Harmanpreet Kaur: 27 अक्टूबर 2022 को Board of Control for Cricket in India यानि की बीसीसीआई ने एक ऐतिहासिक फैसला किया था.. बीसीसीआई के तत्कालीन सचिव जय़ शाह ने क्रिकेट में महिलाओं और पुरुषों को बराबरी देने के लिए और महिलाओ को भी क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ऐलान किया कि अब से PAY EQUITY POLICY को फॉलो किया जायेगा, जिसके तहत महिलाओं औऱ पुरुषो को अब से बराबर सैलरी मिलेगी.. ऐसा करने वाला भारत न्यूजीलैंड के बाद दूसरा देश बना था.. लेकिन इस एक फैसले ने महिला क्रिकेट को न केवल देखने का नजरिया बदला बल्कि महिला टूर्नामेंट में भारतीय टीम के प्रदर्शन में भी एक अलग सा जज्बा देखने को मिला। महिलाओं की परर्फोंमेंश जो अनोखा बदलाव आया उसका परिणाम अभी हाल ही में एशिया कप मे देखने को मिला। महिला टीम ने एशिया कप पर विजय हासिल की.. और इस जीत की सूत्रधार रही कप्तान हरमनप्रीत कौर। जिनकी कप्तानी में भारत ने चौथी बार एशिया कप जीता था.. इतना ही नहीं उन्होंने 2025 में इतिहास रचते हुए पहला वनडे विश्वकप जीता था। हरमनप्रीत कौर एक ऑलराउंडर है, जो बड़े से बड़े मुसीबत से टीम को निकालने का हुनर रखती है। अपने इस लेख में हम भारतीय महिला टीम कप्तान हरमनप्रीत कौर के बारे में जानेंगे।
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर
8 मार्च 1989 को पंजाब के मोगा में जन्मी हरमनप्रीत कौर भुल्लर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक सेंसेशनल खिलाड़ी है। हरमनप्रीत का परिवार बेहद साधारण था, उनके पिता हरमंदर सिंह भुल्लर कोर्ट में क्लर्क थे तो वहीं उनकी मां हाउस वाइफ़ थी। लेकिन हरमंदर सिंह की खेल में बेहद रुचि थी। वो खुद भी काम से समय निकाल कर क्लब स्तर पर क्रिकेट, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल खेला करते थे। हालांकि उन्हें बड़े स्तर पर खेलने का मौका नहीं मिल पाया लेकिन उन्होंने अपने सपने को पूरा किया अपनी बेटी के जरिए। उन्होंने हरमनप्रीत को खेल के प्रति जागरूक किया, और क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। हरमनप्रीत कहती है कि बचपन में वो अपनी उम्र की लड़कियों की तरह गुड्डे गुड़िया से खेलने के बजाय लड़कों के साथ गली में क्रिकेट खेलती थी, जिससे उनमें आक्रामक स्ट्रोक का सामना करने की हिम्मत जागी। लेकिन गली के क्रिकेट से स्टेडियम का सफर अभी लंबा था, लेकिन पिता के साथ ने इस सफर को आसान बनाया। हरमनप्रीत मोगा के ही ज्ञान ज्योति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करती थी, जब वो 15 साल की हुई तब एक दोपहर स्कूल के मालिक कमलदीश सिंह सोढ़ी ने उन्हें लड़कों के साथ खेलते देखा था। सोढ़ी क्रिकेट प्रेमी थे, उन्होंने कौर के पावर-हिटिंग और लंबे छक्के देखे तो उन्हें लगा कि हरमनप्रीत की प्रतिभा को तराशने की जरूरत है, वो देश के लिए कुछ बड़ा करने के लिए जन्मी है।
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20 साल की उम्र में मिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका
