Lag Ja Gale: साल 1964 में एक सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म आई थी—’वो कौन थी’। फिल्म तो बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ गई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा का सबसे सदाबहार गाना, जिसे आज करोड़ों लोग सुनते हैं, उसे फिल्म के डायरेक्टर ने रद्दी समझकर रिजेक्ट कर दिया था? जी हां, लता मंगेशकर की आवाज में सजा गाना ‘लग जा गले’ कभी रिलीज ही नहीं होता, अगर फिल्म के हीरो एक जिद पर अड़ न जाते! तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि कैसे एक फ्लॉप फिल्म का गाना आज दुनिया भर में ब्लॉकबस्टर बन गया।
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डायरेक्टर ने Lag Ja Gale को बताया रद्दी
यह कहानी शुरू होती है साल 1963 में, जब फिल्म ‘वो कौन थी’ के संगीत की तैयारी चल रही थी। दिग्गज संगीतकार मदन मोहन ने एक बेहद खूबसूरत धुन तैयार की और बड़े उत्साह के साथ फिल्म के डायरेक्टर राज खोसला को सुनाई। लेकिन मदन मोहन की उम्मीदों पर तब पानी फिर गया, जब राज खोसला ने धुन सुनते ही साफ मना कर दिया।
राज खोसला का मानना था कि यह एक सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म है और यह रोमांटिक गाना फिल्म के गंभीर माहौल में बिल्कुल फिट नहीं बैठता। डायरेक्टर ने इसे एक तरह से ‘रद्दी’ समझकर ठुकरा दिया था। मदन मोहन इस रिजेक्शन से गहरे सदमे में थे, उन्हें पूरा भरोसा था कि इस धुन में कुछ खास है। तभी इस मायूसी के बीच एंट्री होती है फिल्म के लीड एक्टर मनोज कुमार की।
मनोज कुमार की जिद
निराश मदन मोहन ने हार नहीं मानी। वे इस धुन को लेकर सीधे फिल्म के हीरो मनोज कुमार के पास पहुंचे। जब मनोज कुमार ने यह धुन सुनी, तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। उन्हें समझ आ गया कि यह कोई आम गाना नहीं, बल्कि एक इतिहास बनने जा रहा है। मनोज कुमार सीधे डायरेक्टर राज खोसला के पास गए और अड़ गए कि गाना तो यही रहेगा!
मनोज कुमार की जिद के आगे राज खोसला को झुकना पड़ा और उन्होंने गाने को दोबारा ध्यान से सुना। इस बार जब उन्होंने गाने की गहराई और मदन मोहन की कला को समझा, तो वे अपनी गलती पर इतने शर्मिंदा हुए कि उन्होंने खुद को मारने के लिए अपना जूता तक उठा लिया था और खुद को बेवकूफ कहा था।
फ्लॉप से ब्लॉकबस्टर तक का सफर
मनोज कुमार की इस जिद की वजह से गाना फिल्म में शामिल तो हो गया, लेकिन कहानी में अभी एक और ट्विस्ट बाकी था। साल 1964 में जब फिल्म ‘वो कौन थी’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो बॉक्स ऑफिस पर इसे बहुत ठंडा रिस्पॉन्स मिला। शुरुआती दौर में फिल्म और इसके गानों को फ्लॉप की केटेगरी में डाल दिया गया था।
लेकिन कहते हैं ना कि असली सोने की परख वक्त के साथ होती है। धीरे-धीरे इस गाने का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा। लता मंगेशकर की मखमली आवाज और मदन मोहन के जादुई संगीत ने ‘लग जा गले’ को अमर बना दिया।
आज इस बात को 60 से ज्यादा साल बीत चुके हैं, लेकिन यूट्यूब से लेकर हर म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर इस गाने को करोड़ों बार सुना जा चुका है। जो गाना कभी रिजेक्ट होने वाला था, आज वो म्यूजिक इंडस्ट्री का सबसे बड़ा लेजेंड बन चुका है। वैसे क्या ‘लग जा गले’ (Lag Ja Gale) आपका भी फेवरेट गाना है? मदन मोहन और राज खोसला का यह किस्सा आपको कैसा लगा।












































