Rahul Gandhi: 2029 के लिए PM फेस को लेकर सियासी गलियारों और जनता के बीच अटकलें तेज हो गई हैं। इस रेस ने एक नई जुबानी जंग को हवा दे दी है, जहां राजनीति का एक तबका थलपति विजय की ओर झुकता दिख रहा है, तो दूसरा तबका राहुल गांधी के पक्ष में मजबूती से खड़ा है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं इस रेस में आगे क्या होने वाला है और इसके पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है।
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पर्दे के पीछे की कहानी यह है कि मई 2026 के विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी TVK ने शानदार प्रदर्शन किया था। वे 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरे, लेकिन बहुमत (118) से दूर रह गए। ऐसे में कांग्रेस के 5 विधायकों ने समर्थन देकर विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया। बदले में, कांग्रेस को 1967 के बाद पहली बार तमिलनाडु कैबिनेट में जगह (2 मंत्री पद) मिली। लेकिन सरकार बनने के महज 100 दिनों के भीतर ही दोनों दलों में राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को लेकर टकराव शुरू हो गया।
क्या है विवाद की वजह?
विवाद की असली वजह 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री (PM) पद का चेहरा बनने की होड़ है। पिछले कुछ समय से सत्तारूढ़ TVK के कई मंत्रियों, विधायकों और नेताओं ने जनसभाओं और पोस्टरों के जरिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को 2029 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया है। हाल ही में आए एक राष्ट्रीय सर्वे में विजय को पीएम पद की पसंद के तौर पर देश में तीसरा स्थान मिला, जिसने टीवीके नेताओं की इस महत्वाकांक्षा को और हवा दे दी। यह बात राहुल गांधी को पीएम पद का एकमात्र चेहरा मानने वाली कांग्रेस को रास नहीं आ रही है।
तमिलनाडु से उठी चिंगारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु की गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के बीच 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री (PM) उम्मीदवार के चेहरे को लेकर विवाद छिड़ गया है।
तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज टीवीके (TVK) प्रमुख और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा अचानक राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट किए जाने के बाद देश की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है। साल 2026 में राज्य की सत्ता संभालने के महज 100 दिन पूरे होने पर ही टीवीके नेताओं ने सीधे 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए विजय को प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार घोषित कर दिया है।
टीवीके का नया नैरेटिव
टीवीके के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें वित्त मंत्री मुरुगेसन और प्रमुख नेता आधवन अर्जुना शामिल हैं, ने एक नया क्षेत्रीय कार्ड खेला है। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से तर्क दिया कि देश की सत्ता का केंद्र सिर्फ उत्तर भारतीय राज्य नहीं होने चाहिए। अब समय आ गया है कि देश का अगला प्रधानमंत्री दक्षिण भारत (तमिलनाडु) से होना चाहिए और इसके लिए ‘थलपति’ विजय से बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
इस पूरी चिंगारी को सबसे ज्यादा हवा हाल ही में आए India Today के ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) सर्वे से मिली। इस सर्वे रिपोर्ट में दिखाया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बाद सी. जोसेफ विजय देश में पीएम पद की तीसरी सबसे पसंदीदा पसंद बनकर उभरे हैं। इस सर्वे के आते ही टीवीके के नेताओं और कार्यकर्ताओं का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया।
सर्वे रिपोर्ट को आधार बनाकर टीवीके कार्यकर्ताओं ने पूरे तमिलनाडु, विशेषकर थूथुकुडी जैसे इलाकों में ‘विजय फॉर पीएम’ के बड़े-बड़े पोस्टर्स लगा दिए हैं। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने यहां तक दावा कर दिया है कि विजय की लोकप्रियता सिर्फ दक्षिण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत की जनता भी उनके नेतृत्व और स्टाइल को पसंद कर रही है।
100 दिन बनाम 2029 का लक्ष्य
टीवीके के मंत्रियों ने विजय सरकार के 100 दिन के सफल कार्यकाल का जश्न मनाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि विजय के पास एक कुशल प्रशासक की क्षमता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 2029 का आम चुनाव देश की राजनीति के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट होगा और विजय इसमें केंद्रीय भूमिका निभाते हुए देश का नेतृत्व करेंगे।
क्यों भड़की कांग्रेस?
गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस पार्टी टीवीके की इस पूरी ब्रांडिंग से बेहद असहज हो गई है। कांग्रेस सांसद पी. जोतिमणि और राज्य अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने इस पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि टीवीके के नेता अभी भी फैन क्लब माइंडसेट (प्रशंसक मानसिकता) से बाहर नहीं आ पाए हैं। कांग्रेस का साफ कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का चेहरा केवल और केवल राहुल गांधी हैं।
कांग्रेस का कड़ा रुख और इस्तीफे की धमकी
सहयोगी दल तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) की ओर से मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने के बाद कांग्रेस का कड़ा और बेहद आक्रामक रुख सामने आया है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का नेता और 2029 में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार केवल राहुल गांधी को ही माना जाएगा।
तमिलनाडु सरकार में कांग्रेस कोटे के पर्यटन मंत्री एस. राजेश कुमार ने तो यहां तक चेतावनी दे दी है कि यदि टीवीके ने राहुल गांधी के नाम पर सहमति नहीं जताई, तो वह और उनके साथी मंत्री पी. विश्वनाथन (उच्च शिक्षा मंत्री) तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे और कांग्रेस सरकार से बाहर हो जाएगी। इस अल्टीमेटम के बाद अब तमिलनाडु की इस नवगठित गठबंधन सरकार के भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं।













































