Dharmendra Pradhan Resignation: जंतर-मंतर पर पिछले 35 दिनों से चल रहा बड़ा आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। कॉकक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते का ऐलान किया। सीजेपी ने कहा कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है, जिसके बाद “गुड फेथ” यानी सरकार के आश्वासन पर भरोसा जताते हुए आंदोलन वापस लेने का फैसला किया गया है। आंदोलन की सबसे बड़ी मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, जो पूरी हो चुकी है। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में कार्रवाई नहीं करने जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनी है।
तीन दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति| Dharmendra Pradhan Resignation
सरकार और सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच तीन चरणों में लंबी बातचीत हुई। इस दौरान आंदोलन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने बताया कि उनकी तीन प्रमुख मांगें थीं, जिनमें पहली शिक्षा मंत्री का इस्तीफा था। उन्होंने कहा कि यह मांग पूरी हो चुकी है। दूसरी मांग दिल्ली और भाजपा शासित राज्यों में आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर वापस लेने की थी। सीजेपी के अनुसार, सरकार ने इस मांग पर भी सहमति दे दी है और अगले तीन से चार दिनों के भीतर संबंधित एफआईआर की प्रतियां संगठन को उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
तीसरी मांग यह थी कि भविष्य में सीजेपी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी। संगठन का कहना है कि सरकार इस संबंध में मंगलवार तक लिखित ड्राफ्ट साझा करेगी।
NEET पीड़ितों के लिए मुआवजे पर भी बनी बात
बैठक के दौरान सीजेपी ने NEET विवाद से प्रभावित परिवारों के लिए ₹1 करोड़ के मुआवजे की मांग भी उठाई। इस पर आशुतोष रंका ने कहा कि सरकार ने नियमों के अनुरूप पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने पर सहमति जताई है। हालांकि, मुआवजे की अंतिम राशि या प्रक्रिया को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से भी सकारात्मक रुख दिखाया गया और कहा गया कि संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एजुकेशन रिफॉर्म्स पर सौंपा 5 पॉइंट चार्टर
सीजेपी ने केवल आंदोलन समाप्त करने तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार को पांच बिंदुओं वाला एक चार्टर भी सौंपा। इसमें परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने, भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार से जुड़े सुझाव शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार इस पांच सूत्रीय चार्टर का गंभीरता से अध्ययन करेगी और इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार और सीजेपी की टीम करीब चार सप्ताह बाद फिर बैठक करेगी, जिसमें इन सुझावों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
जेपी नड्डा की अपील के बाद खत्म हुआ धरना
बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीजेपी की लगभग सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है और अब आंदोलन जारी रखने की जरूरत नहीं है। इसके बाद सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने औपचारिक रूप से धरना समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मिले ठोस आश्वासनों और सहमति के आधार पर संगठन ने सद्भावना के तहत आंदोलन वापस लेने का फैसला किया है। सौरभ दास ने उम्मीद जताई कि सरकार तय समयसीमा के भीतर सभी सहमत बिंदुओं को लागू करेगी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए गए वादों पर भी जल्द काम शुरू होगा।
अब आगे क्या?
आंदोलन खत्म होने के बाद अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर होगी। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद नए नेतृत्व के सामने शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने, NEET विवाद से जुड़े मामलों का समाधान निकालने और परीक्षा प्रणाली में सुधार लागू करने की चुनौती होगी। वहीं, सीजेपी ने साफ किया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर समझौते के बिंदुओं पर अमल नहीं हुआ तो वह आगे की रणनीति पर विचार करेगा। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के साथ जंतर-मंतर पर 35 दिनों से जारी आंदोलन समाप्त हो गया है और अब शिक्षा सुधारों को लेकर होने वाली अगली बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं।






























