Lenskart Dress Code Row: आईवियर ब्रांड Lenskart एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह उसके प्रोडक्ट्स नहीं बल्कि कर्मचारियों के लिए बताया गया एक कथित ड्रेस कोड दस्तावेज है। सोशल मीडिया पर यह डॉक्यूमेंट वायरल होने के बाद कंपनी पर कई तरह के सवाल उठने लगे, जिसके बाद अब लेंसकार्ट के संस्थापक Piyush Bansal ने सामने आकर सफाई दी है।
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क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर एक आंतरिक दस्तावेज शेयर किया गया, जिसे कंपनी का “स्टाइल गाइड” बताया गया। इसमें ऑफिस में पहनावे को लेकर कुछ नियम लिखे होने का दावा किया गया था। विवाद तब बढ़ा जब आरोप लगे कि इसमें बिंदी और तिलक जैसे पारंपरिक हिंदू प्रतीकों पर रोक है, जबकि हिजाब पहनने की अनुमति दी गई है। जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और कंपनी पर पक्षपात के आरोप लगने लगे।
सोशल मीडिया पर बायकॉट की मांग | Lenskart Dress Code Row
इस मुद्दे पर फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता Ashok Pandit ने भी प्रतिक्रिया दी और कंपनी के खिलाफ बायकॉट की अपील कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ हिजाब की अनुमति दी जा रही है, जबकि दूसरी तरफ बिंदी, तिलक और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई जा रही है। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने भी कंपनी की नीतियों पर सवाल उठाए और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
I have listened to your concerns and I understand your sentiment around this. I want to add more context to my earlier post.
The document currently circulating is an outdated internal training document. It is not an HR policy.
That said, it contained an incorrect line about…
— Peyush Bansal (@peyushbansal) April 16, 2026
ड्रेस कोड में क्या लिखा था?
वायरल हुए दस्तावेज में कई ड्रेस कोड नियम बताए गए थे। इनमें कहा गया था कि ऑफिस में बिंदी और तिलक की अनुमति नहीं है। वहीं सिंदूर को लेकर भी निर्देश था कि अगर लगाया जाए तो बहुत हल्का हो और माथे तक न फैले। दस्तावेज में यह भी लिखा था कि हिजाब पहनने की अनुमति है, लेकिन उसका रंग काला होना चाहिए और वह छाती के ऊपरी हिस्से को ढकना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया था कि बुर्का पहनना स्टोर में अनुमति योग्य नहीं है।
इसके अलावा धार्मिक धागे या कलाई पर पहने जाने वाले कलावा को उतारने की बात भी इसमें शामिल थी।
कंपनी और फाउंडर की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद पियूष बंसल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि वायरल हो रहा दस्तावेज कंपनी की मौजूदा नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक पुराना ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट था, जिसे गलत तरीके से शेयर किया गया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दस्तावेज में कुछ बातें गलत तरीके से लिखी गई थीं, जिन्हें पहले ही हटा दिया गया था। बंसल ने कहा कि कंपनी की मौजूदा HR पॉलिसी इससे बिल्कुल अलग है और इसे लेकर कोई भ्रामक धारणा न बनाई जाए।
बढ़ती बहस और कंपनी की छवि पर असर
लेंसकार्ट एक बड़ा ब्रांड है, जिसकी वैल्यूएशन अरबों डॉलर में आंकी जाती है और यह अपने खुद के मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के लिए जाना जाता है। लेकिन इस विवाद ने उसकी कॉरपोरेट छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग अब भी इस मुद्दे पर बंटे हुए हैं—कुछ इसे गलतफहमी बता रहे हैं, तो कुछ इसे कंपनी की नीतियों पर गंभीर सवाल मान रहे हैं।
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