Tarique Rahman China visit: बांग्लादेश की विदेश नीति को लेकर जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में ढाका की विदेश नीति धीरे-धीरे चीन की तरफ झुकती नजर आ रही है। चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में रहमान की शुरुआती विदेश यात्राओं और चीन के साथ बढ़ते सहयोग को इस बदलाव के संकेत के तौर पर बताया।
भारत की जगह चीन और मलेशिया का दौरा| Tarique Rahman China visit
चेलानी के मुताबिक, फरवरी में प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान ने अपनी शुरुआती विदेश यात्राओं के लिए भारत के बजाय मलेशिया और चीन को चुना। यह कदम इसलिए चर्चा में है क्योंकि बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्रियों की पहली विदेश यात्राओं में भारत को पारंपरिक तौर पर अहम स्थान मिलता रहा है।
Bangladesh’s China Pivot
When Tarique Rahman became Bangladesh’s prime minister in February, Modi was among the first world leaders to congratulate him and extend a formal invitation for a state visit to New Delhi. But Rahman did not accept the invitation, as he faced domestic…
— Dr. Brahma Chellaney (@Chellaney) August 12, 2026
चेलानी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन शुरुआती नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने रहमान को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी। मोदी ने उन्हें नई दिल्ली की राजकीय यात्रा का औपचारिक निमंत्रण भी दिया था। हालांकि, रहमान ने इस निमंत्रण को स्वीकार नहीं किया। चेलानी का मानना है कि 2024-25 की राजनीतिक हिंसा और उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश में बने घरेलू राजनीतिक माहौल के कारण रहमान पर नई दिल्ली से दूरी बनाए रखने का दबाव रहा होगा।
बीजिंग में चीन को बताया भरोसेमंद साझेदार
जून में मलेशिया के बाद तारिक रहमान चीन पहुंचे। बीजिंग में उन्होंने चीन को बांग्लादेश का सबसे मूल्यवान और भरोसेमंद साझेदार बताया। चेलानी के अनुसार, रहमान का यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी को समझने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। चेलानी ने चीन यात्रा के दौरान हुए कई समझौतों और प्रस्तावित सहयोग का भी जिक्र किया। इनमें बंगाल की खाड़ी स्थित मोंगला और चट्टोग्राम बंदरगाहों के विकास और आधुनिकीकरण में चीन की भूमिका शामिल है। इसके अलावा भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास प्रस्तावित तीस्ता नदी जल परियोजना, रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने तथा चीन से हथियारों की ज्यादा आपूर्ति जैसे मुद्दे भी उनके दावे में शामिल हैं।
300 मिलियन डॉलर से ज्यादा की चीनी मदद का भी जिक्र
चेलानी ने बांग्लादेश के लिए चीन की 300 मिलियन डॉलर से अधिक की सहायता और विशेष आर्थिक क्षेत्रों में चीनी विनिर्माण इकाइयों को स्थानांतरित करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इन कदमों से आर्थिक रिश्तों के साथ-साथ रणनीतिक स्तर पर भी चीन की मौजूदगी बढ़ सकती है।
भारत पर निर्भरता अभी भी बनी हुई
हालांकि, चेलानी यह भी मानते हैं कि बांग्लादेश के लिए भारत को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं है। ढाका अभी जरूरी आपूर्ति, व्यापार मार्गों, बिजली, पानी और औद्योगिक जरूरतों के लिए भारत पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में तारिक रहमान की नीति भारत से पूरी तरह दूरी बनाने के बजाय दोनों देशों के बीच रिश्तों को नए संतुलन के साथ आगे बढ़ाने की हो सकती है।
ब्रिक्स से दूरी, लेकिन भारत आने की इच्छा
चेलानी के मुताबिक, रहमान अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूरी बनाकर घरेलू राजनीति में एक मजबूत संदेश देना चाहते हैं। शेख हसीना के हाल में नई दिल्ली में मीडिया के सामने आने के बाद यह मुद्दा उनके लिए और संवेदनशील हो सकता है।
हालांकि, रहमान ने भारत की पूर्ण राजकीय यात्रा करने की इच्छा जताई है। इससे संकेत मिलता है कि बांग्लादेश नई दिल्ली से रिश्ते पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं है। चेलानी के अनुसार, रहमान चाहते हैं कि भारत-बांग्लादेश संबंध आगे बढ़ें, लेकिन इस बार दोनों देशों के बीच रिश्ते समान शर्तों और आपसी सम्मान के आधार पर हों।











































