Rahul Gandhi Indore visit: मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर माहौल पूरी तरह गरमा गया है। युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद के इस आयोजन से पहले ही कांग्रेस और स्थानीय प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ जहां पुलिस ने सुरक्षा और क्राउड मैनेजमेंट को लेकर आयोजकों के सामने 31 बेहद सख्त शर्तें रख दी हैं, वहीं दूसरी तरफ कार्यक्रम स्थल के अतिरिक्त किराए को लेकर भी तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
राजीव गांधी हत्याकांड की जांच रिपोर्ट का दिया हवाला| Rahul Gandhi Indore visit
इस पूरे मामले में सबसे चर्चित पहलू पुलिस की ओर से दिया गया संदर्भ है। पुलिस प्रशासन ने 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड की जांच से जुड़ी जस्टिस जेएस वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया है। आयोग की रिपोर्ट में सुरक्षा खामियों, एक्सेस कंट्रोल और बैरिकेडिंग की कमजोरियों को रेखांकित किया गया था। पुलिस का कहना है कि उसी अनुभव और तय प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए ये कड़े सुरक्षा नियम लागू किए जा रहे हैं।
पुलिस की प्रमुख शर्तों में शामिल हैं:
- 1500 वॉलंटियर्स की तैनाती: आयोजकों को 1500 वॉलंटियर तैनात करने होंगे, जिनमें कम से कम 500 महिला वॉलंटियर्स का होना अनिवार्य है।
- सख्त तकनीकी निगरानी: पूरे वेन्यू पर 40 नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे, जिनकी लाइव फीड सीधे पुलिस कंट्रोल रूम में जाएगी।
- मंच की सुरक्षा और डी-जोन: शुक्रवार शाम 6 बजे ही मंच को सील कर बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड से जांच कराई जाएगी। मंच के आगे 25 से 30 फीट का डी-जोन बनेगा, जहां केवल सुरक्षा बल मौजूद रहेंगे।
- भीड़ का हलफनामा: आयोजकों को कार्यक्रम में आने वाले पुरुष और महिलाओं की संख्या का अलग-अलग शपथ-पत्र देना होगा। साथ ही मंच पर मौजूद रहने वाले लोगों के नाम, पते और फोटो आईडी 24 घंटे पहले जमा कराने होंगे।
मैदान के किराए पर मचा घमासान
सुरक्षा नियमों के अलावा कार्यक्रम स्थल के किराए को लेकर भी खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने करीब 12 हजार वर्गमीटर जमीन 17 से 19 सितंबर तक के लिए 10 लाख 8 हजार 175 रुपये में लीज पर ली थी।
हालांकि, इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने निरीक्षण के बाद दावा किया कि 4800 वर्गमीटर जमीन का इस्तेमाल 14 सितंबर से ही शुरू कर दिया गया था। इसके एवज में प्राधिकरण ने 4 लाख 3 हजार 270 रुपये अतिरिक्त मांगे, जिसे कांग्रेस ने जमा तो कर दिया, लेकिन कुल किराया 14 लाख 11 हजार रुपये से अधिक पहुंचने पर प्रशासन पर राजनीतिक दबाव में काम करने का खुला आरोप लगाया। वहीं, बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक कार्यक्रम में अड़ंगा नहीं, बल्कि सरकारी जमीन के तय नियमों और तय शुल्क की सामान्य प्रक्रिया है।












































