Akal Takht News: पंजाब की भगवंत मान सरकार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने राज्य सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए आरोप लगाया है कि सिख धार्मिक संस्थाओं और अकाल तख्त की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया पर सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय के भीतर कथित ट्रोल सेंटर बंद नहीं किए गए तो निहंग सिख इस मामले में खुद कदम उठा सकते हैं।
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अमृतसर में हुई पंथिक सभा में जत्थेदार का बड़ा बयान| Akal Takht News
यह बयान अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से आयोजित पंथिक सभा के दौरान सामने आया। सभा को संबोधित करते हुए ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने दावा किया कि मोहाली और चंडीगढ़ से कुछ सोशल मीडिया सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, जहां से सिख धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री फैलाई जा रही है।
जत्थेदार ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों का मकसद सिख पंथ की प्रमुख धार्मिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज या ठोस सबूत पेश नहीं किया।
सरकार को दिया 10 दिन का समय
जत्थेदार ने कहा कि इस मुद्दे को पहले भी कई बार पंजाब सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब सरकार के पास सिर्फ 10 दिन का समय है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस अवधि में कथित सोशल मीडिया नेटवर्क को बंद नहीं किया गया और धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ ऑनलाइन टिप्पणियां जारी रहीं तो निहंग सिखों को हस्तक्षेप करने के लिए कहा जाएगा।
पंथिक सभा में पारित हुआ गुरमता
सभा के दौरान सिख धार्मिक संगठनों की ओर से एक ‘गुरमता’ भी पारित किया गया। इसमें सिख पंथ से जुड़े मामलों में अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को दोहराया गया। इसके अलावा पूरे पंजाब में पंथिक सभाएं आयोजित कर समुदाय के लोगों को जागरूक करने और एकजुटता बढ़ाने का फैसला भी लिया गया।
AAP ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने अकाल तख्त के आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने कहा कि आम आदमी पार्टी किसी भी तरह का आईटी सेल या सोशल मीडिया ट्रोल सेंटर संचालित नहीं करती। उन्होंने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखती है और सोशल मीडिया पर धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ किसी भी तरह के अभियान से उसका कोई संबंध नहीं है। आप प्रवक्ता ने इन आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि ऐसे दावों का कोई प्रमाण मौजूद नहीं है।
धार्मिक संस्थाओं और सरकार के बीच बढ़ा विवाद
अकाल तख्त और पंजाब सरकार के बीच यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर लगातार बहस होती रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस अल्टीमेटम पर क्या कदम उठाती है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।
फिलहाल, जत्थेदार की चेतावनी के बाद पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
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