Shamli Conversion Case: उत्तर प्रदेश के शामली में कारोबारी परिवार से जुड़े आयुष मलिक के धर्म परिवर्तन का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मुद्दे को लेकर जहां अलग-अलग तरह की बातें सामने आ रही हैं, वहीं अब खुद आयुष मलिक ने सामने आकर अपनी बात रखी है। उन्होंने एक विशेष बातचीत में दावा किया कि उन्होंने किसी दबाव, लालच या किसी मौलवी के कहने पर धर्म परिवर्तन नहीं किया, बल्कि यह उनका निजी और सोच-समझकर लिया गया फैसला था।
आयुष मलिक, जिन्होंने इस्लाम अपनाने के बाद अपना नाम मोहम्मद अली रखा है, का कहना है कि यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि कई वर्षों की समझ, अध्ययन और व्यक्तिगत अनुभवों का परिणाम है।
दस्तावेजों में अब भी आयुष मलिक| Shamli Conversion Case
आजतक से बातचीत के दौरान आयुष ने स्पष्ट किया कि सरकारी दस्तावेजों में उनका नाम अभी भी आयुष मलिक ही दर्ज है। हालांकि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मोहम्मद अली नाम अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम की ओर उनका झुकाव धीरे-धीरे बढ़ा और इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लगा। उनके मुताबिक, किसी भी धर्म को अपनाना एक आंतरिक निर्णय होता है, जिसे कोई दूसरा व्यक्ति मजबूर करके नहीं करा सकता।
फिजियोथेरेपिस्ट से मुलाकात के बाद बदला नजरिया
आयुष ने बताया कि साल 2018 में उन्हें कंधे में चोट लगी थी। इलाज के दौरान उनकी मुलाकात फिजियोथेरेपिस्ट चांदनी कुरैशी से हुई। इसी दौरान दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और बाद में उनकी दोस्ती गहरी होती चली गई। आयुष के अनुसार, उन्हें उसी समय पता चला कि चांदनी मुस्लिम समुदाय से संबंध रखती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि करीब चार साल पहले दोनों का निकाह हो चुका है।
हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका धर्म परिवर्तन किसी रिश्ते या शादी की वजह से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास और अध्ययन के कारण हुआ।
यूट्यूब और इस्लामिक शिक्षाओं से हुए प्रभावित
आयुष ने बताया कि इस्लाम को समझने में इंटरनेट और यूट्यूब की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि वह दुनिया भर के इस्लामिक विद्वानों और धार्मिक वक्ताओं को सुनते थे। उन्होंने विशेष रूप से पाकिस्तान के प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान डॉक्टर इसरार अहमद का जिक्र किया। आयुष का कहना है कि उन्होंने कुरान और हदीस की कई बातों को विस्तार से समझाया, जिससे उन्हें इस्लाम को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि वह पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं और जीवन से प्रभावित हुए और धीरे-धीरे इस्लाम की कई बातों को अपने जीवन में अपनाने लगे।
‘धर्म परिवर्तन अंदर से होता है’
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका धर्म परिवर्तन किसी मौलवी ने कराया था, तो उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया। आयुष ने कहा कि धर्म परिवर्तन कोई ऐसी प्रक्रिया नहीं है जिसे कोई व्यक्ति बाहर से थोप दे। उनके मुताबिक, यह एक मानसिक और आध्यात्मिक बदलाव होता है जो व्यक्ति के भीतर पैदा होता है। उन्होंने कहा कि किसी धर्म को समझने और अपनाने के लिए व्यक्ति को खुद सीखना और समझना पड़ता है।
संपत्ति के आरोपों पर भी दिया जवाब
धर्म परिवर्तन को लेकर उठे विवादों के बीच कुछ आरोप यह भी लगाए गए कि चांदनी के परिवार की नजर उनकी संपत्ति पर है। इस सवाल पर आयुष ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके यहां पहले भी कई मुस्लिम कर्मचारी काम करते रहे हैं और आज भी काम कर रहे हैं। लेकिन चांदनी का भाई कभी उनके व्यवसाय से नहीं जुड़ा रहा।
आयुष ने कहा कि संपत्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें अब किसी प्रकार की संपत्ति या धन-दौलत की चिंता नहीं है।
एक घटना के बाद बढ़ी धार्मिक रुचि
आयुष ने बातचीत में एक व्यक्तिगत अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक बार उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया था और उनके हाथ कांपने लगे थे। उसी दौरान उन्होंने यूट्यूब पर एक धार्मिक वीडियो देखा, जिसमें एक विशेष दुआ पढ़ने की सलाह दी गई थी। उनका दावा है कि दुआ पढ़ने के बाद उन्हें मानसिक राहत महसूस हुई और उसी के बाद उनकी रुचि धार्मिक विषयों में और बढ़ गई।
दोबारा धर्म बदलने का दबाव होने का दावा
आयुष ने यह भी कहा कि वर्तमान में उन पर फिर से हिंदू धर्म अपनाने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन इतना जरूर कहा कि उनका फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत है और उन्होंने इसे अपनी इच्छा से लिया है। फिलहाल शामली का यह मामला सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं आयुष मलिक का कहना है कि उनके धर्म परिवर्तन को किसी साजिश या दबाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे उनके निजी निर्णय के रूप में समझा जाना चाहिए।





























