UPI transaction new rule: डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी पहचान बन चुके यूपीआई (UPI) को लेकर देश की राजनीति में अचानक जबरदस्त उबाल आ गया है। वित्त मंत्रालय के एक हालिया नोटिफिकेशन के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने पिछले दरवाजे से यूपीआई लेन-देन पर चार्ज लगाने का रास्ता साफ कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सीधा आरोप लगाया कि ‘समझौता कर चुकी’ मोदी सरकार अमेरिकी कंपनियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के आगे सरेंडर कर रही है।
नोटिफिकेशन से छिड़ा विवाद: क्या है 2,000 रुपये की सीमा का पेंच? UPI transaction new rule
विवाद की शुरुआत वित्त मंत्रालय के उस ताजा आदेश के बाद हुई, जिसमें बैंकों और डिजिटल पेमेंट प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया गया था कि वे 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेन-देन और RuPay डेबिट कार्ड पेमेंट पर कोई चार्ज न वसूलें। अब तक देश में यूपीआई पूरी तरह मुफ्त रहा है, चाहे रकम कितनी भी हो। लेकिन विपक्ष का कहना है कि अधिसूचना में जानबूझकर 2,000 रुपये की सीमा तय करके सरकार ने यह इशारा कर दिया है कि इससे ऊपर के लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूला जा सकता है। सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि 2,000 रुपये से ज्यादा की पेमेंट पर क्या नियम लागू होंगे।
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 15, 2026
‘दुकानदार पर चार्ज लगेगा तो भुगतेगी जनता’ – राहुल गांधी
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि भले ही 2,000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन की संख्या सिर्फ 5 फीसदी दिखती हो, लेकिन यूपीआई के कुल लेन-देन मूल्य (ट्रांजैक्शन वैल्यू) का करीब 65 फीसदी हिस्सा इन्हीं भुगतानों से आता है।
राहुल ने सरकार के उस तर्क की भी हवा निकालने की कोशिश की जिसमें कहा जा रहा है कि आम ग्राहक से पैसे नहीं लिए जाएंगे:
- कीमतों में जुड़ेगा खर्च: सरकार भले कहे कि ग्राहकों से फीस नहीं ली जा रही, लेकिन जब दुकानदार या व्यापारी पर एमडीआर का बोझ पड़ेगा, तो वह उसे अपनी जेब से नहीं भरेगा। वह सामान की कीमतें बढ़ाकर अंततः ग्राहक की जेब से ही यह पैसा निकालेगा।
- अमेरिकी लॉबी के आगे समर्पण: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की ‘जीरो-एमडीआर’ नीति का कड़ा विरोध कर रही थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि व्यापार समझौते की तरह ही प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने घुटने टेक दिए हैं।
खरगे और जयराम रमेश ने भी दागे सवाल: नोटबंदी के वादों का क्या हुआ?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार पर जनता की जेब काटने का आरोप लगाया। खरगे ने दावा किया कि अगर यह नियम लागू होता है, तो 5,000 रुपये के लेन-देन पर 25 रुपये और 10,000 रुपये के पेमेंट पर 50 रुपये तक की वसूली हो सकती है। खरगे ने सरकार को अतीत की याद दिलाते हुए कहा कि 10 साल पहले जब नोटबंदी लागू की गई थी, तब दावा किया गया था कि इससे कैशलेस इकोनॉमी और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा। अब जब देश डिजिटल लेन-देन का आदी हो चुका है, तब चार्ज लगाकर महंगाई से जूझ रही जनता पर नया बोझ डाला जा रहा है। वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि क्या यह कदम अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार खोलने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के इरादे से उठाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर देश की जनता से यूपीआई शुल्क वसूलने की जमीन तैयार की जा रही है।












































