‘शर्मा जी’ तो निकले इस्लाम के समर्थक, भारत में सालों तक छिपा रहा सिद्दीकी परिवार, घर में मौलवियों की तस्वीरों से खुला राज

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 01 अक्टूबर 2024, 12:00 AM 🔄 Updated: 01 अक्टूबर 2024, 12:00 AM
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कर्नाटक के बेंगलुरु से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रविवार को यहां पुलिस ने चार पाकिस्तानी नागरिकों को पकड़ा, जो शर्मा परिवार बनकर घूम रहे थे। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, संदिग्धों में 48 वर्षीय राशिद अली सिद्दीकी, 38 वर्षीय आयशा और महिला के माता-पिता, 61 वर्षीय रुबीना और 78 वर्षीय हनीफ मोहम्मद शामिल हैं। वो अपना नाम शंकर शर्मा, आशा रानी, ​​राम बाबू शर्मा और रानी शर्मा रखे हुए थे।

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पास में थे भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड

शुरुआती जांच में पता चला है कि पाकिस्तानी नागरिक की पत्नी बांग्लादेश की है और वे पहले ढाका में रहते थे। रविवार को जब पुलिस ने घर पर छापा मारा तो परिवार सामान पैक करने में व्यस्त था। पूछताछ के दौरान सिद्दीकी ने खुद को शर्मा बताया और कहा कि वह 2018 से बेंगलुरु में रह रहा है। उसके पास से भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड भी मिला है। इसमें सभी नाम दर्ज हैं। जब पुलिस घर में दाखिल हुई तो दीवार पर मेहदी फाउंडेशन इंटरनेशनल जशन-ए-यूनुस लिखा हुआ था।

aadhar passport
Source: Google

घर में थीं मौलवियों की तस्वीरें

बेंगलुरू पुलिस के अनुसार, परिवार शंकर शर्मा, आशा रानी, ​​रामबाबू शर्मा और रानी शर्मा के नाम से बेंगलुरु में रह रहा था। जांच के दौरान चारों ने पुलिस को अपने पासपोर्ट और आधार कार्ड उपलब्ध कराए। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने घर की दीवार पर मक्का-मदीना और मेहंदी फाउंडेशन इंटरनेशनल जश्न-ए-यूनुस लिखा था। इसके अलावा, घर में कुछ मौलवियों की तस्वीरें भी लगी हुई थीं।

Bengaluru Police
source: Google

पाकिस्तान में उत्पीड़न के बाद गया बांग्लादेश

राशिद सिद्दीकी ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह पाकिस्तान के लियाकताबाद का रहने वाला है। उसका परिवार लाहौर से है, और उसकी पत्नी भी लाहौर से है। उसने बताया कि उन्होंने साल 2011 में एक इंटरनेट समारोह में शादी की थी। उस समय वह बांग्लादेश में अपने रिश्तेदारों के साथ रह रही थी। सिद्दीकी ने बताया कि पाकिस्तान में उसे परेशान किया गया और उसे बांग्लादेश जाना पड़ा।

ऐसे पहुंचा भारत

सिद्दीकी जब बांग्लादेश गया था, तब वह वहां प्रचारक था। सिद्दीकी को 2014 में बांग्लादेश में धमकियाँ मिलनी शुरू हुईं। इसके बाद वह परवेज मेहंदी फाउंडेशन के संपर्क में आया और भारत आ गया। सिद्दीकी ने पुलिस को बताया कि वह भारत आने के लिए पश्चिम बंगाल के मालदा गया था। वह भारत आया और कुछ दिन दिल्ली में बिताए, उसके बाद बेंगलुरु जाकर बस गया। सिद्दीकी भारत में रहने के दौरान खाद्य पदार्थ बेचता था और तेल की आपूर्ति करता था।

पुलिस ने भेजा हिरासत में

सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने इन चारों को गिरफ्तार कर लिया। बेंगलुरु पुलिस ने सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। साथ ही पुलिस ने आरोपियों के अन्य साथियों की तलाश शुरू कर दी है। वहीं, आईपीसी की धारा 420, 468, 471 और पासपोर्ट एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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