फर्जी मार्कशीट पर बीबी को चुनाव लड़ाने के मामले में जेल भेजे गए बीजेपी विधायक, जानें सबकुछ!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 14 जुलाई 2021, 05:30 AM Updated: 14 जुलाई 2021, 05:30 AM
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कांग्रेस शासित राजस्थान में उदयपुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक अमृतलाल मीणा को जेल हो गई है। सराड़ा की कोर्ट में सरेंडर करने के साथ ही उन्होंने जमानत अर्जी भी लगाई थी लेकिन कोर्ट ने जमानत अर्जी को खारिज करते हुए बीजेपी विधायक को जेल भेज दिया है। उन्हें राजस्थान के सलूंबर जेल भेजा गया है। जिसके बाद से राज्य की सियासत में बवाल मच गया है। सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी को बैठे-बिठाए यह मुद्दा मिल गया है जिसके बाद से बवाल जारी है। 

जानें क्या है पूरा मामला?

बीजेपी विधायक एक पुराने मामले में जेल भेजे गए हैं। बीजेपी विधायक पर साल 2015 से फर्जी मार्कशीट का केस चल रहा था। उसी मामले में अमृतलाल मीणा की गिरफ्तारी हुई है। दरअसल, बीजेपी विधायक की पत्नी शांता देवी ने सेमारी से सरपंच का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्होंने बेहतरीन जीत हासिल की थी। 

जिसके बाद हारी हुई प्रत्याशी सगुना देवी ने शांता देवी की पांचवी क्लास की मार्कशीट फर्जी होने का दावा करते हुए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले की सीबीआई जांच हुई, जिसमें मार्कशीट फर्जी पाई गई। उसके बाद राजस्थान के छोटे से गांव का यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। 

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी विधायक अमृतलाल मीणा को कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर वह सरेंडर करने पहुंचे और साथ ही जमानत याचिका भी लगा दी। लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिली। अब फर्जी मार्कशीट बनवाकर अपनी बीबी को सरपंच का चुनाव लड़वाने के मामले में बीजेपी विधायक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

पंचायत चुनाव लड़ने की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता

बताते चले कि राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता लागू किया था। जिला पंचायत चुनाव के लिए उम्मीदवार को दसवीं पास होना जरुरी है तो वहीं, सरपंच चुनाव के लिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों का आठवीं और पिछड़ी जाति के उम्मीदवारों का पांचवी कक्षा तक पढ़ा लिखा होना अनिवार्य है। लेकिन बीजेपी विधायक अमृतलाल मीणा ने अपनी पत्नी को पांचवी कक्षा की फर्जी मार्कशीट पर सरपंच का चुनाव लड़ा दिया था और उन्हें जीत भी हासिल हो गई थी। साल 2015 से चल रहे इस मामले का नतीजा अब निकल कर सामने आया है। 

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