Kuno Cheetah Project: मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी चीतों के भोजन पर हुए खर्च को लेकर विधानसभा में अहम जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिखित जवाब में बताया कि प्रोजेक्ट चीता के तहत पिछले तीन वर्षों में चीतों के भोजन पर 1 करोड़ 89 लाख 92 हजार 826 रुपये खर्च किए गए। इस दौरान उनके लिए 54,411.36 किलोग्राम (करीब 54.41 टन) भैंस और बकरों का मीट खरीदा गया।
यह जानकारी कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी गई। विधायक ने सरकार से जानना चाहा था कि प्रोजेक्ट चीता शुरू होने के बाद मीट सप्लाई के लिए कितने टेंडर जारी किए गए, किन-किन फर्मों ने भाग लिया, किसे ठेका मिला और क्या बार-बार एक ही ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया।
सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को बताया पूरी तरह पारदर्शी| Kuno Cheetah Project
सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि मीट की खरीद हर साल मध्यप्रदेश ई-टेंडर पोर्टल के माध्यम से तय नियमों के अनुसार की जाती है। सभी निविदाएं ऑनलाइन आमंत्रित होती हैं और पात्र सप्लायर का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और किसी भी ठेकेदार को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाने का सवाल ही नहीं उठता। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर वर्ष नई निविदाएं जारी की जाती हैं और नियमों का पालन करते हुए ही सप्लायर का चयन किया जाता है।
घोटाले के आरोपों पर सरकार का जवाब
कूनो नेशनल पार्क में चीतों के भोजन को लेकर हाल के दिनों में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए थे। कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने दावा किया था कि चीतों के भोजन के नाम पर घोटाला हुआ है और कम वजन वाले मीट को ज्यादा वजन दिखाकर भुगतान किया गया। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए जांच की मांग की थी।
हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब में कहा गया कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों के भोजन की खरीद में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या घोटाले की पुष्टि नहीं हुई है।
प्रोजेक्ट चीता पर बनी हुई है नजर
कूनो नेशनल पार्क देश का पहला ऐसा संरक्षित क्षेत्र है, जहां अफ्रीका से लाए गए चीतों को बसाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम किया जा रहा है। ऐसे में उनके संरक्षण, स्वास्थ्य और भोजन से जुड़े खर्चों पर लगातार नजर रखी जा रही है। विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक ओर विपक्ष खर्च और खरीद प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सरकार का दावा है कि पूरी व्यवस्था नियमों के तहत संचालित हो रही है और सभी खरीद प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से पूरी की गई हैं।
































