Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद से इस समय राजनीति, अपराध और दर्दनाक हादसों से जुड़ी कई बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश में ‘मिशन 2027’ को फतह करने के लिए भाजपा के ‘सीक्रेट परफॉर्मेंस टेस्ट’ ने जिले के मौजूदा विधायकों की नींद उड़ा दी है, तो दूसरी तरफ पुलिस महकमे में दो बड़े मामलों को लेकर भारी हलचल मची हुई है।
नंदग्राम दुष्कर्म मामले में जीवित बच्ची को चार्जशीट में ‘मृत’ दिखाने वाली गाजियाबाद पुलिस की घोर लापरवाही पर जहां सुप्रीम कोर्ट ने सख्त एक्शन लेते हुए महिला SIT का गठन कर दिया है, वहीं लोनी इलाके में पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश के बावजूद नकली नोट गिरोह के 7 मुख्य तस्कर अब भी खाकी को चुनौती देते हुए फरार चल रहे हैं।
इसी बीच मोहन नगर के पास से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहां सड़क पार कर रही मौसी और भांजी की रोडवेज बस की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद गुस्साए लोगों ने मौके पर जमकर हंगामा किया। तो चलिए इस लेख के जरिए जिले की इन सभी बड़ी और संवेदनशील खबरों को विस्तार से जानते हैं।
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बेटी की शादी के लिए पाई-पाई जोड़कर जुटाए 5 लाख, आग में जलकर खाक
एक झटके में उजड़ गए बेटी की शादी के सपने! कल रात लगी अचानक आग ने एक हंसते-खेलते परिवार की जीवनभर की कमाई को राख के ढेर में बदल दिया। इस भीषण अग्निकांड में बेटी की शादी के लिए पाई-पाई जोड़कर रखे गए 5.5 लाख नकद, कीमती आभूषण और घर का सारा जरूरी सामान जलकर खाक हो गया। सिर छुपाने की छत छिनने के साथ ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद के लोनी के संगम विहार कॉलोनी में बीती रात भीषण आग लग गई। पीड़ित परिवार ने घर की लड़की की शादी के लिए पाई-पाई जोड़कर 5.5 लाख (साढ़े पांच लाख रुपए) कैश रखे हुए थे, जो पूरी तरह जलकर राख हो गए। शादी के लिए तैयार करवाए गए सोने-चांदी के गहने और अन्य कीमती सामान भी आग की भेंट चढ़ गए।
शॉर्ट सर्किट से भड़की आग इतनी भीषण थी कि इसने मकान की ऊपरी मंजिल को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। ऊपरी मंजिल पर रखा घरेलू और जरूरी सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गया। शुरुआती जांच और रिपोर्ट के मुताबिक, मकान में आग शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) होने की वजह से लगी थी।
स्थानीय पटवारी/लेखपाल द्वारा नुकसान का पंचनामा तैयार करवाया जाएगा, ताकि पीड़ित परिवार को सरकारी नियमों के तहत आपदा राहत कोष से मुआवजा मिल सके। जो नोट पूरी तरह राख नहीं हुए हैं बल्कि आधे-अधूरे जले हैं, उन्हें RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) की गाइडलाइंस के अनुसार नजदीकी मुख्य बैंक शाखा के माध्यम से बदलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
क्योकि यह मामला उत्तर प्रदेश (गाजियाबाद) का है, इसलिए पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष और उत्तर प्रदेश कन्या विवाह योजना के अंतर्गत गरीब व जरूरतमंद परिवारों के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता (80,000 से 1,000,000 तक) के लिए भी स्थानीय प्रशासन के माध्यम से आवेदन कर सकता है।
CM योगी और दिल्ली आलाकमान के सर्वे से उड़ी विधायकों की नींद (Top 5 Ghaziabad News)
उत्तर प्रदेश में ‘मिशन 2027’ के लिए भाजपा के अंदरूनी गलियारों में भारी हलचल है। ‘सत्ता विरोधी लहर’ और विपक्ष के जातीय समीकरणों को काटने के लिए पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों के खिलाफ एक कड़ा परफॉर्मेंस टेस्ट शुरू किया है। CM योगी और दिल्ली आलाकमान के गुप्त सर्वे ने इस बार गाजियाबाद जिले के भी कई मौजूदा विधायकों की नींद उड़ा दी है।
खराब रिपोर्ट कार्ड के चलते दिल्ली से सटे इस हाई-प्रोफाइल जिले में भी कुछ सिटिंग विधायकों की विदाई तय मानी जा रही है। परफॉर्मेंस टेस्ट में फेल होने वाले नेताओं की जगह संगठन के पदाधिकारियों, पूर्व विधायकों और नए युवा चेहरों को उतारने की तैयारी है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि गाजियाबाद में भाजपा के इस ‘क्लीनिंग ऑपरेशन’ के पीछे क्या रणनीति है और मुरादनगर, लोनी व मोदीनगर जैसी सीटों पर टिकट की रेस में कौन से नए चेहरे सबसे आगे चल रहे हैं।
विधायकों की विदाई तय
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाजियाबाद जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर ‘मिशन 2027’ को लेकर घमासान सबसे ज्यादा तेज है। यहां पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) में भाजपा ने विपक्ष का पूरी तरह सूपड़ा साफ किया था, लेकिन इस बार आलाकमान के अंदरूनी सर्वे की वजह से मौजूदा विधायकों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। सीट बदलने या टिकट कटने के डर के बीच पूर्व विधायकों से लेकर महानगर अध्यक्ष तक रेस में कूद पड़े हैं।
