Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद से इस वक्त कई बड़ी खबरें सामने आ रही हैं, जो सीधे आपकी जेब, आपके सफर और आपकी सुरक्षा से जुड़ी हैं। पहली बड़ी खबर NH-9 पर लगा 12 किलोमीटर लंबा महाजाम! मानसून की बारिश और कांवड़ डायवर्जन ने रोकी पहियों की रफ्तार, 15 मिनट का सफर घंटों में बदला।
दूसरी बड़ी खबर साहिबाबाद रील मर्डर केस में बड़ा खुलासा! पुलिस के हाथ लगा समीर का आखिरी वीडियो चोरी नहीं, रील बनाने गया था किशोर, आरोपी गार्ड गिरफ्तार। तीसरी बड़ी खबर बिजली बिल को लेकर UPPCL का बड़ा यू-टर्न! नाम और पता छिपाने का फैसला लिया वापस, गाजियाबाद-नोएडा के किराएदारों और सोसाइटी निवासियों को मिली बड़ी राहत।
चौथी बड़ी खबर छोटे दुकानदारों की चांदी! गाजियाबाद नगर निगम हाउस टैक्स में करने जा रहा है भारी कटौती 5,875 का टैक्स अब घटकर होगा सिर्फ 1,762। और पाँचवीं बड़ी खबर हाईराइज सोसायटियों में बिल्डरों की मनमानी! सरकारी चार्ज है मात्र 500, लेकिन बिजली लोड बढ़ाने के नाम पर वसूले जा रहे हैं 25 हजार रुपये तक, जानिए क्या है इसका कानूनी समाधान। तो चलिए इस लेख के जरिए इन सभी खबरों को विस्तार से जानते हैं।
और पढ़ें: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे सील से लेकर 6 घंटे बिजली गुल तक | Top 5 Ghaziabad News
NH-9 पर लगा 12 किलोमीटर लंबा महाजाम
गाजियाबाद की पहली खबर कांवड़ यात्रा के रूट डायवर्जन को लेकर जहां राष्ट्रीय राजमार्ग 9 (NH-9) पर कांवड़ यात्रा के रूट डायवर्जन और मानसून की भारी बारिश के चलते 12 किलोमीटर लंबा भीषण ट्रैफिक जाम लग गया है। इसके कारण आम दिनों में महज 15 मिनट में पूरा होने वाला सफर अब घंटों में तब्दील हो गया है और मेरठ तिराहे के पास वाहनों की रफ्तार पूरी तरह थम गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांवड़ मेले के मद्देनजर Ghaziabad Traffic Police ने प्रमुख सड़कों को समय से पहले वन-वे (One-way) कर दिया है। वाहनों के लिए मार्ग बदलने से एनएच-9 (NH-9) और लिंक रोड पर गाड़ियों का दबाव अचानक कई गुना बढ़ गया है।
Delhi-NCR में जारी मानसून की भारी बारिश के कारण इंदिरापुरम के शिप्रा अंडरपास, न्याय खंड और सेक्टर-62 की ओर जाने वाली सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया है। जलभराव की वजह से गाड़ियां बेहद धीमी गति से रेंग रही हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा गाजियाबाद से सराय काले खां के बीच चल रहे रोड कारपेटिंग और रिपेयरिंग के काम की वजह से भी कुछ लेंस को प्रतिबंधित किया गया है, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है।
प्रभावित मार्ग
NH-9 (मेरठ तिराहा लिंक रोड)
राजनगर एक्सटेंशन एलिवेटेड रोड
लालकुआं और जीटी रोड हाईवे स्ट्रेच
इंदिरापुरम शिप्रा अंडरपास
यात्रियों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी और वैकल्पिक मार्ग
यदि आप गाजियाबाद, नोएडा या दिल्ली की ओर यात्रा करने वाले हैं, तो ट्रैफिक पुलिस ने परेशानी से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) के मुख्य लेन का उपयोग करें और लोकल सर्विस रोड पर जाने से बचें। पुराने गाजियाबाद, चौधरी मोड़ या घंटाघर की तरफ जाने के बजाय मेट्रो या रैपिड रेल (RRTS) का विकल्प चुनें ताकि घंटों लंबे जाम से बचा जा सके।
पुलिस के हाथ लगा समीर का आखिरी वीडियो (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र के अर्थला से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां 17 वर्षीय समीर की मौत के मामले में नया मोड़ आया है। परिजनों ने पुलिस को समीर का आखिरी वीडियो सौंपा है, जिससे यह साफ होता है कि वह चोरी करने नहीं बल्कि सोशल मीडिया के लिए रील बनाने गया था। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सिक्योरिटी गार्ड को गिरफ्तार कर उसका लाइसेंसी हथियार जब्त कर लिया है।
परिजनों के मुताबिक, समीर सिर्फ दो दिन पहले ही कानपुर से आया था। रविवार दोपहर करीब 1 बजे वह अपने दो दोस्तों के साथ अर्थला स्थित पार्श्वनाथ की निर्माणाधीन बिल्डिंग में रील शूट कर रहा था। वहीं, बिल्डिंग की रखवाली कर रहे सुरक्षाकर्मी विवेक यादव का दावा है कि कुछ लड़के परिसर से लोहे की सरिया चुराने की कोशिश कर रहे थे और उसने डराने के इरादे से अपनी लाइसेंसी सिंगल-बैरल बंदूक से ‘वार्निंग शॉट’ चलाया था, लेकिन गोली सीधे समीर के सीने में जा लगी। गोली लगने के बाद समीर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। समीर के भाई और परिजनों ने आरोप लगाया है कि गोली मारने से पहले समीर के साथ बेरहमी से मारपीट भी की गई थी।
