पंजाब, पंजाबी और पंजाबीयत के प्रति समर्पित डॉ. वीएन तिवारी से जुडी एक-एक बात यहाँ समझिये

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 28 Aug 2023, 12:00 AM | Updated: 28 Aug 2023, 12:00 AM

Dr V N Tiwari – पंजाबी साहित्य के महानायक डॉ. वीएन तिवारी को हम एक लेखक और राजनीतिज्ञ के तौर पर जानते है, इनके बारे में  यह तो सब जानते होने कि उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी में भी बहुत सारी किताबें लिखी है लेकिन क्या आपको यह पता है डॉ. वीएन तिवारी ने सिखों के गुरुओ की भी काफी किताबें लिखी है, जिनमें गुरुओं की विचारधारा और उनकी वचनवानियों के बारे में बताया है, उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी पंजाब, पंजाबी और पंजाबीयत के प्रति समर्पित की है, डॉ. वीएन तिवारी पंजाबी साहित्य का एक ऐसा महानायक है, जिन्हें 1981 में साहित्यिक आकादमी पुरस्कार मिला है यह पुरस्कार भारत में बहुत कम लोगो को उनके साहित्यों के लिए मिलता है.

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कौन थे डॉ. वीएन तिवारी?

डॉ. वीएन तिवारी पंजाबी की पंजाब युनिवर्सटी में पंजाबी के प्रोफेसर थे, और राज्यसभा के नामज्त सदस्य थे.  उनका हमेशा से पंजाब, पंजाबी और पंजाबीयत के प्रति समर्पण था. इसको लेकर उन्होंने एक किताब भी लिखी थी, “चंडीगढ़ की बोलियां” जिसमे उन्होंने प्रमाणित भी किया था कि चंडीगढ़ की भाषा पंजाबी है. उनका पंजाब की जबान के प्रति, पंजाब के साहित्य के प्रति और पंजाब की संस्कृति के प्रति स्नेह था. उन्होंने अपनी 48 साल की जिन्दगी में 40 किताबें लिखी थी. बहुत सारी किताबें उन्होंने सिख गुरुओं पर भी लिखी थी.

तिवारी जी ने दिसम्बर 1983, दिल्ली मे विश्व पंजाबी लेखक दिवस के मौके पर एक सम्मेलन का आयोजन किया था, वहां पूरे विश्व से पंजाबी के लेखक, चित्रकार और कवि आए थे. तिवारी जी को खुद उनकी लेखनियों की वजह से साहित्यिक आकादमी पुरस्कार मिला था.

आपको बता दे कि चरमपंथी और कट्टरपंथी के विरोध में ही डॉ. वीएन तिवारी ने पंजाब, पंजाबी और पंजाबीयत की मुहीम चलाई थी. उन्होंने हिन्दू सिख एकता, हिन्दू सिख भाईचारा को प्रमोट किया था. इसी के चलते उनकी हत्या कर दी गयी थी. वहां राजसभा के सदस्य भी थे और अभी उनका बेटा मनीष तिवारी कांग्रेस सांसद है.

तिवारी जी की मौत पर विवाद 

क्या आप जानते है कि सिख गुरुओं की विचारधारा पर ढेरों किताब लिखने वाले, भाईचारे को प्रमोट करने वाले और पंजाबी साहित्य में महानायक डॉ. तिवारी जी की चंडीगढ़ के सेक्टर 24 में, 3 अप्रैल 1984 को गोली मार कर उनकी हत्या कर दी गयी थी.

डॉ. वीएन तिवारी (Dr V N Tiwari) बहुत साधारण से व्यक्ति थे, उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि, उनकी विचारधारा ही उनकी मौत का कारण बन जाएगी. डॉ. वीएन तिवारी की मौत पर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय है. कुछ लोगो का मानना है कि उनकी मौत भिंडावाले ने करवाई थी क्यों कि वह पंजाब, पंजाबी और पंजाबीयत की मुहीम चला कर लोगो को भाईचारे का सन्देश रहे थे. और समाज में शांति बनाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे कट्टरपंथी अपना विरोधी मानते थे.

दूसरी तरफ तिवारी जी के बेटे कांग्रस सांसद मनीष तिवारी ने lallantop में  दिए, अपने इंटरव्यू में कहा कि हमे नहीं पता ‘मेरे पिता जी की हत्या में किसका हाथ था’ , उन्होंने बताया कि ‘उनकी माँ के पास भिंडावाले का फ़ोन आया था’ और उन्होंने अपनी सफाई देते हुए बताया था कि उनके ‘पति डॉ. वीएन तिवारी की हत्या में मेरा कोई हाथ नहीं है’. इनकी मौत का राज आज तक बना हुआ है, ऐसे ही तिवारी जी की मौत पर लोगो के अलग अलग मत है वो कहते है न कि ‘जितने मूह उतनी बातें’.

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