Sikh history: जब भारत अंग्रेजो का गुलाम था.. तो अंग्रेजो की नाक में सबसे ज्यादा दम करने वाले, और अंग्रेजी हुकुमत को वाकई में शक्ति क्या होती है इसका प्रदर्शन करने वाले केवल एक ही समुदाय था.. और वो थे सिख। सिख धर्म की स्थापना से लेकर भारत को अंग्रेजो की गुलामी से आजाद कराने तक सिखों योद्धाओं के, स्वतंत्रता सेनानियों और राजा महाराजाओं की अनेको बहादुरी की कहानियां कही जाती है.. लेकिन क्या आप ये जानते है कि केवल गुलाम भारत में ही नहीं बल्कि आजाद हिंदुस्तान में भी सिखों के योगदान ने हमेशा पंजाब के साथ साथ भारत की सीना गर्व से चौड़ा कर दिया.. अपने इस लेख में हम कुछ ऐसे सिखों की कहानियों को जानेंगे.. जिन्होंने अपने क्षमता से बताया कि सिख क्यों हमेंशा अजेय रहे.. क्यों सिख बाकी धर्मो से अलग है..
सिखों का बाहुबल और युद्ध कौशल
सिख धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमें तलवार (शस्त्र) और धर्मग्रंथ (शास्त्र) साथ-साथ चलते हैं। कई अन्य धर्मों में अक्सर एक अंतर देखा जाता है: योद्धा शायद ही कभी कोई बड़ा विद्वान होता है, और बहुत धार्मिक व्यक्ति को अक्सर खून-खराबे या बलिदान से दूर रहने वाला माना जाता है। हालाँकि, सिख धर्म इस मामले में अनोखा है कि इसमें तलवार और धर्मग्रंथ एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं। सिख गुरु खुद इस आदर्श का सबसे बड़ा उदाहरण हैं; उन्होंने ज़रूरत पड़ने पर अपने धर्म की रक्षा की—इसके लिए हथियार उठाए—फिर भी जब हालात ने माँगा तो सबसे बड़ा बलिदान देने में कभी पीछे नहीं हटे। सिख आज भी अटूट संकल्प के साथ इस परंपरा को निभाते हैं। चाहे शारीरिक ताकत हो या युद्ध कौशल, खेल हो या व्यापार, सिखों ने खुद को साबित किया है और अपनी पहचान बनाई है। हालाँकि आज़ादी के बाद पंजाब का बँवारा हुआ, फिर भी वहाँ के लोगों का हौसला और जज़्बा कम नहीं हुआ।
आज भारत में लगभग 2.1 से 2.4 करोड़ सिख हैं—जो कुल आबादी का लगभग 1.72 प्रतिशत हैं—फिर भी वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। राजनीति, सेना और रक्षा सेवाओं से लेकर खेती, खाद्य सुरक्षा और खेलों की दुनिया तक, उनका योगदान बहुत बड़ा है; सच तो यह है कि पंजाब की उपलब्धियों की बराबरी करना किसी के लिए भी आसान काम नहीं है। उदाहरण के लिए, हरित क्रांति को ही लें—यह पंजाब के किसानों द्वारा शुरू किया गया एक आंदोलन था—जिसके ज़रिए सिख किसानों ने न केवल अपने राज्य बल्कि पूरे देश का पेट भरा।
भारत का अन्न भंडार पंजाब
पंजाब को आज भारत का अन्न भंडार कहा जाता है, क्योंकि पंजाब के किसानों की मेहनत के दम पर ही पंजाब अकेले केंद्र सरकार के बफर स्टॉक को पूरा करने के लिए 40 प्रतिशत गेहूं की खपत को पूरा करता है तो वहीं 31.42 प्रतिशत चावल की पूर्ती अकेले पंजाब कर रहा है। आकड़ो की माने तो पूरे भारत में उगने वाले गेहूं में 15 से 17 प्रतिशत गेहू पंजाब से किसान उगाते है तो वहीं करीब 12 प्रतिशत चावल पंजाब से ही आता है, इसके अलावा 48 % मशरूम, 20 % शहद, 10% दूध, और 5% कॉटन पंजाब से ही आता है.. इसके बाद बारी आती है.. सैन्य और सुरक्षा के मामले में- सिख रेजिमेंट भारत के वीर रेजिमेंट में से एक कहलाता है। सिख ने भारत को बाहरी सकंट हो या आंतरिक हर स्थिति में फ्रंट में रह कर लड़ाई लड़ी है। युद्ध की स्थिति हो,, या किसी तरह की आपदा का समय.. सिख हमेशा सबसे पहले मदद के लिए आये.. आपको जानकर गर्व होगा कि आजादी के बाद से भारतीय सेना में सबसे ज्यादा वीरता पुरुस्कार जीतने वाले सिख सैनिक ही है .. जो कि सिख रेजिमेंट का ही हिस्सा रहे है।
