1400 करोड़ का घोटाला और भरत तिवारी की मौत! क्या है पूरा सच? | Bharat Tiwari Encounter Update

👤 Rajni | Nedrick News 📍 Bihar 🕒 Published: 01 जुलाई 2026, 08:20 AM 🔄 Updated: 01 जुलाई 2026, 08:20 AM
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Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले का बिलौटी गांव—एक ऐसा गांव जहां के 70 से अधिक परिवारों ने पिछले 12 दिनों से अपने घरों में न तेल छुआ, न हल्दी और न नमक। यह शोक किसी बुजुर्ग का नहीं, बल्कि भरत तिवारी एनकाउंटर में मारे गए युवाओं के चहेते भरत तिवारी का है। भरत के श्राद्ध महाभोज में जहां 20,000 से ज्यादा लोगों की आंखें नम थीं,

वहीं पूरे गांव ने एकजुट होकर इंसाफ की एक नई मिसाल पेश की है। भरत के लिए उमड़ी इस भारी भीड़ ने सरकार और प्रशासन को जनता की ताकत का अहसास करा दिया है। अब इस मामले में कानूनी लड़ाई भी तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पीड़ित परिवार पटना हाईकोर्ट का रुख कर रहा है। इकलौते बेटे को खो चुके पिता का रो-रोकर बुरा हाल है, जिनका कहना है कि उन्हें अब सिर्फ निष्पक्ष न्यायिक जांच से ही न्याय की उम्मीद है।

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मां का गंभीर आरोप

जहां एक तरफ पुलिस इस पूरी घटना को मुठभेड़ (Encounter) बता रही है, वहीं दूसरी तरफ इकलौते बेटे को खो चुकी मां आशा तिवारी का आरोप है कि यह कोई एनकाउंटर नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा की गई एक सोची-समझी राजनैतिक हत्या है। मां और परिजनों का सनसनीखेज दावा है कि जवइनियां गांव के बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास, गरीबों के घर और मिट्टी भराई के लिए सरकार की तरफ से करीब 1400 करोड़ रुपये का फंड आया था।

परिजनों के मुताबिक, इस भारी-भरकम राशि में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों (SDM और DM) ने मिलकर महाघोटाला किया। भरत लगातार सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर इसी 1400 करोड़ के महाघोटाले के खिलाफ आवाज उठा रहा था और उसके मोबाइल में इसके पुख्ता सबूत थे। मां का सीधा आरोप है कि इसी बड़े भ्रष्टाचार के राज को हमेशा के लिए दफन करने के लिए भरत को रास्ते से हटा दिया गया।

न्याय का इंतजार

Bharat Tiwari की तेरहवीं में भरत के पिता काशीनाथ तिवारी ने रोते हुए कहा कि सोचा था कि बेटे की शादी का बड़ा भोज करुंगा, लेकिन किस्मत ने उन्हें बेटे का श्राद्ध भोज करने पर मजबूर कर दिया। वहीं भरत की मां ने भी रोते हुए कहा कि उन्हें केवल और केवल अपने बेटे के लिए न्याय का इंतजार है।

13वीं के महाभोज में उमड़ा जनसैलाब

बता दें कि भरत की 13वीं में 20 से 25 हजार से ज्यादा लोगों ने भोज किया, आसपास के जिलों और विभिन्न समाजिक संगठनों से जुड़े लोग भारी संख्या में शोक संवेदना व्यक्त करने बिलौटी गांव पहुंचे। Bharat Tiwari की लोकप्रियता और उनके प्रति सम्मान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव के करीब 70 से अधिक परिवारों और सभी जातियों के लोगों ने 11-12 दिनों तक बिना तेल, हल्दी और नमक का सादा खाना खाया। ग्रामीणों को लगा कि उनके अपने घर का ही कोई बेटा चला गया है, जिसके शोक में पूरे गांव ने एकजुटता दिखाई।

सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई करने से इनकार

इसी बीच, पीड़ित परिवार ने इस एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को पहले पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) जाने का निर्देश दिया है। जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश पहले ही दे दिए हैं।

क्या था मामला?

17 जून 2026 को भोजपुर पुलिस और एसटीएफ (STF) के साथ हुए एक कथित एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter) में भरत तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि भरत मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उन्होंने पुलिस पर गोलियां चलाईं, जबकि परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि भरत ने फेसबुक लाइव के दौरान आत्मसमर्पण करने के लिए अपनी पिस्तौल फेंक दी थी और पुलिस ने एक निहत्थे व्यक्ति पर गोली चलाई।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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