अमेरिका से लौटे, पहले दिन नहीं जुटी भीड़… 37 दिन बाद सरकार को झुकाने वाले अभिजीत दिपके कौन हैं? Who is Abhijeet Dipke

Nandani | Nedrick News New Delhi Published: 27 जुलाई 2026, 05:03 AM Updated: 27 जुलाई 2026, 05:03 AM
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Who is Abhijeet Dipke: कभी-कभी इतिहास की सबसे बड़ी कहानियां किसी बड़े राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि एक छोटे से विचार और मजबूत इरादे से शुरू होती हैं। 30 वर्षीय अभिजीत दिपके की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अमेरिका के बोस्टन से लौटे इस युवा ने सोशल मीडिया पर शुरू किए गए एक अभियान को कुछ ही हफ्तों में देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में बदल दिया। शुरुआत में जिस आंदोलन को लोगों ने हल्के में लिया, वही आंदोलन 37 दिनों बाद केंद्र सरकार पर इतना दबाव बनाने में सफल रहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

और पढ़ें: जंतर-मंतर से खत्म हुआ सबसे CJP का आंदोलन, सरकार ने मानीं तीन बड़ी मांगें; अब आगे क्या होगा? Dharmendra Pradhan Resignation

बोस्टन से लौटते ही शुरू किया आंदोलन| Who is Abhijeet Dipke

6 जून 2026 को अभिजीत दिपके अमेरिका के बोस्टन से दिल्ली पहुंचे। उनके हाथ में भारतीय संविधान की प्रति और डॉ. बी.आर. अंबेडकर की आत्मकथा थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के तुरंत बाद उन्होंने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “लैंडिंग हो गई… जंतर-मंतर पर मिलने का इंतजार है। फूल लाइएगा, पुलिसकर्मियों को दीजिएगा, यह लड़ाई प्रेम और शांति की है।” इस संदेश से उन्होंने साफ कर दिया था कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और अहिंसक रहेगा।

पहला दिन रहा पूरी तरह फीका

उसी दिन सुबह 10 बजे अभिजीत जंतर-मंतर पहुंचे और कई बार मंच से भाषण दिया। प्रदर्शनकारियों ने “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” के नारे भी लगाए, लेकिन भीड़ उम्मीद से काफी कम रही। दोपहर तक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त करना पड़ा। उस समय कई लोगों ने मान लिया था कि सोशल मीडिया पर चर्चा में रहने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का यह अभियान ज्यादा दिन नहीं टिक पाएगा।

20 जून से आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

पहले प्रयास की असफलता के बावजूद अभिजीत पीछे नहीं हटे। 20 जून को उन्होंने दोबारा जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत की। इस बार उनके साथ मशहूर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आ गए। 28 जून से सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, जिससे आंदोलन को नैतिक मजबूती मिली। लगातार बिगड़ती तबीयत के कारण 19 जुलाई को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उन्होंने अस्पताल से भी 27 दिनों तक अपना अनशन जारी रखा। आखिरकार 23 जुलाई को उन्होंने अनशन समाप्त किया, तब तक सरकार पर दबाव काफी बढ़ चुका था।

‘चलो संसद’ मार्च बना आंदोलन का टर्निंग प्वाइंट

20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च ने पूरे आंदोलन की दिशा बदल दी। मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई और पुलिस के लाठीचार्ज के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। यही वह घटना थी जिसने देशभर के युवाओं को आंदोलन से जोड़ दिया। महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु समेत कई राज्यों से हजारों छात्र दिल्ली पहुंचने लगे। देखते ही देखते जंतर-मंतर छात्रों के बड़े आंदोलन का केंद्र बन गया। ऑनलाइन शुरू हुआ अभियान अब पूरी तरह ऑफलाइन जनआंदोलन में बदल चुका था।

अभिजीत बने आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा

हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कई आयोजक थे, लेकिन अभिजीत दिपके लगातार सक्रिय रहे और धीरे-धीरे आंदोलन का सबसे चर्चित चेहरा बन गए। घनी दाढ़ी, टी-शर्ट और जींस में नजर आने वाले अभिजीत लगातार मंच से शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील करते रहे। उन्होंने खुद भी दो दिन का अनशन किया और सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाए रखने की बात कही।

सरकार को करनी पड़ी बातचीत

आंदोलन के बढ़ते प्रभाव के बीच केंद्र सरकार ने CJP के प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू की। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह ने संगठन के प्रतिनिधि सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ कई दौर की बैठकें कीं। बातचीत के दौरान छात्रों से जुड़े आत्महत्या के मामलों में सहायता, प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक सहमति बनने लगी। हालांकि आंदोलन की सबसे अहम मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही बनी रही।

25 जुलाई को पूरी हुई सबसे बड़ी मांग

आखिरकार 25 जुलाई 2026 को आंदोलन को उसकी सबसे बड़ी सफलता मिली। सरकार के साथ लगातार बातचीत और बढ़ते जनदबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसे आंदोलन की सबसे बड़ी जीत माना गया और हजारों छात्रों ने इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की ऐतिहासिक सफलता बताया।

एक ट्वीट से शुरू हुई पूरी कहानी

इस आंदोलन की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इसकी शुरुआत किसी राजनीतिक दल या संगठन की बैठक से नहीं हुई थी। अभिजीत दिपके ने सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के जवाब में सोशल मीडिया पर सिर्फ छह शब्द लिखे थे—”What if all cockroaches come together?”

यह व्यंग्यात्मक पोस्ट कुछ ही दिनों में करोड़ों युवाओं तक पहुंच गया। इसी से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विचार सामने आया। संगठन के इंस्टाग्राम अकाउंट ने कुछ ही समय में 22 मिलियन फॉलोअर्स हासिल किए और हाल ही में यह संख्या 25 मिलियन के पार पहुंच गई।

साधारण परिवार से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

महाराष्ट्र के औरंगाबाद के एक साधारण दलित परिवार में जन्मे अभिजीत दिपके छात्र जीवन से ही सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में रुचि रखते थे। उन्होंने आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में भी काम किया, जहां उन्होंने मीम, व्यंग्य और डिजिटल कम्युनिकेशन की नई शैली विकसित की। बाद में उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका के बोस्टन चले गए, लेकिन भारतीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता लगातार बनी रही।

Gen-Z राजनीति का नया चेहरा

अभिजीत दिपके की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा नहीं मानी जा रही, बल्कि उन्होंने यह भी दिखाया कि आज की Gen-Z केवल सोशल मीडिया पर ट्रेंड चलाने तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर वही युवा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर अपनी बात भी मनवा सकते हैं। 6 जून को बेहद कम भीड़ के साथ शुरू हुआ यह आंदोलन महज 37 दिनों में देश की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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