति, संभावित खून-खराबे और हालात बिगड़ने पर सेना बुलाए जाने की आशंका पर बात करते हुए सुना जा सकता है। यह ऑडियो सामने आते ही बीजेपी ने आरोप लगाया है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को गिराने के लिए हिंसा और अराजकता की साजिश रची जा रही है।
हालांकि, इंटरनेट पर घूम रही महज एक छोटी सी क्लिप के दम पर किसी भी हिंसक साजिश की पुष्टि नहीं की जा सकती। पूरी बातचीत का संदर्भ क्या था और यह रिकॉर्डिंग कितनी प्रामाणिक है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
‘विकल्प क्या हैं? क्रांति में बहुत खून-खराबा होगा…’ क्या है कथित बातचीत में? Pradeep Bhandari audio controversy
वायरल ऑडियो के अनुसार, प्रशांत भूषण कहते सुनाई देते हैं कि मौजूदा हालात में उनके सामने क्रांति (रेवोल्यूशन) के जरिए कुछ करने का एक विकल्प दिखता है। इसके तुरंत बाद वे इसके गंभीर परिणामों का जिक्र करते हुए कहते हैं कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों का इस्तेमाल हो रहा है। वे आगे चलकर हथियारों के इस्तेमाल और कानून-व्यवस्था के लिए सेना को बुलाए जाने तक की आशंका जताते हैं।
इस पूरी बातचीत का सबसे विवादित हिस्सा उनका यह बयान बन गया है, “अब उस रेवोल्यूशन में तो बहुत खून-खराबा होएगा।” इसी वाक्य को पकड़कर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समझना जरूरी है कि क्या वे किसी क्रांति की वकालत कर रहे थे या फिर ऐसे किसी कदम से होने वाले भारी नुकसान को लेकर केवल आगाह कर रहे थे।
बीजेपी का आरोप: ‘अराजकता से सत्ता परिवर्तन का खेल’
बीजेपी ने इस ऑडियो क्लिप को लेकर प्रशांत भूषण और विपक्ष को निशाने पर ले लिया है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि विपक्ष से जुड़े कुछ चेहरे लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए हिंसा और अराजकता का रास्ता तलाश रहे हैं। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र और संविधान के लिए सीधा खतरा करार दिया। बीजेपी का दावा है कि जनआंदोलन के नाम पर लोगों को भड़काकर सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
चुनाव आयोग के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच गरमाया मामला
यह विवाद ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। प्रशांत भूषण भी इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं। बीते 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे प्रशांत भूषण समेत कई कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। ऐसे माहौल में इस कथित ऑडियो के बाहर आने से टकराव और ज्यादा बढ़ गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पूरे मामले को दो अलग नजरियों से देखना होगा। पहला यह कि प्रशांत भूषण की कथित बातचीत में क्रांति और खून-खराबे का जिक्र किन परिस्थितियों और संदर्भ में किया गया था। दूसरा यह कि बीजेपी इसे सीधे सरकार के खिलाफ हिंसक साजिश बता रही है। जब तक पूरी बातचीत का मूल संदर्भ सामने नहीं आता, तब तक इन आरोपों को पूरी तरह स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।













































