महंगाई की दोहरी मार: अक्टूबर और दिसंबर में रेपो रेट बढ़ा सकता है RBI; लोन की EMI महंगी होने के आसार| RBI repo rate hike

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 16 सितम्बर 2026, 10:36 PM Updated: 16 सितम्बर 2026, 10:36 PM
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RBI repo rate hike: त्योहारी सीजन से ठीक पहले आम आदमी की जेब पर महंगाई का नया झटका लग सकता है। खुदरा महंगाई में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच क्रूड ऑयल का भाव एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सख्त कदम उठाने की तैयारी में दिख रहा है। प्रमुख वित्तीय विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर और दिसंबर में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू बैठकों में नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में 0.25-0.25 फीसदी यानी कुल 0.50% की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो होम लोन और कार लोन की ईएमआई का बढ़ना तय है।

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कच्चा तेल, अल नीनो और महंगाई का दबाव| RBI repo rate hike

यह अनुमान खुदरा महंगाई के नए आंकड़ों के सामने आने के बाद तेजी से मजबूत हुआ है। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जुलाई में 4.45 फीसदी थी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है।

रिजर्व बैंक को ब्याज दर बढ़ाने पर मजबूर करने वाले मुख्य कारण:

  • कच्चे तेल में उबाल: मिडिल ईस्ट में नए तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जिससे आयात महंगा होने का खतरा बढ़ गया है।
  • अल नीनो का असर: मौसम के मिजाज और अल नीनो के कारण फसलों और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
  • मजबूत आर्थिक वृद्धि: संकटों के बावजूद घरेलू विकास दर मजबूत बनी हुई है, जिससे केंद्रीय बैंक के पास महंगाई को काबू में करने के लिए दरें बढ़ाने की गुंजाइश बन रही है।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख: अमेरिकी फेड की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना के चलते भारत और अमेरिका के बीच दरों का अंतर कम हो सकता है। ऐसे में विदेशी पूंजी का आउटफ्लो रोकने के लिए आरबीआई का दरें बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।

SBI, डॉयचे बैंक और HSBC ने क्या कहा?

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई (SBI) के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई 6.5 प्रतिशत के पार जा सकती है और 2027 की शुरुआत में ही यह 6 प्रतिशत से नीचे आएगी। लिहाजा, अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में 0.25-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना और उसके बाद विराम लगाना एक संतुलित कदम होगा।

विदेशी ब्रोकरेज एचएसबीसी (HSBC) का भी मानना है कि महंगाई अगले नौ महीनों तक 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, इसलिए दो बार दरों में इजाफा होना लगभग तय है। वहीं जर्मनी के डॉयचे बैंक ने अपना अनुमान बदलते हुए दर वृद्धि की शुरुआत दिसंबर की बजाय अक्टूबर से ही होने की बात कही है। डॉयचे बैंक का अनुमान है कि यह साइकिल यहीं नहीं थमेगी; फरवरी 2027 में थोड़े ठहराव के बाद अप्रैल और जून 2027 में भी 0.25-0.25% की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे इस पूरे चक्र में कुल 1% तक का इजाफा देखने को मिल सकता है।

एक साल से 5.25% पर स्थिर है रेपो दर

आरबीआई ने पिछले एक साल से अधिक समय से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है और यह फिलहाल 5.25 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई कमर्शियल बैंकों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कर्ज देता है। इसमें इजाफा होते ही बैंकों की लागत बढ़ती है और वे इसका बोझ सीधे आम ग्राहकों पर होम, ऑटो या पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ाकर डालते हैं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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