ट्रंप बार-बार क्यों कर रहे बंदर अब्बास पर हमला? मई में चौथी बार टूटा सीजफायर| US Targets Irans Bandar Abbas

Nandani | Nedrick News Iran Published: 29 May 2026, 10:14 AM | Updated: 29 May 2026, 10:14 AM

US Targets Irans Bandar Abbas: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। दोनों देशों के बीच भले ही आधिकारिक तौर पर सीजफायर लागू होने की बात कही जा रही हो, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में जिस तरह लगातार हमले, जवाबी कार्रवाई और धमकियों का दौर तेज हुआ है, उसने पूरे पश्चिम एशिया को फिर से बड़े युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

खुद को “मिस्टर सीजफायर” कहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति की बात तो कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई लगातार जारी है। कभी ईरान के ठिकानों पर हमले हो रहे हैं तो कभी लेबनान में इजरायल की बमबारी तेज हो रही है। बातचीत और युद्ध, दोनों एक साथ चलते नजर आ रहे हैं।

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ट्रंप की बैठक के बाद अचानक हुआ हमला| US Targets Irans Bandar Abbas

तनाव उस समय और बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान मुद्दे पर एक अहम कैबिनेट बैठक बुलाई। इस बैठक में ईरान को लेकर रणनीति पर लंबी चर्चा हुई। बैठक के बाद ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि “ईरान को डील करनी ही होगी।” ट्रंप के इस बयान के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड एक्टिव हो गया। अमेरिकी सेना ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक बंदर अब्बास में करीब 13 जोरदार धमाके हुए। एयरपोर्ट रनवे के पास मिसाइल गिरने की भी खबर सामने आई। यह हमला अचानक हुआ, लेकिन ईरान ने भी जवाब देने में देर नहीं लगाई।

कुवैत में अमेरिकी बेस पर ईरान का जवाबी हमला

अमेरिकी हमले के कुछ घंटे बाद ही ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को टारगेट कर दिया। ईरान का यह संदेश साफ था कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है। हालांकि अमेरिका का दावा है कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास खतरा पैदा कर रहे ईरान के चार हमलावर ड्रोन मार गिराए। वहीं ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने इस पूरे घटनाक्रम को अलग तरीके से पेश किया।

तस्नीम के मुताबिक अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। दावा किया गया कि एक अमेरिकी तेल टैंकर अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहा था। जब ईरानी सेना ने उसे रोकने की कोशिश की और टैंकर नहीं रुका, तब पहले चेतावनी दी गई और फिर गोलाबारी शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि इसके बाद अमेरिकी तेल टैंकर को पीछे हटना पड़ा, लेकिन इस झड़प से नाराज अमेरिका ने बंदर अब्बास के आसपास कई जवाबी हमले शुरू कर दिए।

आखिर बंदर अब्बास क्यों है इतना अहम?

अमेरिका लगातार बंदर अब्बास को निशाना बना रहा है और इसके पीछे कई रणनीतिक वजहें हैं। सबसे पहली वजह है होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण। बंदर अब्बास होर्मुज के उत्तरी तट पर स्थित है और यहां से गुजरने वाले जहाजों और तेल टैंकरों पर नजर रखना बेहद आसान होता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है।

दूसरी बड़ी वजह यहां मौजूद IRGC यानी ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की नेवल बेस है। यहां ईरान की तेज रफ्तार स्पीड बोट्स, माइंस बिछाने वाली यूनिट और मिसाइल सिस्टम तैनात हैं। इसके अलावा बंदर अब्बास के आसपास पहाड़ी इलाकों में ईरान के मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स और आत्मघाती ड्रोन बेस मौजूद बताए जाते हैं। अमेरिकी सेना इन्हीं क्षमताओं को कमजोर करना चाहती है। आर्थिक नजरिए से भी बंदर अब्बास ईरान की लाइफलाइन माना जाता है। ईरान का करीब 85 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी बंदरगाह से होता है।

मई में कई बार टूट चुका है सीजफायर

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर टूटने जैसे हालात बने हों। मई महीने में ही कई बार दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई हुई। 3 और 4 मई की रात अमेरिका ने ईरान के द्वीपों और तटीय इलाकों पर हमले किए थे। इसके बाद 7 और 8 मई को ईरान के तीन बंदरगाहों को निशाना बनाया गया। 25 मई को भी ईरानी मिसाइल ठिकानों और होर्मुज में बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं पर हमले हुए थे। अब एक बार फिर बंदर अब्बास पर ताजा हमला होने के बाद तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।

ईरान की चेतावनी से बढ़ी चिंता

ईरान ने साफ कर दिया है कि जहां से उस पर हमला होगा, वह वहीं जवाब देगा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। ईरान का दावा है कि कुवैत की जमीन का इस्तेमाल अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास पर हमले के लिए किया। इसी वजह से जवाबी कार्रवाई में कुवैत स्थित अमेरिकी बेस को टारगेट किया गया।

ईरान ने अरब देशों को भी चेतावनी दी है कि वे अमेरिका को अपनी जमीन इस्तेमाल करने की इजाजत न दें, वरना उन्हें भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

यूरेनियम बना सबसे बड़ा विवाद

इस पूरे टकराव के केंद्र में ईरान का संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम सौंप दे, लेकिन तेहरान इसके लिए तैयार नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड सुरंगों में छिपा रखा है। कहा जा रहा है कि इन्हें स्कूबा टैंकों में सुरक्षित रखा गया है और अमेरिकी बंकर बस्टर बम भी वहां तक नहीं पहुंच सकते।

इसी वजह से यह संकट और जटिल होता जा रहा है। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि बातचीत की संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है और दुनिया की नजरें अब होर्मुज स्ट्रेट पर टिक गई हैं, जहां छोटी सी चिंगारी भी बड़े युद्ध का कारण बन सकती है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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