सिख रेजीमेंट की ऐतिहासिक फतह
बोले सो निहाल सत् श्री अकाल.. के उद्घोष से ही सैना में जोश भर जाता है.. अब तक सिख रेजीमेंट ने 2 अशोक चक्र, 2 परमवीर चक्र,14 महावीर चक्र, 14 कीर्ति चक्र, 68 वीर चक्र और 48 शौर्य चक्र से सम्मानित किये गए है। 1947-48 में कश्मीर को पाकिस्तान के हाथों में जाने से बचाना हो, 1962 में नेफा सेक्टर में सूबेदार जोगिंदर सिंह द्वारा चीनी सेना के दांत खट्टे करना हो.. 1965 और 1971 में छंब पुंछ औऱ बांग्लादेश के मोर्चे पर सिख रेजीमेंट ने ही विजय का उद्घोष किया था। वहीं 1999 में कारगिल में टाइगर हिल पर सिख रेजीमेंट की ऐतिहासिक फतह को भला कौन भुला सकता है। उच्च पद से लेकर सीमा पर लड़ने वाले जवानों में सिख सैनिकों ने बेझिझक अपने प्राणो की बाजी लगाई है। इसके बाद बात करते है खेल जगत में सिखो के योगदान की.. तो सबसे पहले फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह का ही जिक्र आता है.. जिन्होंने एथलेटिक्स में न केवल भारत के रिप्रेजेंट किया बल्कि उन्होंने दिखाया कि भारत कमजोरो का नही बल्कि ताकतवरो की देश है।
पंजाब के खिलाड़ियों का योगदान
पंजाब हॉकी का गढ़ है, जहां 50 से ज्यादा खिलाड़ी अब तक पंजाब के हुए है.. और 50 से ज्यादा पदक जीत चुके है.. हॉकी में अब तक 10 कप्तान पंजाब के ही सिख हुए.. भारत को पहला वलर्ड कप जीताने वाले कपिल देव भी पंजाब से ही है.. क्रिकेट से लेकर ओलंपिक खिलाड़ियों तक.. पंजाब के खिलाड़ियों के योगदान को हमेशा अहमियत दी जायेगी। कुश्ती हो या शूटिंग सिख खिलाड़ियों ने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। पंजाब मे खेल को बढ़ावा देने के लिए साल 2026 में ही 1791 करोड़ रुपय खर्च किया है। जो हर साल कई गुणा बढ़ा कर ही खर्च किया जा रहा है। 3000 से भी ज्यादा ग्रामीण खेल मैदानों को बनाना, 6000 गावों में फिट रहने के लिए जिम का खोलना.. पंजाब के युवाओ को खेल के प्रति जागरूक करने और उनकी दिलचस्पी बढ़ाने में बड़ा योगदान निभा रही है।
भारत में उद्योंगो से लेकर रोजगार की बढ़ौतरी
वहीं राजनीति में डॉ मनमोहन सिंह जी के योगदान को भला कौन भूल सकता है.. जिन्होंने अपनी नीतियों से भारत को एक दिवालिया देश होने से बचाया.. उन्होंने एक नए भारत का उदय किया और भारत को एक ऐसा देश बनाया जिसकी इकॉनोमी बूम पर पहुंची थी। आज भारत में उद्योंगो से लेकर रोजगार की बढ़ौतरी उनकी नीतियो और समझ के कारण ही मौजूद है। सिख केवल इन्ही क्षेंत्रों में योगदान नहीं दे रहे बल्कि आपदा के समय में भी वो सदैव पूरे देशवासियो के साथ खड़े रहते है। उनके गुरुद्वारों में मिलने वाला लंगर हर भूखे की पेट भरने के लिए ही है.. कोई भूखा न रहे.. ये उनके परोपकार की भावना को दर्शाता है। सही मायने में अगर सिख के योगदान को छोड़ दिया जाये तो भारत से बहुत कुछ निकल जायेगा।












































