पश्चिम बंगाल के 23 सांसद और 142 विधायकों के खिलाफ दर्ज हैं आपराधिक मामले, जानें सबकुछ

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 Aug 2021, 12:00 AM | Updated: 13 Aug 2021, 12:00 AM

पश्चिम बंगाल में कुछ महीनों पहले विधानसभा चुनाव संपन्न हुए। ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। वहीं, राज्य में 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी को मात्र 77 सीटों पर जीत मिली। इसी बीच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉमर्स (ADR) और इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट में एक बहुत ही बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके बाद से ही बंगाल के साथ-साथ देश की सियासत में बवाल मचा है। जिनपर लगा है आपराधिक मामलों में शामिल होने का आरोप

इस फेहरिस्त में कोई किसी से कम नहीं

ADR की रिपोर्ट में खुलासा किया हुआ है कि बंगाल के 42 सांसदों में से 23 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज है। वहीं, राज्य के 292 विधायकों में से 142 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज है। इनमें से कई नेताओं के खिलाफ रेप, हत्या, हत्या की कोशिश और महिलाओं पर अत्याचार समेत कई संगीन मामले दर्ज है। 23 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसदों में बीजेपी के 13, टीएमसी के 9 और कांग्रेस के 1 सांसद शामिल हैं।

दूसरी ओर राज्य के 142 विधायकों पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिनमें टीएमसी के 91, बीजेपी के 50 और 1 निर्दलीय विधायक शामिल है। इन विधायकों में से 10 पर हत्या, 30 पर हत्या की कोशिश, 20 पर महिलाओं पर अत्याचार के मामले और 1 पर रेप के मामले दर्ज हैं।

ममता के 12 और मोदी के 4 मंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं मामले

ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में 12 सदस्य आपराधिक पृष्ठभूमि से हैं। जिनमें सुब्रत मुखर्जी, फिरहाद हकीम, जावेद अहमद खान, मोहम्मद गुलाम रब्बानी, सपन देवनाथ, अखिल गिरी, दिलीप मंडल, सौमेन महापात्रा, अखरुजमां, सबिना यास्मिन, श्रीकांत महतो, बेचाराम मन्ना शामिल हैं। 

वहीं, केंद्रीय मंत्री के रुप में काम कर रहे पश्चिम बंगाल के 4 बीजेपी सांसदों के खिलाफ भी गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। जिनमें केंद्रीय राज्य मंत्री और बीजेपी सांसद जॉन बारला, डॉ सुभाष सरकार, शांतनु ठाकुर और नीशीथ प्रमाणिक शामिल है।

साथ ही बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह, लॉकेट चटर्जी, सौमित्र खान और बाबुल सुप्रियो के खिलाफ भी मामले दर्ज हैं। कांग्रेस की ओर से इस लिस्ट में अधीर रंजन चौधरी का नाम शामिल है।

बताते चले कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक फ्रंट (ADR) चुनावी और राजनीतिक सुधारों की हिमायत करने वाली एक लोकतांत्रिक संस्था है।

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