बेअदबी पर पंजाब का ज़ीरो टॉलरेंस: अब होगी उम्रकैद तक की सजा और लगेगा 25 लाख का जुर्माना! Punjab sacrilege law 2026

Nandani | Nedrick News Punjab Published: 21 Apr 2026, 04:13 PM | Updated: 21 Apr 2026, 04:15 PM

Punjab sacrilege law 2026: पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामलों को लेकर अब सरकार ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। विधानसभा के विशेष सत्र में पास हुआ बिल राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब कानून बन चुका है और इसे आधिकारिक तौर पर लागू भी कर दिया गया है। इस नए एक्ट के लागू होते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

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कानून में सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान | Punjab sacrilege law 2026

सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून में बेअदबी के मामलों को लेकर काफी कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 10 साल की सजा दी जाएगी, जो बढ़कर उम्रकैद तक जा सकती है। सिर्फ सजा ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी कड़ा प्रावधान रखा गया है। दोषी पर न्यूनतम 5 लाख रुपये और अधिकतम 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा जांच प्रक्रिया को भी मजबूत बनाया गया है। अब ऐसे मामलों की जांच DSP रैंक से नीचे का कोई अधिकारी नहीं करेगा। वहीं, केस सीधे सेशन कोर्ट में चलाया जाएगा, ताकि सुनवाई में देरी न हो और मामलों का जल्दी निपटारा हो सके।

AAP का विपक्ष पर हमला

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने इस कानून को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि यह कानून सिख समुदाय की भावनाओं की रक्षा के लिए लाया गया है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर गंभीर नहीं दिख रहा।

AAP के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधते हुए कहा कि जब यह बिल विधानसभा में पेश किया गया था, तब उनकी विधायक गनिव कौर मजीठिया सदन में मौजूद नहीं थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कानून बनने के बाद भी अकाली दल की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे उनकी मंशा पर सवाल उठते हैं।

कांग्रेस और बीजेपी भी घेरे में

AAP ने सिर्फ अकाली दल ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को भी निशाने पर लिया। पार्टी का कहना है कि दोनों दल पहले दावा कर रहे थे कि इस बिल को राज्यपाल से मंजूरी नहीं मिलेगी, लेकिन अब यह कानून बन चुका है, जिससे उनकी बातें गलत साबित हो गई हैं।

कांग्रेस का पलटवार

वहीं, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सवाल उठाया कि मौजूदा सरकार 2015 के बेअदबी मामलों में अब तक न्याय दिलाने में नाकाम रही है। उनका कहना है कि सिर्फ नया कानून बना देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पुराने मामलों में भी न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है।

पुराना मुद्दा, नई सियासत

दरअसल, बेअदबी का मुद्दा पंजाब की राजनीति में लंबे समय से बेहद संवेदनशील रहा है। 2015 के बेअदबी मामलों ने उस समय बड़ी राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी और इसी मुद्दे पर बढ़ते दबाव के कारण पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पद छोड़ना पड़ा था।

चुनाव से पहले बड़ा दांव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए यह कानून सत्तारूढ़ दल के लिए अहम साबित हो सकता है। खास तौर पर सिख पंथक वोट बैंक को साधने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है, जो पहले अकाली दल का मजबूत आधार माना जाता था।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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