Newborn care mistakes: न्यू पेरेंट्स के लिए नवजात की देखभाल किसी बड़े जिम्मेदारी से कम नहीं होती। हर छोटी बात का ध्यान रखा जाता है, लेकिन कई बार अनजाने में हुई एक छोटी-सी गलती भी बच्चे की सेहत पर भारी पड़ जाती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें सिर्फ 19 दिन के एक नवजात को गंभीर संक्रमण हो गया, जो धीरे-धीरे बढ़कर निमोनिया में बदल गया।
हालात इतने बिगड़ गए कि बच्चे को 10 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा और करीब 20 दिनों तक उसे NICU (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में भर्ती रहना पड़ा।
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डॉक्टरों ने बताई असली वजह | Newborn care mistakes
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे का इलाज कर रहे पीडियाट्रिशियन डॉक्टर पवन मंदाविया के मुताबिक, इस पूरे मामले की सबसे बड़ी वजह नवजात से मिलने के लिए आने वाले रिश्तेदारों और लोगों पर रोक न लगाना रही। डॉक्टर ने बताया कि डिस्चार्ज होते वक्त वह इस बच्चे को दिखाते हुए समझा रहे थे कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही इतनी बड़ी स्थिति में बदल गई।
डॉक्टर का कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद कई लोग उसे देखने आते हैं, गोद में लेते हैं और प्यार जताते हैं, लेकिन इसी दौरान अगर किसी को खांसी, जुकाम या हल्का बुखार भी हो, तो वह आसानी से नवजात को संक्रमित कर सकता है।
कमजोर इम्युनिटी बनती है सबसे बड़ा खतरा
डॉक्टर पवन मंदाविया ने बताया कि नवजात शिशु की इम्युनिटी बहुत कमजोर होती है। ऐसे में वह वायरल और बैक्टीरियल दोनों तरह के संक्रमणों के लिए बेहद संवेदनशील होता है। यही कारण है कि थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।
उन्होंने साफ कहा कि डिलीवरी के बाद शुरुआती दो महीने सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इस दौरान घर में लोगों की आवाजाही को सीमित रखना बेहद जरूरी है।
कैसे बिगड़ी बच्चे की हालत
जानकारी के मुताबिक, जन्म के बाद बच्चे से मिलने के लिए कई रिश्तेदार और परिचित आए थे। कई लोगों ने उसे गोद में लिया और पास से संपर्क किया। इसी दौरान बच्चा संक्रमण की चपेट में आ गया। शुरुआत में यह सामान्य संक्रमण लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह बढ़कर निमोनिया में बदल गया। हालत बिगड़ने पर बच्चे को ICU में शिफ्ट करना पड़ा और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। लगातार इलाज और डॉक्टरों की मेहनत के बाद बच्चे की हालत में सुधार आया और अब उसे डिस्चार्ज किया जा रहा है। यह राहत की बात जरूर है, लेकिन यह मामला एक बड़ी सीख भी दे गया है।
डॉक्टर की अहम सलाह – शुरुआती दो महीने बेहद जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि जन्म के बाद शुरुआती 60 दिन बच्चे के लिए सबसे संवेदनशील समय होता है। इस दौरान माता-पिता को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:
- घर में आने वाले लोगों की संख्या सीमित रखें
- किसी भी बीमार व्यक्ति को बच्चे से दूर रखें
- बिना हाथ धोए या सैनिटाइज किए बच्चे को न छुएं
- बच्चे को किस करने से बचें, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है
डॉक्टर ने यह भी चेतावनी दी कि कई बार लोग प्यार जताने के लिए बच्चे को चूम लेते हैं, लेकिन यह आदत नवजात के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
रिश्तेदारों की जिम्मेदारी भी जरूरी
यह सिर्फ माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार और रिश्तेदारों को भी समझना चाहिए कि नवजात की सुरक्षा सबसे पहले है। अगर किसी को हल्की सर्दी-जुकाम या बुखार भी है, तो उसे बच्चे से मिलने से बचना चाहिए।
एक सीख देने वाला मामला
यह पूरा मामला भले ही अब नियंत्रण में है और बच्चा ठीक हो रहा है, लेकिन यह एक बड़ी चेतावनी की तरह है। नवजात की सुरक्षा के लिए सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज है। थोड़ी सी लापरवाही बड़ी परेशानी में बदल सकती है, जैसा इस केस में देखने को मिला।
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