पुलिस की कार्रवाई
साहिबाबाद पुलिस (ACP अमित सक्सेना) के अनुसार, पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आरोपी गार्ड विवेक यादव को हिरासत में ले लिया है। वारदात में इस्तेमाल हथियार को कब्जे में ले लिया गया है और परिजनों द्वारा सौंपे गए “आखिरी वीडियो” को भी जांच में शामिल कर लिया गया है, ताकि हत्या की कड़ियों को पूरी तरह साफ किया जा सके।
बिजली बिल को लेकर UPPCL का बड़ा यू-टर्न (Top 5 Ghaziabad News)
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से इस वक्त एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। यूपीपीसीएल ने बिजली बिलों से उपभोक्ताओं का नाम और पता छिपाने (Masking) का अपना फैसला वापस ले लिया है। इस यू-टर्न के बाद अब बिजली का बिल पहले की तरह ही सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों में पते के प्रमाण (Address Proof) के रूप में पूरी तरह मान्य रहेगा। पावर कॉर्पोरेशन के इस फैसले से गाजियाबाद और नोएडा सहित पूरे प्रदेश के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिली है।
क्यों वापस लेना पड़ा फैसला?
दरअसल, यूपीपीसीएल ने प्राइवेसी और सुरक्षा का हवाला देते हुए बिलों पर नाम-पता छिपाकर सिर्फ अकाउंट नंबर और मोबाइल नंबर के आखिरी चार अंक दिखाने का आदेश जारी किया था। लेकिन इसके बाद बैंक खाता खुलवाने, पासपोर्ट बनवाने और आधार कार्ड अपडेट कराने जैसे जरूरी कामों में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस जन-विरोध और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए प्रबंधन को अपना यह फैसला बदलना पड़ा।
गाजियाबाद-नोएडा के लोगों को सबसे बड़ी राहत
देश में एक बड़ी आबादी रेंट एग्रीमेंट या अन्य दस्तावेजों के अभाव में बिजली बिल को ही प्राथमिक एड्रेस प्रूफ मानती है। दिल्ली-एनसीआर के गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरों में किराएदारों और हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है, जिन्हें हर छोटे-बड़े काम के लिए बिजली बिल की जरूरत पड़ती है। नाम-पता वापस दिखने से अब लोगों के सरकारी काम नहीं अटकेंगे।
उपभोक्ताओं को अब क्या करना होगा?
- अगले बिल का इंतजार: बिजली विभाग के नए सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद अगले साइकिल से आने वाले सभी प्रिंटेड और डिजिटल (ई-मेल/व्हाट्सएप) बिलों पर पूरा नाम और पता दोबारा छपकर आने लगेगा।
- ऑनलाइन डाउनलोड की सुविधा: यदि आपको तुरंत पूरा एड्रेस वाला बिल चाहिए, तो आप UPPCL के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर अपनी कंज्यूमर आईडी से लॉगिन करके पूरा विवरण देख और डाउनलोड कर सकते हैं।
नगर निगम हाउस टैक्स में करने जा रहा है भारी कटौती (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद के छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के लिए नगर निगम (GMC) से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। नगर निगम ने शहर के छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत देते हुए उनके हाउस टैक्स (कमर्शियल टैक्स) को 5875 रुपये से घटाकर सीधे 1762 रुपये करने की तैयारी कर ली है। नगर निगम के इस फैसले से गाजियाबाद के हजारों छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी से दुकान में शिफ्ट हुए दुकानदारों और खोखा संचालकों को भारी टैक्स के बोझ से मुक्ति मिलेगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अब तक नगर निगम 100 वर्ग फीट या उससे छोटी दुकानों पर भी एक तय न्यूनतम कमर्शियल दर (Minimum Commercial Slab) के हिसाब से भारी-भरकम टैक्स वसूलता था, जिसे अब तार्किक बनाकर बेहद कम कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक संशोधन के बाद छोटे दुकानदारों को हर साल करीब 4,113 रुपये की सीधी बचत होगी, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों (MSME) की जेब पर आर्थिक दबाव कम होगा। इसके अलावा, टैक्स की दरें कम और स्पष्ट होने से अब दुकानदारों और टैक्स असेसमेंट अधिकारियों के बीच होने वाले विवाद खत्म होंगे और टैक्स चोरी पर भी रोक लगेगी।
किन दुकानदारों को मिलेगा इसका फायदा?
