UPI Transaction Charges: डिजिटल पेमेंट को लेकर सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में साफ किया कि आम ग्राहकों को UPI से भुगतान करने पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा। भविष्य में अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किया जाता है, तो यह केवल एक तय सीमा से ऊपर होने वाले चुनिंदा कारोबारी लेनदेन तक सीमित रहेगा। छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडर्स पर इसका बोझ नहीं डाला जाएगा।
UPI यूजर्स के लिए राहत की बात| UPI Transaction Charges
सीतारमण ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। राज्यसभा इस विधेयक को पारित कर चुकी है और अब इसे कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत है। विधेयक में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में बदलाव का प्रस्ताव है, जिसके जरिए MDR जैसे लेनदेन शुल्क का प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि, वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका मकसद UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर कोई टैक्स या ट्रांजैक्शन फीस लगाना नहीं है।
No Charges for #UPI Users
➡️ The Government of India wishes to categorically state:
✅️ No charges for users: Consumers making payments will not face any transaction charges.
✅️ P2P transactions free: All Person-to-Person transactions will continue to be free of charge.…
— PIB India (@PIB_India) August 8, 2026
विधेयक पास होने के बाद एक समिति यह देखेगी कि MDR की जरूरत है या नहीं। अगर इसे लागू किया जाता है तो उसकी सीमा और पूरा ढांचा भी समिति की सिफारिश के आधार पर तय होगा। सीतारमण ने कहा कि फिलहाल किसी MDR सिस्टम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
चाय वाले से किराना दुकानदार तक को राहत
वित्त मंत्री ने खास तौर पर छोटे कारोबारियों को लेकर स्थिति साफ की। चाय बेचने वाले, सब्जी विक्रेता, फूल वाले, स्ट्रीट वेंडर, ऑटो चालक और किराना दुकानदारों पर MDR लागू नहीं किया जाएगा। यानी रोजमर्रा के छोटे-मोटे UPI पेमेंट पहले की तरह बिना शुल्क के जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि भविष्य में MDR सिर्फ एक निश्चित सीमा से ऊपर के सीमित कारोबारी लेनदेन पर लागू हो सकता है। उन्होंने कार्ड पेमेंट का उदाहरण देते हुए बताया कि क्रेडिट कार्ड पर व्यापारी आम तौर पर 1.5 से 2 फीसदी या उससे ज्यादा और डेबिट कार्ड पर करीब 0.90 फीसदी तक MDR देते हैं।
जुलाई में UPI ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड
सीतारमण के मुताबिक जुलाई 2026 में UPI ने 2,366 करोड़ लेनदेन प्रोसेस किए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। UPI अब 11 देशों में उपलब्ध है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के UPI मॉडल को लंबे समय तक टिकाऊ, सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक इसकी स्थिरता देश के हित में है और इससे जुड़े सिस्टम में लगातार इनोवेशन की जरूरत है।
विदेशी कंपनियों को टैक्स में राहत का प्रस्ताव
विधेयक में विदेशी कंपनियों को भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को कैपिटल गुड्स, उपकरण और औजार उपलब्ध कराने से होने वाली आय पर टैक्स छूट देने का प्रस्ताव भी है। टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक इसका सीधा फायदा Apple जैसी कंपनियों को मिल सकता है, जो भारत में Foxconn जैसी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ काम करती हैं। इस संबंध में Apple और Foxconn से भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला था।
प्रस्ताव के तहत पात्र विदेशी कंपनियां सीमा शुल्क वाले सामान को भारत में लाकर कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तक पहुंचा सकेंगी। इन मशीनों और उपकरणों का मालिकाना हक विदेशी कंपनी के पास ही रहेगा, जबकि उनका इस्तेमाल भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर के नियंत्रण और निर्देशन में होगा।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
इस योजना में लैपटॉप, ऑल-इन-वन PC, टैबलेट, सर्वर, अल्ट्रा स्मॉल फॉर्म फैक्टर सिस्टम और सब-असेंबली से लेकर तैयार इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं। सीतारमण ने कहा कि इसका मकसद भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा इकोसिस्टम तैयार करना, निवेश बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन बनाने में हजारों तरह के पुर्जों की जरूरत होती है और उनकी समय पर सप्लाई बेहद जरूरी है। विदेशी कंपनियों को सीमा शुल्क वाले गोदामों में इन कंपोनेंट्स को रखने की सुविधा मिलने से जरूरत के समय फैक्ट्रियों तक सामान जल्दी पहुंचाया जा सकेगा।
FII और BIS को भी प्रस्तावित छूट
बिल में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को कुछ सरकारी सिक्योरिटीज में इन्वेस्टमेंट पर कैपिटल गेन और इंटरेस्ट से छूट देने का भी प्रस्ताव है। दोनों प्रोविजन 5 जून के ऑर्डिनेंस में भी शामिल थे।
कुल मिलाकर, सरकार का फोकस एक तरफ UPI को आम लोगों के लिए आसान और मुफ्त बनाए रखने पर है, तो दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉनिक्स और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने पर है।
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