Dr Realtor Dehradun controversy: उत्तराखंड के देहरादून स्थित रियल एस्टेट कंपनी ‘डॉ. रियल्टर’ (Docteur Realtor LLP) और उसकी पूर्व महिला कर्मचारी आशा (Realtor Asha) के बीच का विवाद अब सोशल मीडिया पर गरमा गया है। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक भावुक वीडियो में आशा फूट-फूट कर रोती नजर आ रही हैं और उन्होंने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना व पैसा वसूलने की धमकियां देने के आरोप लगाए हैं।
पीड़िता का दावा है कि जब उन्होंने दो साल की नौकरी के बाद अपने बकाये पैसे मांगे और खुद का काम शुरू करने की सोची, तो कंपनी ने उल्टे उन्हें 37 से 38 लाख रुपये का बिल थमा दिया और धमकियां देनी शुरू कर दीं
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‘बकाये मांगने पर दिया ₹38 लाख का बिल और धमकियां’ | Dr Realtor Dehradun controversy
वीडियो में अपनी आपबीती साझा करते हुए आशा ने बताया कि वे पिछले दो सालों से देहरादून के बल्लूपुर चौक (चकराता रोड) स्थित द वेदास बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर चल रही कंपनी ‘डॉ. रियल्टर’ में पूरी ईमानदारी से काम कर रही थीं। जब उन्होंने स्वतंत्र रूप से अपना काम शुरू करने का फैसला लिया और कंपनी से अपने मेहनत के बकाये पैसे मांगे, तो कंपनी का रवैया पूरी तरह बदल गया।
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आशा का आरोप है कि कंपनी ने उनके बकाये पैसे देने के बजाय उल्टा उन पर 37 से 38 लाख रुपये की देनदारी निकाल दी। कंपनी का कहना था कि यह रकम उन क्लाइंट्स को दिए गए डिस्काउंट की भरपाई के लिए है, जिन्हें प्लॉट बेचे गए थे। आशा ने दावा किया कि कंपनी के लोग उन्हें खुलेआम धमका रहे हैं कि, “पैसे तो हम तुमसे निकलवा कर ही रहेंगे।” इतना ही नहीं, उन पर यह दबाव भी बनाया जा रहा है कि वे अपनी नई कंपनी या काम में जो भी कमाई करेंगी, उसका हिस्सा भी उन्हें इस कंपनी को देना होगा।
‘कर्मचारियों के पैसे दबाने का चल रहा खेल’
आशा ने आरोप लगाया कि कंपनी की यह पुरानी कार्यशैली रही है कि वह कर्मचारियों के आधे पैसे होल्ड पर रख लेती है। जब कोई कर्मचारी अपने हक के पैसे मांगता है या कंपनी छोड़ना चाहता है, तो उसे धमकाया जाता है और उल्टे उसी पर पैसे निकालने का दबाव बनाया जाता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया है और कई लोग कंपनी के खिलाफ सख्त एक्शन लेने और उसे बैन करने की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
यह वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं:
- कंपनी पर बैन और जांच की मांग: कई यूजर्स ने आशा के समर्थन में आवाज उठाई है। उनका कहना है कि अगर यह आरोप सच हैं, तो इस कंपनी को तत्काल प्रभाव से बैन किया जाना चाहिए और इसके सीईओ व मैनेजर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने मांग की कि इस बात की गहन जांच हो कि कंपनी ने पहले कितने कर्मचारियों के साथ ऐसा किया है।

- दूसरे पक्ष की बात सुनने और कोर्ट जाने की सलाह: वहीं, कुछ यूजर्स का मानना है कि यह केवल एकतरफा कहानी है। सोशल मीडिया पर फैसला सुनाने से पहले कंपनी का पक्ष जानना भी जरूरी है। कई लोगों ने आशा को सलाह दी कि वे केवल सोशल मीडिया पर वीडियो डालने के बजाय सीधे पुलिस और कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं ताकि कानूनी तौर पर मामले का निपटारा हो सके।















































