Golden Dome for America: ‘गोल्डन डोम’ क्या है? अमेरिका को क्यों जरूरी है यह मिसाइल रक्षा प्रणाली; अंतरिक्ष से होगा मुकाबला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 21 May 2025, 12:00 AM | Updated: 21 May 2025, 12:00 AM

Golden Dome for America: अमेरिका ने मिसाइल सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया युग शुरू करने का एलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘गोल्डन डोम’ नामक अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम परियोजना की घोषणा की है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 175 बिलियन डॉलर बताई जा रही है। यह परियोजना अमेरिका की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य देश को हवाई हमलों और बैलिस्टिक मिसाइलों से पूरी तरह सुरक्षित बनाना है।

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गोल्डन डोम सिस्टम क्या है? (Golden Dome for America)

गोल्डन डोम एक अत्याधुनिक और प्रस्तावित मिसाइल डिफेंस नेटवर्क है, जिसे विशेष रूप से बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हवाई हमलों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे इस तरह विकसित किया जाएगा कि यह अमेरिका के चारों ओर एक अदृश्य सुरक्षा कवच बनाकर दुश्मनों के हमलों को भेदने नहीं देगा। तकनीकी तौर पर यह सिस्टम अंतरिक्ष आधारित सेंसर, लॉन्ग-रेंज रडार, ग्राउंड-बेस्ड मिडकोर्स डिफेंस (GMD) और स्पेस-बेस्ड इन्फ्रारेड सिस्टम (SBIRS) जैसे अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा।

Golden Dome for America
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परियोजना की समयसीमा और महत्व

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य है कि यह सिस्टम उनके कार्यकाल समाप्त होने से पहले यानी 2029 तक पूरी तरह से चालू हो जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत से ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह सिस्टम अमेरिका को बाहरी मिसाइल हमलों से एक नई सुरक्षा देगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने भी इस तरह का सिस्टम बनाना चाहा था, लेकिन उस समय तकनीकी सीमाओं के कारण यह संभव नहीं हो पाया था। आज की तकनीक और संसाधनों की मदद से यह सपना साकार होने जा रहा है।

गोल्डन डोम का कार्यप्रणाली

गोल्डन डोम एक जटिल नेटवर्क होगा, जो सैटेलाइट्स के एक बड़े समूह द्वारा संचालित होगा। ये सैटेलाइट्स आसमान में उठने वाली हर खतरे की पहचान करेंगे, उनकी गति और दिशा को ट्रैक करेंगे और तुरंत कमांड पोस्ट को अलर्ट भेजेंगे। इसके बाद इंटरसेप्टर मिसाइलें लॉन्च की जाएंगी जो हवा में ही दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट कर देंगी। इस प्रणाली में हाइपरसोनिक, सुपरसोनिक और एडवांस क्रूज मिसाइलों को भी निशाना बनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रणाली के विकास के लिए एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को महत्वपूर्ण ठेका दिया गया है।

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अंतरिक्ष आधारित सेंसर और तकनीक की भूमिका

गोल्डन डोम सिस्टम अंतरिक्ष से मिसाइल हमलों की निगरानी करने में सक्षम होगा। अंतरिक्ष में लगे सेंसर दुश्मन की मिसाइलों की पहचान कर उनकी रीयल टाइम ट्रैकिंग करेंगे। सेंसर मिसाइल की गति, दिशा और खतरे के स्तर को भांपने का काम करेंगे, जिससे कमांड सेंटर को तेजी से सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इसके बाद लॉन्चर को सिग्नल भेजकर इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी जाएंगी, जो आसमान में दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट कर देंगी।

गोल्डन डोम की जरूरत क्यों?

दुनिया भर में बढ़ते तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच मिसाइल हमलों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका के करीबी सहयोगी इजरायल ने हाल के वर्षों में कई बार हमास और तेहरान पर हवाई हमले किए हैं, वहीं हूती विद्रोहियों के हमले भी चिंता का विषय हैं। मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं, इसीलिए ट्रंप का मानना है कि गोल्डन डोम जैसी उच्च तकनीक वाली प्रणाली की जरूरत है जो हर तरह की मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर दे। यह अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा और दुश्मनों के मंसूबों को विफल कर देगा।

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