यदि जिले की हॉट सीटों की बात करें, तो मुरादनगर विधानसभा सीट से फिलहाल अजीतपाल त्यागी भाजपा के विधायक हैं। इस क्षेत्र में इस समय त्यागी समाज और युवा कार्यकर्ताओं के बीच टिकट को लेकर खींचतान मची हुई है। यहां पूर्व प्रत्याशी रह चुके ब्रजपाल तेवतिया इस बार टिकट के लिए सबसे मजबूत दावेदारी ठोक रहे हैं, तो वहीं भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संदीप त्यागी भी युवा चेहरे के रूप में रेस में पूरी तरह सक्रिय हैं।
दूसरी तरफ लोनी विधानसभा सीट का समीकरण भी काफी दिलचस्प है, जहां से फायरब्रांड नेता नंद किशोर गुर्जर मौजूदा विधायक हैं। अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले गुर्जर के खिलाफ इस बार स्थानीय स्तर पर लॉबिंग बहुत तेज है। यहां से पूर्व ब्लॉक प्रमुख अनिल कसाना मजबूती से पैरवी कर रहे हैं,
जबकि भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश मंत्री योगेंद्र मावी का नाम भी टिकट की चर्चाओं में बहुत प्रमुखता से उभर कर सामने आ रहा है। वहीं मोदीनगर सीट पर वर्तमान में डॉ. मंजू शिवाच भाजपा की विधायक हैं, लेकिन पूर्व विधायक सुदेश शर्मा क्षेत्र में लगातार जनता के बीच बने हुए हैं और वे इस बार सिटिंग विधायक डॉ. मंजू शिवाच के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं।
इन ग्रामीण और कस्बाई सीटों के अलावा गाजियाबाद शहर और साहिबाबाद जैसी शहरी सीटों पर भी महानगर अध्यक्ष, क्षेत्रीय पदाधिकारियों और वैश्य व पंजाबी समाज के रसूखदार नेताओं ने अपनी-अपनी लॉबिंग शुरू कर दी है। चूंकि साहिबाबाद देश की सबसे बड़ी विधानसभा सीटों में से एक है, इसलिए पार्टी आलाकमान कोई रिस्क नहीं लेना चाहता और यहां बाहरी खुफिया एजेंसियों का सर्वे बहुत ही बारीक और जमीनी स्तर पर चल रहा है।
मासूम के साथ हैवानियत मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही
जांच में जल्दबाजी और संवेदनहीनता किस कदर न्याय प्रक्रिया का गला घोंट सकती है, इसका जीता-जागता उदाहरण गाजियाबाद में देखने को मिला है। एक मासूम बच्ची के साथ हुई हैवानियत के मामले में गाजियाबाद पुलिस की एक ऐसी बड़ी लापरवाही सामने आई है,
जिसने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में अस्पताल पहुंचने से पहले ही जीवित बच्ची को कागजों पर ‘मृत’ घोषित कर दिया था। इस अमानवीय लापरवाही का संज्ञान लेते हुए अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने गाजियाबाद पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। आइए जानते हैं कि आखिर पुलिस की इस बड़ी चूक के पीछे की पूरी कहानी क्या है।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद के नंदग्राम थाना क्षेत्र का है, जहां बीते 16 मार्च को एक 4 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस की संवेदनहीनता और घोर लापरवाही तब उजागर हुई, जब पुलिस द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट की थ्योरी पूरी तरह झूठी साबित हो गई।
गाजियाबाद पुलिस ने अपनी चार्जशीट में साफ तौर पर लिखा था कि अस्पताल ले जाने से पहले ही बच्ची की मौत हो चुकी थी। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी। सुप्रीम कोर्ट में सेंट जोसेफ अस्पताल द्वारा दाखिल किए गए आधिकारिक शपथ पत्र (Affidavit) ने पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दीं, जिसमें अस्पताल ने स्वीकार किया कि जब बच्ची को इलाज के लिए लाया गया था, तब उसकी सांसें चल रही थीं और वह जीवित थी।
पुलिस की इस अमानवीय चूक और जांच के ढर्रे पर देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां पुलिस को अस्पतालों की भूमिका की जांच करनी चाहिए थी, वहीं उन्होंने वहां मौजूद किसी भी कर्मचारी या चश्मदीद का बयान तक दर्ज नहीं किया। इसके अलावा, पीड़ित परिवार ने पुलिस पर शुरुआत में मामले को दबाने, एफआईआर (FIR) दर्ज करने में देरी करने और पॉक्सो (POCSO) जैसी गंभीर धाराएं न लगाने के भी संगीन आरोप लगाए हैं।
इतना ही नहीं, पीड़ित पिता का कहना है कि जब बच्ची गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान थी, तब क्षेत्र के दो बड़े निजी अस्पतालों ने उसे ‘गोल्डन आवर’ में आपातकालीन इलाज देने से साफ मना कर दिया था, जिसके चलते समय पर इलाज न मिलने से अंततः उसकी जान चली गई।
इस पूरे घटनाक्रम में खाकी और स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस की जांच पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। अदालत ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी (DGP) को तत्काल प्रभाव से तीन महिला पुलिस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है,
