धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रह्लाद जोशी के हाथों में शिक्षा मंत्रालय, जानिए कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री| Dharmendra Pradhan Resignation

Nandani | Nedrick News New Delhi Published: 26 जुलाई 2026, 07:20 PM Updated: 26 जुलाई 2026, 07:20 PM
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Dharmendra Pradhan Resignation: NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों बाद सरकार ने वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई। ऐसे समय में यह फैसला सामने आया है, जब शिक्षा मंत्रालय परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की प्रक्रिया पर काम कर रहा है और छात्रों के बीच भरोसा बहाल करना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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राष्ट्रपति भवन ने जारी की आधिकारिक अधिसूचना| Dharmendra Pradhan Resignation

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सिफारिश पर कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के अलावा शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी। इस तरह अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी प्रह्लाद जोशी के पास होगी।

कौन हैं नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी?

प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे, जबकि उनकी मां मालतीबाई गृहिणी थीं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रेलवे स्कूल और हुबली के न्यू इंग्लिश स्कूल से पूरी की। इसके बाद कर्नाटक यूनिवर्सिटी से संबद्ध के.एस. आर्ट्स कॉलेज, हुबली से बैचलर ऑफ आर्ट्स (बी.ए.) की डिग्री हासिल की।

कॉलेज के दिनों से ही उनकी रुचि सामाजिक कार्यों और जनहित के मुद्दों में रही। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक ओर छोटा औद्योगिक कारोबार संभाला, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़कर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

राजनीतिक सफर में लगातार मिली सफलता

प्रह्लाद जोशी ने 1992 से 1994 के बीच हुबली के ईदगाह मैदान तिरंगा आंदोलन का नेतृत्व किया। इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक में ‘कश्मीर बचाओ आंदोलन’ में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1998 में उन्हें भाजपा का धारवाड़ जिला अध्यक्ष बनाया गया। इसके छह साल बाद 2004 में उन्होंने पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीता।

इसके बाद उन्होंने 2009, 2014, 2019 और 2024 में भी लगातार इसी सीट से जीत दर्ज की और पांच बार लोकसभा सांसद बने। वे 2014 से 2016 तक कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा 2019 से 2024 तक उन्होंने संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। फिलहाल वे केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्री हैं। साथ ही उनके पास नए एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी भी है।

ऊर्जा क्षेत्र में भी निभा रहे हैं अहम भूमिका

नए और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के तौर पर प्रह्लाद जोशी देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय और गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। वहीं, वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में भी उनका मंत्रालय अहम भूमिका निभा रहा है।

ऐसे समय मिली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी

प्रह्लाद जोशी को ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है, जब NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय फिलहाल कई बड़े सुधारों पर काम कर रहा है। इनमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करना और वर्ष 2027 से NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित प्रणाली के जरिए आयोजित करने की तैयारी शामिल है।

NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के अलग-अलग राज्यों में छात्र और कई संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन के 35वें दिन धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि चार दशकों से अधिक समय से वे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए काम करते रहे हैं। उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव होती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश-विरोधी ताकतों को मौजूदा स्थिति का फायदा उठाने से रोकने के लिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया है।

प्रदर्शन खत्म करने का भी हुआ ऐलान

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ घंटों बाद CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अच्छी नीयत के साथ अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला किया है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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