Sawan somwar 6 rare vrats: सावन का महीना केवल सोमवार के व्रतों तक ही सीमित नहीं है। सनातन धर्म में श्रावण मास को सबसे पवित्र और सद्यः फलदायी माना गया है। आमतौर पर लोग इस महीने में केवल सोमवार व्रत की महिमा जानते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार, सावन में 6 ऐसे चमत्कारी और दुर्लभ व्रत पड़ते हैं, जो आपकी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं इन व्रतों का धार्मिक महत्व और इनसे मिलने वाले पुण्य फल।
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6 अति-दुर्लभ और महत्वपूर्ण व्रत
सावन के इस पवित्र महीने में सोमवार व्रत के अलावा 6 अति-दुर्लभ और महत्वपूर्ण व्रत पड़ते हैं, जिनका सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। हिंदू पुराणों के अनुसार, श्रावण मास में महादेव के साथ-साथ माता पार्वती, नाग देवता और अन्य देवी-देवताओं की कृपा पाने के लिए ये व्रत बेहद फलदायी माने जाते हैं। ये व्रत इस प्रकार हैं:
Sawan Somwar व्रत
- महत्व: सावन मास के सभी सोमवार को महादेव के निमित्त व्रत रखा जाता है। इस दिन शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाने की विशेष परंपरा है।
- लाभ: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत रखने से मानसिक शांति मिलती है, वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, और कुंडली में कमजोर चंद्रमा मजबूत होता है।
सोलह सोमवार व्रत
- महत्व: यह व्रत सावन मास के पहले सोमवार से शुरू करके लगातार 16 सोमवार तक रखा जाता है। इसमें महादेव और माता पार्वती की पूरी निष्ठा से पूजा की जाती है।
- लाभ: शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत अविवाहित कन्याओं को मनचाहा और योग्य वर दिलाता है। सुहागिन महिलाओं के पति की लंबी उम्र होती है और व्यापार या करियर में आ रही बड़ी से बड़ी रुकावटें दूर होती हैं।
मंगला गौरी व्रत
- महत्व: यह व्रत सावन के प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती के ‘मंगला गौरी’ स्वरूप को समर्पित होता है।
- लाभ: सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने और विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए यह व्रत करती हैं।
प्रदोष व्रत (कृष्ण और शुक्ल पक्ष)
- महत्व: प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय शिवजी की विशेष पूजा की जाती है। सावन में इसका महत्व दोगुना हो जाता है।
- लाभ: शास्त्रों के अनुसार, सावन के प्रदोष व्रत से सभी प्रकार के कष्ट, पाप और कर्मा दोष नष्ट होते हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से दीर्घायु और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
सावन शिवरात्रि
- महत्व: सावन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह महाव्रत आता है। पूरे साल की शिवरात्रियों में सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व है।
- लाभ: इस दिन रात्रि के चारों प्रहर में शिवजी का विशेष अभिषेक करने से गहरी आध्यात्मिक जागृति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं और धन-धान्य की कमी दूर होती है।
नाग पंचमी व्रत
- महत्व: सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग देवताओं की पूजा, अर्घ्य और व्रत का विधान है।
- लाभ: इस दुर्लभ व्रत को रखने से कुंडली का कालसर्प दोष दूर होता है और सर्प भय से मुक्ति मिलती है। साथ ही, राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
































