बृजेश मिश्रा: 700 भारतीयों को फर्जी तरीके से कनाडा भेजने वाले 'ठग' की कहानी…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 17 Mar 2023, 12:00 AM | Updated: 17 Mar 2023, 12:00 AM

आज के इस तकनीकी दौर में ‘फ्रॉड’ शब्द एक आम बात हो गयी है. फिर चाहे साइबर फ्रॉड हो या फिर ऑन पेपर. चंद पैसों के लालच में आज कहीं बच्चों के भविष्य तो कहीं गरीब की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. ऐसा ही एक ताजा केस सामने आया है जिसमे करीब 700 भारतीय बच्चों को नकली वीजा देकर विदेश में पढने का इंतजाम करवाया और आज जब यूनिवर्सिटी ने इन फर्जी दस्तावेजों का खुलासा किया है तो सामने एक बड़ा नाम आ रहा है ब्रिजेश मिश्र का. खैर इनके नाम से दूर अभी इधर आते हैं की आखिर इनके फर्जी दस्तावेज बनते कैसे हैं. विदेश जाने के लिए जो भी दस्तावेज चाहिए उसको बनाने का अधिकार तो सिर्फ सरकार के ही विभाग में आता है तो आखिर ये सरकारी अधिकारी अपने पदों पर बैठकर कर क्या रहे हैं? सरकार की व्यवथा में इतना बड़ा लूपहोल कैसे हो सकता है? आए दिन मजाक-मजाक में सरकारी अधिकारियों की इस लालची मानसिकता ने देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया है. आपको हर दिन के अखबार और समाचारों में किसी न किसी फर्जीवाड़े के भंडाफोड़ की खबर आती है. लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि इस लूपहोल के पीछे असली गुनेहगार सरकारी अधिकारी और मंत्री कभी भी हाईलाइट नहीं होते. तो क्या ये फ्रॉड सबकी मिली मिलायी साजिश है या फिर कमाई का एक जरिया जैसे लोग आमतौर पर अपनी नौकरी कर रहे हों? 

अब आते हैं असली मुद्दे पर …

CBSA ने जारी किया डिपोट नोटिस

हायर एजुकेशन प्राप्त करने के इरादे से कनाडा पहुंचे पंजाब के 700 छात्रों का भविष्य अंधकार में डूबने की कगार पर पहुंच गया है. इन सभी छात्रों को कनाडा सरकार वापिस भारत भेजने की तैयारी कर रही है. यहाँ तक की कनाडाई सीमा सुरक्षा एजेंसी (CBSA) ने इन छात्रों को निर्वासन के नोटिस जारी भी जारी कर दिए हैं. इन सभी छात्रों के शैक्षणिक संस्थानों को दाखिले के ऑफर लेटर फर्जी पाए गए थे. जिसका ये साफ़ साफ़ मतलब निकल कर आता है कि इन सभी छात्रों को जल्द ही वापिस भारत भेज दिया जाएगा. अब ऐसे में सवाल उठता है की आखिर कैसे इतने सारे बच्चे फर्जी डॉक्युमेंट्स लेकर कनाडा पहुंच गए. क्या इन छात्रों ने ही कोई फ्रॉड किया है या किसी ने इसके साथ धोखा किया है?

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10+2 के हैं सभी छात्र

दरअसल, ये सभी छात्र 10+2 पास है. हायर स्टडीज लिए इन सभी स्टूडेंट्स ने कनाडा जाने की योजना बनाई. जिसके लिए जालंधर की एजुकेशन माइग्रेशन सर्विसेज देने वाली एक कंपनी का सहारा लिया. इस कंपनी के एक एजेंट बृजेश मिश्रा नाम के शख्स ने इन छात्रों के भविष्य के साथ ये खिलवाड़ किया है. इस एजेंट ने छात्रों को कनाडा में पढ़ने के स्टडी वीजा दिलाया था. जोकि पूरी तरह फर्जी था, जिसके कारण अब इन छात्रों को वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है.

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ऐसे खड़ी कर ली फर्जी कंपनी

शिकायत के बाद जब पुलिस ने ब्रिजेश और उसकी कम्पनी ने जानकारी जुताई तो कई चौकाने वाले खुलासे हुए. दरअसल इस फर्जीवाड़े से पहले भी साल 2013 में इसी फर्जी दस्तावेज के मामले में ब्रिजेश मिश्र को गिरफ्तार किया जा चुका है, उस वक़्त ब्रिजेश इमीगग्रेशन कंसल्टेंसी नाम से एक फर्जी कंपनी चला रहा था. और जब पुलिस ने इसके दफ्तर पर चाप मारा तो जिसमे उन्हें कैश में मोती रकम स्टूडेंट्स की फाइल्स और उनके फर्जी डाक्यूमेंट्स मिले थे. लेकिन ये यहीं जाकर नहीं रुका उसके अगले ही साल यानी साल 2014 में इसने एजुकेशन माइग्रेशन सर्विसेज नाम से एक फर्म स्टार्ट की. और इसी कंपनी के जरिए भारतीय छात्रों को विदेश में पढाई के लिए भेजने के दावे किये गए. पंजाब से लेकर दिल्ली  तक कम्पनी कि ऑफिस खुली जहाँ से काउंसलिंग के जरिए विदेशो में पढाई के लिए फर्जी स्टडी वीजा दिलवाने का काम धड़ल्ले से शुरू हो गया.

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ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

आपने ये कहावत तो सुनी ही होगी’ कि आखिर बकरे की माँ कबतक खैर मनाएगी?’ ठीक ऐसे ही ब्रिजेश मिश्र के साथ भी हुआ. बृजेश मिश्रा ने स्टडी वीजा के नाम पर छात्रों से ओंटारियो के हंबर कॉलेज में एंट्रेंस फीस सहित हर स्टूडेंट से 16-16 लाख रुपये की मोटी फीस ऐंठी. कनाडा पहुंचने पर छात्रों को पता चला की हमारे साथ धोखाधड़ी हुई है. इस कॉलेज में हमें एडमिशन मिला ही नहीं है. हमारे सभी कागज फर्जी है. इस फर्जीवाड़े की पोल उस समय खुली जब सीबीएसए ने छात्रों को दिए वीजा के आधार पर दस्तावेजों की जांच की. और अब सीबीसीए इन छात्रों को वापिस भेज रही है.

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फर्जीवाड़ा हुआ, खुलासा हुआ. इसके लिए हम जांच एजेंसियों की तारीफ करते हैं और बेशक करनी चाहिए. लेकिन सवाल ये है की आखिर ऐसे ही बच्चों के भविष्य के साथ कब तक खिलवाड़ किया जाएगा? जहाँ एक तरफ देश में बेरोज़गारी इतनी तेजी से बढ़ रही है वहां देश के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ काफी निराश करने वाला है. और आखिरी बार फिर यही सवाल कि आखिर बिना सरकारी अफसरों के जब ये दस्तावेज नहीं तैयार ही नहीं हो सकते तो जांच एजेंसियां चेहरे के पीछे छुपे असली मुजरिम की तलाश क्यों नहीं करती?

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