- छोटी दुकानें: बाजार की गलियों या सोसायटियों में चलने वाली छोटी किराना, स्टेशनरी, दर्जी और मोबाइल रिचार्ज जैसी दुकानें (100 वर्ग फीट तक)।
- खोखा और गुमटी संचालक: नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले वेंडिंग जोन और स्वीकृत खोखा संचालक।
- घरेलू उद्योग: जो लोग अपने घरों के एक छोटे हिस्से से छोटा-मोटा व्यापार या कुटीर उद्योग संचालित करते हैं।
कब से लागू होंगी नई दरें?
बता दें कि गाजियाबाद नगर निगम की आगामी बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगते ही इसे पूरे गाजियाबाद क्षेत्र में लागू कर दिया जाएगा। बोर्ड से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद दुकानदारों को मिलने वाले अगले हाउस टैक्स बिल में यह संशोधित दरें (1762 रुपये) जुड़कर आएंगी।
हाईराइज सोसायटियों में बिल्डरों की मनमानी (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद और नोएडा की हाईराइज सोसायटियों से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां बिजली का लोड बढ़ाने के नाम पर बिल्डरों और मेंटेनेंस एजेंसियों द्वारा फ्लैट मालिकों से मनमानी वसूली का खेल चल रहा है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के नियमों के अनुसार जहां 1 किलोवाट (kW) लोड बढ़ाने का सरकारी शुल्क मात्र 500 रुपये है, वहीं बिल्डर इसके बदले निवासियों से 15,000 से लेकर 25,000 रुपये तक वसूल रहे हैं।
विद्युत नियामक आयोग के ‘कॉस्ट डेटा बुक’ के मुताबिक, मल्टीस्टोरी सोसायटियों में प्रति किलोवाट अतिरिक्त लोड का आधिकारिक चार्ज सिर्फ 500 रुपये (प्लस मामूली टैक्स) तय है। इसके विपरीत, बिल्डर निवासियों से 30 से 50 गुना अधिक रकम ऐंठ रहे हैं। जब निवासी इस भारी-भरकम राशि का विरोध करते हैं, तो बिल्डरों का तर्क होता है कि वे यह पैसा बिजली विभाग के लिए नहीं, बल्कि सोसाइटी के आंतरिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे- अतिरिक्त केबल, ट्रांसफार्मर अपग्रेडेशन और डीजी बैकअप पैनल) को मजबूत करने के लिए ले रहे हैं।
मानसून की उमस और भीषण गर्मी के कारण घरों में एसी (AC) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का लोड बढ़ गया है, जिससे बिजली बार-बार ट्रिप होने लगती है। ऐसे में मजबूरीवश फ्लैट मालिकों को भारी-भरकम पैसे देकर बिल्डरों की मनमानी के आगे झुकना पड़ रहा है। राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग रिपब्लिक, इंदिरापुरम और वैशाली जैसे बड़े हब की दर्जनों सोसायटियों में इस बात को लेकर भारी विवाद चल रहा है। कई जगहों पर जहां मेंटेनेंस एओए (AOA) संभाल रही है, वहां भी इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के नाम पर मनमाने नियम थोपे जा रहे हैं।
जनता के पास क्या है कानूनी समाधान?
- CGRF में शिकायत: यदि कोई बिल्डर या एओए (AOA) आधिकारिक 500 रुपये के स्लैब से अधिक की मांग करता है, तो निवासी ‘विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच’ (CGRF) में इसकी लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- मल्टीपॉइंट कनेक्शन का विकल्प: यूपीपीसीएल (UPPCL) के नियमानुसार, यदि सोसाइटी के 51% से अधिक निवासी सहमत हों, तो वे सीधे बिजली विभाग से मल्टीपॉइंट (डायरेक्ट) कनेक्शन ले सकते हैं। इसके बाद बिजली के मामलों में बिल्डर का हस्तक्षेप पूरी तरह खत्म हो जाएगा।












































