NEET paper leak controversy: NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन के खत्म होने के बाद अब विवाद एक नए दौर में पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें आंदोलन में शामिल रहे कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट, धमकी और सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाने जैसी घटनाएं दिखाई दे रही हैं। इन वीडियो के वायरल होने के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं।
यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। आंदोलन का उद्देश्य पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना था। हालांकि आंदोलन समाप्त होने के बाद अब प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने के आरोप लग रहे हैं।
मारपीट के कई वीडियो आए सामने| NEET paper leak controversy
इससे पहले राइटविंग कार्यकर्ता सत्यम पंडित का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह दो प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करते दिखाई दिए थे। अब ऐसे कई और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शनकारियों के साथ हाथापाई, धमकी और माफी मांगने का दबाव बनाए जाने की घटनाएं नजर आ रही हैं।
आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले छात्रों को अब इसकी “सजा” दी जा रही है। उनका आरोप है कि इन घटनाओं का मकसद प्रदर्शनकारियों को डराना और भविष्य में ऐसे आंदोलनों से लोगों को दूर रखना है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी समर्थक कई सोशल मीडिया हैंडल इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की जा रही है।
वायरल वीडियो को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग दलील
आंदोलन के दौरान कुछ ऐसे वीडियो भी वायरल हुए थे, जिनमें कुछ प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और सुरक्षा बलों के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां करते दिखाई दिए थे। सरकार का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि इन घटनाओं के बाद आंदोलन अपनी मर्यादा से भटक गया था। हालांकि CJP और उसके समर्थकों का कहना है कि कुछ लोगों की हरकतों के आधार पर पूरे आंदोलन को गलत नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना है कि ये वीडियो पूरे आंदोलन का प्रतिनिधित्व नहीं करते और कुछ असामाजिक तत्वों की वजह से सभी प्रदर्शनकारियों पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर पहचान उजागर करने की मुहिम तेज
आंदोलन खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ बीजेपी समर्थक अकाउंट्स ने प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं की पहचान उजागर करने की मुहिम शुरू कर दी। कई पोस्ट में प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई। कुछ पोस्ट में लोगों से यह अपील भी की गई कि इन छात्रों की पहचान उनके पड़ोसियों, कॉलेज के साथियों और सहकर्मियों तक पहुंचाई जाए।
इस अभियान को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। आंदोलन के समर्थकों का कहना है कि यह लोगों को सार्वजनिक रूप से निशाना बनाने और डर का माहौल बनाने की कोशिश है।
कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में खुद को पत्रकार बताने वाला एक व्यक्ति कनॉट प्लेस में बैठे एक प्रदर्शनकारी से सवाल पूछते हुए उसका गला पकड़ लेता है। वीडियो में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर प्रदर्शनकारी पर माफी मांगने का दबाव बनाता दिखाई देता है। प्रदर्शनकारी बार-बार उसका हाथ हटाने की गुहार लगाता है, लेकिन उसे धमकियां दी जाती हैं और आखिर में वह माफी मांगता नजर आता है।
एक अन्य वायरल वीडियो में कनॉट प्लेस में एक युवक का पीछा कर उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की जाती है। वीडियो में कई लोग उसे घूंसे और लात मारते दिखाई देते हैं, जबकि वह खुद को बचाने की कोशिश करता है। एक और वीडियो में भीड़ एक युवक को घेरकर पीटती नजर आती है। बाद में वही युवक सिर पर चोट के साथ एक ऑटो में बैठा दिखाई देता है। इसी वीडियो में एक महिला प्रदर्शनकारी को भी भीड़ घेरकर उससे सवाल पूछती और मोबाइल फोन से उसकी रिकॉर्डिंग करती नजर आती है।
विपक्ष और संगठनों ने उठाए सवाल
इन घटनाओं को लेकर इंडियन यूथ कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने आरोप लगाया कि पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग करने वाले छात्रों को अब धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने उन लोगों से आगे आने की अपील की है जिन्हें किसी भी तरह की धमकी मिली हो, हमला हुआ हो या सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया हो।
RSS विचारक की टिप्पणी पर भी विवाद
इसी बीच RSS विचारक टी. जी. मोहनदास की एक टिप्पणी भी विवादों में आ गई। कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि अगर जिम्मेदारी उनके हाथ में होती तो वह प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दे देते। इस बयान के सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया। बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने सफाई देते हुए कहा कि यह टी. जी. मोहनदास की निजी राय है और संगठन इस टिप्पणी से सहमत नहीं है।
































