Sikhism Moksha: हिंदू धर्म में कहा जाता है कि कोई भी मरने के बाद ही इस संसार को छोड़ कर जा सकता है, शरीर के साथ कोई भी स्वर्ग नहीं जा सकता है.. लेकिन क्या आप ये जानते है कि सिखों के पहले गुरु गुरु नानद देव जी को स्वयं देवता लेने के लिए धरती पर आये थे, और वो अपने शरीर के साथ ही सचखंड गए थे। सिख धर्म में पुनर्जन्म के कॉसेप्ट को भी नही माना जाता है, सिख गुरुओ ने हमेशा ये ही संदेश दिया कि व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर चल कर सदैव सत्कर्म करना चाहिए।
अगला जन्म किसने देखा है इसलिए जो करना है इसी जन्म में किजिये। गुरु की, संगतों की, मानवता की इतना सेवा किजिये कि मृत्यु के बाद आपकी आत्मा परमपिता परमेश्वर के पास चली जायें, ऐसे में सवाल ये है कि सिख धर्म में मोक्ष पाने के लिए क्या कॉसेप्ट है। क्या वाकई में हमारे कर्म ही काफी है या फिर इसके पीछे वाकई में कोई अदृश्य शक्ति है।
सिख धर्म एक ऐसा धर्म है जिसकी स्थापना हुए भले ही ज्यादा समय नहीं हुआ है लेकिन आज के समय में सबसे तेजी से प्रचलित होने वाला धर्म है। जातिगत भेदभाव के खिलाफ, अंधविश्वास पर गहरी चोट करने वाली विचारधारा को फॉलो करने वाला धर्म, जो बाकि के धर्मो का तरह अलग अलग प्रपंचो को नहीं मानता.. यहां केवल गुरु का अनुसरण किया जाता है, जो गुरुओ ने कहा उसे ही सर्वोपरि माना जाता है, दसवे गुरु गोबिंद सिंह ने सचखंड जाने से पहले पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब को अंतिम गुरु भी घोषित किया था, ताकि कोई झूठा आंडबर करके सिखों को बरगलाने की कोशिश न करें। धर्म के मार्ग पर चल कर, गुरु का सच्चा भक्त बन कर ही व्यक्ति सच्चे बादशाह का अनुयायी बन सकता है और मरने का बाद आत्मा परमात्मा में ही वीलिन हो जाती है।
सिख धर्म में मोक्ष के लेकर क्या सोचते है लोग
अब सवाल ये है कि सिख धर्म में मोक्ष पाने के लिए क्या करना चाहिए और उसे लेकर क्या सोचते है लोग। दरअसल सिख धर्म में मोक्ष को मक्ति कहा जाता है, और मुक्ति केवल मरने के बाद स्वर्ग जाने से ही नहीं होती… सिख धर्म में असली मुक्ति का मतलब ईश्वर के साथ आत्मा का पूर्ण मिलन होना है। और ऐसा हो जाता है तो इंसान का बार बार धरती पर आने का आवागमन का चक्र टूट जाता है, यानि की इंसान जीवण मरण के चक्र से निकल जाता है।
सिख मुक्ति पाने के लिए कई मार्ग को अपनाते है जिसमें ईश्वर का सदैव नाम जपना, मानवता के रास्ते पर चल कर संगतो की बिना किसी स्वार्थ भाव से सेवा करना, और बदले में किसी भी तरह की उम्मीद न करना, और सिख गुरुओं के बतायें पांचो विकारों, जिसमें लालच, मोह, अंहकार, काम और क्रोध पर विजय प्राप्त करने वाले को ही असली मुक्ति मिलती है। ऐसा शख्स ईश्वर के हुक्म में जीने लगता है, और जीवन मुक्त कहलाने लगता है। सिख आत्मा का परमात्मा में मिल जाने को ज्योति जोत में समा जाना कहते है।
संसार नश्वर है, जो यहां है उसे एक न एक दिन नष्ट हो जाना है, और ईश्वर की भक्ति की सच है। सच्चे सिख की आत्मा नश्वर संसार के चक्र से मुक्त होकर परमात्मा में समा जाती है तो वो ज्योति जोत में समा जाते है, और फिर उनका दुबारा जन्म नहीं होता.. वो मुक्त हो जाते है, यहीं परम मुक्ति है। गुरुओ ने मोक्ष पाने के लिए सिख संगतो को सबसे आसान रास्ता बताया है, व्यक्ति नाम सिमरन करके, यानि की ईश्वर का नाम सच्चे मन से य़ाद करके, और ईश्वर की सच्ची सेवा करके मोक्ष पा सकते है। सिखों में माना जाता है कि केवल आप कर्म करके ही नहीं मोक्ष के लिए ईश्वरिय कृपा का भी होना जरूरी है।
जो गुरु के बताये रास्ते पर चलेगा, चाहे वो किसी भी धर्म का हो, समुदाय का हो, वो मोक्ष पा सकता है। सिखों में सबसे अच्छी बात ये है कि सिख गुरुओ ने कभी भी सन्यास लेकर या संसारिक जीवन का त्याग करके मोक्ष को पाने के रास्ते पर चलने का समर्थन नहीं किया है। वो मानते है कि जो गृहस्थ जीवन में रहकर भी अपने सभी कर्तव्यों का पालन करता है, और हमेशा सच के रास्ते पर चलकर भी मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। इंसानो के लिए कर्म तो जरूरी है लेकिन ईश्वरी कृपा का होना भी जरूरी है, तभी व्यक्ति सच्ची मुक्ति पा सकता है।






























