मोजतबा खामेनेई की तबीयत पर फिर बढ़ी चिंता, कुछ हुआ तो कौन संभालेगा ईरान की सत्ता? Mojtaba Khamenei health

Nandani | Nedrick News Iran Published: 10 अगस्त 2026, 07:18 PM Updated: 10 अगस्त 2026, 07:18 PM
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Mojtaba Khamenei health: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की तबीयत को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। इजरायली मीडिया आउटलेट चैनल 14 ने दावा किया है कि उनकी हालत काफी गंभीर है। कुछ रिपोर्टों में तो यह भी कहा गया है कि उनकी मौत जल्द हो सकती है। हालांकि, इन खबरों की अभी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की सरकार ने भी उनकी सेहत को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।

मोजतबा खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद से उनकी सार्वजनिक मौजूदगी बहुत कम रही है। वह लंबे समय से दुनिया के सामने दिखाई नहीं दिए हैं। यही वजह है कि उनकी सेहत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में अब ध्यान सिर्फ उनकी बीमारी या स्वास्थ्य पर नहीं है, बल्कि इस बात पर भी है कि अगर वह अपनी जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति में नहीं रहते या उनकी मौत हो जाती है, तो ईरान की सत्ता आगे कैसे चलेगी।

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अगला सुप्रीम लीडर कौन हो सकता है? Mojtaba Khamenei health

ईरान की राजनीति और धार्मिक व्यवस्था में कई ऐसे नाम हैं, जिन्हें भविष्य के सुप्रीम लीडर के तौर पर देखा जाता रहा है। इनमें अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी का नाम काफी अहम है। वह देश के वरिष्ठ धर्मगुरुओं में शामिल हैं। गार्जियन काउंसिल से जुड़े रहने के साथ-साथ ईरान के धार्मिक शिक्षा तंत्र में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

अयातुल्लाह हाशेम हुसैनी बुशेहरी भी संभावित नामों में शामिल हैं। कोम के धार्मिक प्रतिष्ठान में उनका प्रभाव है और वह असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स से भी जुड़े रहे हैं। इसके अलावा गुलाम-हुसैन मोहसिनी-एजेई का नाम भी महत्वपूर्ण है। वह ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख हैं और देश की न्यायिक तथा सुरक्षा व्यवस्था में लंबे समय से अहम भूमिका निभाते आए हैं।

एक और नाम हसन खुमैनी का है। वह इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी के पोते हैं। हालांकि, उनके राजनीतिक विचार ईरान के कई कट्टरपंथी नेताओं से अलग माने जाते हैं, इसलिए उनकी स्थिति बाकी दावेदारों से कुछ अलग है।

क्या एक व्यक्ति की जगह परिषद संभाल सकती है सत्ता?

ईरान के संविधान में ऐसी स्थिति के लिए सिर्फ नए सुप्रीम लीडर के चुनाव की व्यवस्था नहीं है, बल्कि अंतरिम नेतृत्व का रास्ता भी मौजूद है। अगर किसी एक व्यक्ति को अगला सुप्रीम लीडर चुनने पर सहमति नहीं बनती, तो सामूहिक नेतृत्व या नेतृत्व परिषद जैसा विकल्प सामने आ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो ईरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अभी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक और धार्मिक ताकत एक ही सुप्रीम लीडर के पास होती है। सामूहिक नेतृत्व का मतलब होगा कि महत्वपूर्ण फैसलों में कई संस्थानों और नेताओं की भूमिका बढ़ सकती है।

सुप्रीम लीडर की मौत या असमर्थता पर क्या होगा?

ईरान के संविधान के आर्टिकल 111 में इस स्थिति के लिए साफ व्यवस्था दी गई है। अगर सुप्रीम लीडर की मौत हो जाती है, वह इस्तीफा देते हैं, पद से हटा दिए जाते हैं या कुछ समय के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम नहीं रहते, तो एक तीन सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद उनकी जगह काम कर सकती है।

इस परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम-हुसैन मोहसिनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के एक धार्मिक सदस्य को शामिल किया जाएगा। यह परिषद तब तक सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारियां संभाल सकती है, जब तक नया स्थायी नेता नहीं चुना जाता।

88 सदस्य करेंगे नए नेता का चुनाव

ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती। यह जिम्मेदारी 88 सदस्यों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की है। सुप्रीम लीडर का पद खाली होने के बाद यही संस्था नए नेता के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है। यह चुनाव सामान्य राजनीतिक चुनाव जैसा नहीं होगा। सुप्रीम लीडर के पास ईरान की सेना, विदेश नीति, न्यायपालिका और कई अहम सरकारी संस्थानों पर व्यापक अधिकार होते हैं। इसलिए नए नेता का चयन देश की आगे की राजनीति और विदेश नीति पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

सत्ता संकट में IRGC का असर बढ़ सकता है

अगर नेतृत्व अचानक बदलता है और देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है, तो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की भूमिका खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। IRGC का प्रभाव ईरान की सेना और सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों और अर्थव्यवस्था में भी उसका काफी दखल माना जाता है। ऐसे समय में जब नए सुप्रीम लीडर को लेकर खींचतान हो, IRGC किसी ऐसे उम्मीदवार के पक्ष में प्रभाव डाल सकता है जिसे सुरक्षा प्रतिष्ठान का समर्थन हासिल हो।

हालांकि, यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि सत्ता परिवर्तन किस हालात में होता है। धार्मिक नेताओं, राजनीतिक संस्थानों और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच शक्ति का संतुलन किस तरफ जाता है, यही सबसे बड़ा फैक्टर होगा।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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