उन्होंने तुरंत कौर के पिता को बुलाया और हरमनप्रीत को अपनी ही क्रिकेट एकेडमी ज्ञान ज्योति स्कूल अकादमी में दाखिला लेकर ट्रेनिंग देने की बात की। ये एकेडमी उनके घर से लगभग 30 किलोमीटर दूर था। और हरमनप्रीत के परिवार की आर्थिक हालत ऐसी भी थी कि वो स्कूल और एकेडमी दोनों का खर्चा उठाए, जिसके बाद उनके प्रिंसिपल कमलदीश सिंह सोढ़ी ने कौर की स्कूल की फीस माफ कर दी और साथ ही क्रिकेट की किट भी अपने खर्चे पर दी। उन्होंने ही कौर के पहले कोच के तौर पर उन्हें क्रिकेट की बारीकियां समझाई। स्कूल खत्म होने के बाद कौर ने हंस राज महिला महाविद्यालय (HMV), जालंधर में दाखिला लिया, लेकिन क्रिकेट के कारण वो अपनी पढ़ाई रेगुलर नहीं कर पाई थी। जिसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ से डिस्टेंस लर्निंग से Sociology और Political Science में ग्रेजुएशन पूरा किया। इस दौरान वो पंजाब के लिए खेला करती थी। 7 मार्च 2009 को 20 साल की उम्र में हरमनप्रीत को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने का मौका मिला, उनका पहला मैच पाकिस्तान के खिलाफ ही था। इस मैच में उन्हें बैटिंग करने का मौका नहीं मिला था लेकिन उनके द्वारा फेंके गए 4 ओवर में उन्होंने केवल 10 रन दिए थे और मैदान पर एक बेहतरीन कैच लपका था। कौर के इस जोशीले अंदाज को फैंस के साथ साथ बीसीसीआई ने भी ऑब्जर्व किया, और हरमनप्रीत के रूप में इंडिया को एक ऑलराउंडर सेंसेशन मिल गई थी।
वर्ल्ड कप मैच में इंडियन टीम की कप्तान
साल 2012 में 2012 एशिया कप फाइनल के लिए हरमनप्रीत को एक्टिव कप्तान बनाया था, क्योंकि टीम की कप्तान मिताली राज और उपकप्तान झूलन गोस्वामी, दोनो ही चोट के कारण बाहर हो गई थी, और जैसा की उम्मीद थी, कौर ने फैंस को निराश नहीं किया और पाकिस्ताम को 81 रनो की करारी शिकस्त दी। वहीं 3 फरवरी 2013 को मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला शतक लगाने के बाद तो जैसे उनके करियर में बड़ा उछाल आ गया.. उन्हें मार्च 2013 में बांग्लादेश के खिलाफ होने वाले वर्ल्ड कप मैच में इंडियन टीम की कप्तान बनाया गया। जिसमें हरमनप्रीत ने 195 रन बनाकर सबको चौका दिया था। हरमनप्रीत के टीम में होने के बाद भारतीय महिला टीम एक के बाद एक जीत दर्ज कर एक बेहतरीन टीम कहलाने लगी थी। साल 2016 में महिला ट्वेंटी20 एशिया कप हुआ था, जिसमें हरमनप्रीत ने कप्तानी की और जीत भी दर्ज की। इतनी ही नहीं 2017 में वो महिला विश्वकप के फाइनल में पहुंची थी तब मात्र 9 रनो से हार गई थी.. लेकिन हरमनप्रीत की परफोर्मेंस बड़ी धमाकेदार थी। जुलाई 2017 में कौर आईसीसी महिला वनडे प्लेयर रैंकिंग की टॉप 10 में शामिल होने वाली दूसरी प्लेयर थी।
टेस्टमैच में ऑस्ट्रेलिया को करारी शिकस्त
इसी साल उन्हें टीम ऑफ द ईयर के लिए भी नामित किया गया था। उनकी उपलब्धिया बढ़ती गई और 2022 में एशियाई खेलों में क्रिकेट टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक दिलाया था। उनकी जीत सिलसिला आगे भी जारी रही और दिसंबर 2023 मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए टेस्टमैच में हरमनप्रीत ने ऑस्ट्रेलिया को करारी शिकस्त दी थी। इस योगदान के लिए उन्हें विस्डेन क्रिकेटर ऑफ द ईयर के पांच खिलाड़ियों में से एक के लिए नामित किया गया था। इस सूचि में शामिल होने वाली वो पहली भारतीय महिला खिलाड़ी थी। वहीं उनकी जीत में सबसे ऐतिहासिक रहा 2 नवंबर 2025 का दिन.. जब इंडिया ने अपना पहला विश्व कप जीता था। साल 2026 में हरमनप्रीत को उनके योगदान के लिए पद्म श्री पुरुस्कार से नवाजा गया था। कौर की जीत का सिलसिला अब भी जारी है.. 5 सितंबर 2026 को हरमनप्रीत बतौर कप्तान 150 टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने वाली दुनिया की पहली खिलाड़ी बन गईं है। हरमनप्रीत 37 साल की हो चुकी है लेकिन उनके जोश में अब भी कोई कमी नहीं आई है.. अब देखना ये होगा कि वो और कौन कौन से रिकॉर्ड तोड़ती है।












































