Avneet Kaur Sidhu: जब बात देश सेवा की हो, देश का गौरव बढ़ाने की हो, तो केवल भारत के पुरुष ही नही बल्कि महिलायें भी इसमें पीछे नहीं है। एक ऐसी ही महिला है अवनीत कौर सिद्धू.. जिन्होंने न केवल भारत के लिए 100 से ज्यादा पदक जीते, बल्कि उन्होंने पंजाब की पुलिस अधिकारी बन कर कानून व्यवस्था में भी सुधार लाने की कोशिश की। कैसे शुरु हुआ अवनीत कौर सिद्धा के खेल का सफर.. और कैसे वो शूटिंग में भारत को स्वर्ण दिलाने में सफल हुई.. अपने इस लेख में पंजाब की इस बहादुरी बेटी की कहानी को जानेंगे.. जिन्होंने अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने के बाद अब कानून की सेवक बन कर सेवा दे रही है। जानेंगे नवजीत कौर सिद्धू का सफर।
कौन है अवींत कौर सिद्धू? – Avneet Kaur Sidhu
11 दिसंबर 1981 को पंजाब के मुक्तसर में अमृतपाल सिंह सिद्धू के घर जन्मी अवनीत कौर सिद्धू बचपन से ही काफी बहादुर थी। उनके पापा पेशे से वकील थे, जिनसे उन्होंने कानून के दांव पेंच बेहद करीब से जानने का मौका मिला.. माता पिता बठिंडा रहा करते थे इसलिए अवनीत ने बठिंडा के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल से अपनी शुरुआती स्कूलिंग पूरी की और फिर बादल के दशमेश गर्ल्स कॉलेज में दाखिला लिया.. जहां कंप्यूटर एप्लीकेशन में पहले ग्रेजुएशन पूरा किया..2001 में दशमेश कॉलेज में ही पहली बार शूंटिग के प्रति उनका इंट्रस्ट जागा। उनकी मेहनत ने जल्द ही उन्हें एक बड़ी पहचान दिलाई.. लेकिन शूटिंग के साथ साथ उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और 2005 में अंग्रेजी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। अवनीत को शूटिंग के प्रति एक अलग ही जूनून होने लगा औऱ वो कॉलेज की तरफ से प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगी।
कैसे हुई करियर की शुरुआत
उनकी मेहनत रंग लाई और जल्द ही उन्हें 2006 के मेलबर्न में आयोजित 18वें राष्ट्रमंडल खेलों में अपनी प्रतीभा दिखाने का मौका मिला.. वो पहली ही बार में तेजस्विनी सावंत के साथ महिला 10 मीटर एयर राइफल की युगल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिला और सबकी उम्मीदों पर खरी उतरती हुई इस जोड़ी ने पहला स्वर्ण पदक जीता था। वहीं व्यक्तिगत वर्ग में रजत पदक जीता था। ये जीत अवनीत के करियर में सबसे बड़ी जीत थी। अवनीत का करियर चमक गया.. वो भारत को शूटिंग में रीप्रेजेंट करने वाली पंजाब की पहली महिला निशानेबाज हैं जिन्होंने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में अनगिनत पदक जीते। इसके बाद अवनीत ने 2006 में ही दोहा में कांस्य जीता, 2007 में कुवैत में कांस्य जीता तो वहीं 2007 में ही गुवाहटी के राष्ट्रीय खेलो में 2 रजत जीते थे। लेकिन वहीं इसी साल जब अहमदाबाद में राष्ट्रीय शूटिंग चैम्पियनशिप हुई तो अवनीत ने अपनी हुनर दिखाते हुए गोल्ड अपने नाम किया।
लगातार 4 स्वर्ण पदक जीता
खेलों में उनके लगातार बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने अवनीत को 29 अगस्त 2008 के दिन अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित किया था। अपना करियर शुरु करने के मात्र 3 साल के अंदर अर्जुन पुरुस्कार जीतना उनकी उपलब्धि में चार चांद लगा देता है। फिर बारी आई सिडनी में आयोजित 2008 ऑस्ट्रेलिया कप की, जहां अवनीत ने फिर भारत का नाम रोशन करते हुए गोल्ड जीता.. इसके बाद अवनीत ने 2010 में नीदरलैंड के इंटरशूट प्रतियोगिता में टीम में गोल्ड, 2011 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में टीम परफोर्मेंस में गोल्ड जीता था तो वहीं 26 जुलाई 2011 को उनके खेलों में शानदार परफोर्मेंश को देखते हुए पंजाब सरकार ने उन्हें पंजाब पुलिस में डीएसपी का पद दे दिया था। पुलिस की नौकरी के साथ साथ अवनीत ने अपना खेल जारी रखा और लगातार 2012, 2013, 2015, 2016 में अखिल भारतीय पुलिस शूटिंग चैंपियनशिप में लगातार चारों साल स्वर्ण पदक जीता था।
2017 के विश्व पुलिस खेलों में भी उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाते हुए एक स्वर्ण और एक रजत जीता था। अवनीत ने दिसंबर 2011 में ही इंडियन हॉकी टीम के पूर्व कप्तान राजपाल सिंह से शादी की थी.. राजपाल सिंह को भी अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया है। दोनो दंपत्ति का एक बच्चा भी है। अवनीत 45 साल की हो चुकी है और इस वक्त पंजाब पुलिस के सी.आई.डी. (CID) / इंटेलिजेंस विंग में ए.आई.जी. यानि की असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल के रूप में सेवा दे रही है। अवनीत को उनकी ड्यूटी में बेहतर काम के लिए जनवरी 2025 में Chief Minister’s Medal for Outstanding Devotion to Duty से सम्मानित किया गया।
वहीं अवनीत एआईजी बनने से पहले फरीदकोट, मलेरकोटला और फाजिल्का में एस.एस.पी. Senior Superintendent of Police भी रह चुकी है। अपने खेलों से देश का और पंजाब का नाम रोशन करने के सम्मान में अप्रैल 2026 में अवनीत को शी शाइन्स अवार्ड’ (She Shines Award) से भी सम्मानित किया गया था। खेलों में अवनीत का जो योगदान रहा है, उसके करीब भी जाना सबके बस की बात नहीं है.. लेकिन वो आज भी पूरे अनुशासन के साथ अपनी जिम्मेदारियों को संभाल रही है। उनके इस योगदान के लिए पंजाब की इस बेटी की जितनी तारीफ की जाये कम है। अवनीत की जर्नी आपको कितनी प्रेरक लगी हमें कमेंट करके जरूर बतायें।














