जिसकी कमान आईजी या कमिश्नर स्तर की बाहरी महिला अधिकारी को सौंपी गई है। यह नवनियुक्त एसआईटी अब न सिर्फ पुलिस की इस बड़ी लापरवाही और सबूतों के साथ हुई छेड़छाड़ की जांच करेगी, बल्कि इलाज से इनकार करने वाले निजी अस्पतालों की आपराधिक जवाबदेही भी तय करेगी
नकली नोटों की सप्लाई का नया हेडक्वार्टर बना गाजियाबाद
क्या गाजियाबाद का लोनी इलाका दिल्ली-एनसीआर में नकली नोटों की सप्लाई का नया हेडक्वार्टर बनता जा रहा है? यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में भारी मात्रा में जाली नोटों की बरामदगी के बाद भी पुलिस इस नेक्सस की रीढ़ तोड़ने में नाकाम रही है।
पुलिस की फाइलों में दर्ज गिरोह के 7 ऐसे शातिर चेहरे हैं जो हर बार खाकी को चकमा देकर फरार हो जाते हैं। आइए इस रिपोर्ट में जानते हैं कि पश्चिम बंगाल और असम से जुड़े इस काले कारोबार का लोनी कनेक्शन क्या है और पुलिस इन 7 मोस्ट वांटेड को क्यों नहीं ढूंढ पा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाजियाबाद का लोनी इलाका इस समय नकली नोटों की तस्करी करने वाले गिरोहों का मुख्य गढ़ बन चुका है। लोनी थाना पुलिस पिछले तीन महीनों के भीतर अलग-अलग कार्यवाहियों में नकली नोट छापने और बाजार में खपाने वाले 15 शातिर तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद दो अलग-अलग सक्रिय गिरोहों के 7 मुख्य सरगना अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। फरार चल रहे इन आरोपियों में से कई तस्करों पर पहले से ही गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज हैं, जिसके चलते स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और खुफिया तंत्र पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये तस्कर पश्चिम बंगाल और असम के रास्ते देश की सीमा में आने वाले जाली नोटों की खेप को लोनी लाते थे। इसके बाद इन जाली नोटों को लोनी, दिल्ली और एनसीआर (NCR) के व्यस्त बाजारों में बेहद शातिराना तरीके से खपाया जाता था।
फरार चल रहे गिरोह के इन सात मुख्य सदस्यों को दबोचने के लिए लोनी पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं, जो संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरे नेटवर्क के बड़े आकाओं का पर्दाफाश हो सकेगा और यह साफ होगा कि इस रैकेट के तार किन-किन राज्यों से जुड़े हैं।
बेकाबू रोडवेज बस ने मौसी और भांजी को रौंदा
गाजियाबाद के मोहन नगर के पास रफ्तार के जुनून ने दो हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। जीटी रोड पार करते समय एक बेकाबू रोडवेज बस ने मौसी और भांजी को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अस्पताल में उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने बस में जमकर तोड़फोड़ की और चक्काजाम करने की कोशिश की। आखिर कैसे हुआ यह भयानक हादसा और पुलिस क्या कार्रवाई कर रही है? आइए जानते हैं क्या है इस पूरे हादसे की जमीनी हकीकत।
जीटी रोड कर रही थीं पार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भीषण हादसा साहिबाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले व्यस्त मोहननगर चौराहे के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौसी और भांजी सड़क के एक किनारे से दूसरी तरफ बस पकड़ने के उद्देश्य से जीटी रोड पार कर रही थीं। इसी दौरान बेहद तेज रफ्तार और अनियंत्रित गति से आ रही एक रोडवेज बस ने दोनों को जोरदार टक्कर मार दी,
जिससे वे सड़क पर गिर गईं और बस के पहियों की चपेट में आ गईं। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और लहूलुहान हालत में दोनों को पास के नरेंद्र मोहन अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उपचार के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस दर्दनाक हादसे के बाद घटना स्थल पर मौजूद लोगों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने आरोपी बस चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। उग्र भीड़ ने दुर्घटना को अंजाम देने वाली रोडवेज बस में जमकर तोड़फोड़ भी की।
इस बीच, आरोपी चालक स्थिति को भांपते हुए मौके पर ही अपनी बस छोड़कर फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस ने उग्र लोगों को शांत कराकर यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से बहाल कराया और रोडवेज बस को अपने कब्जे में ले लिया।
पुलिस प्रशासन ने दोनों मृतकों के शवों का पंचनामा भरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपी चालक की पहचान के लिए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।






























