एंट्री बैन कर देंगे! Netaji के नाम पर 1 ही याचिका बार-बार लाने पर क्यों भड़का Supreme Court?

Rajni | Nedrick News New Delhi Published: 20 अप्रैल 2026, 05:52 PM Updated: 20 अप्रैल 2026, 05:54 PM
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Supreme Court Netaji Petition Warning: सुप्रीम कोर्ट ने आज सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि अदालती कार्रवाई कोई मजाक नहीं है। दरअसल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को (Netaji Subhas Chandra Bose)  ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने की बार-बार मांग करने वाले याचिकाकर्ता पिनाकपाणि मोहंती को जस्टिस सूर्यकांत ने न केवल कड़ी फटकार लगाई, बल्कि भविष्य में ऐसी याचिका लाने पर उनकी कोर्ट में एंट्री बैन करने तक की चेतावनी दे दी।

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क्या है मामला

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार 20 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक दिलचस्प लेकिन कड़ी प्रतिक्रिया वाला मामला सामने आया। जस्टिस सूर्यकांत (Justice Suryakant) की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाई और यहाँ तक चेतावनी दे दी कि उसकी सुप्रीम कोर्ट में एंट्री तक बंद की जा सकती है।

यह मामला पिनाकपाणि मोहंती नाम के एक व्यक्ति की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि नेताजी और उनकी आजाद हिंद फौज (INA) के सशस्त्र संघर्ष को ही भारत की आजादी का मुख्य कारण माना जाना चाहिए, न कि केवल अहिंसक आंदोलनों को।

न्यायिक आदेश के मोहताज नहीं

हालांकि जस्टिस सूर्यकांत (Justice Suryakant) की पीठ इस दलील से बिल्कुल सहमत नहीं हुई। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि नेताजी जैसे महान व्यक्तित्व किसी न्यायिक आदेश के मोहताज नहीं हैं और वे हमेशा अमर रहेंगे। बेंच ने याचिकाकर्ता पर प्रचार पाने (Publicity) के लिए बार-बार एक ही मुद्दा उठाने का आरोप लगाया और रजिस्ट्री को उनकी भविष्य की याचिकाओं पर रोक लगाने का निर्देश दिया।

इसके अलावा याचिका में नेताजी की जयंती (23 जनवरी) और आईएनए (INA) के स्थापना दिवस (21 अक्टूबर) को राष्ट्रीय दिवस घोषित करने की भी मांग की गई थी। यह मामला जब जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची (Joymalya Bagchi) की बेंच के सामने आया, तो शुरुआत में ही माहौल सख्त हो गया। कोर्ट को पता चला कि याचिकाकर्ता पहले भी दो बार इसी तरह की याचिकाएं दाखिल कर चुका है और दोनों बार वे खारिज हो चुकी हैं।

PIL क्यों नहीं होगी स्वीकार

इस पर जस्टिस सूर्यकांत (Justice Suryakant) ने भारी नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता का मकसद सिर्फ पब्लिसिटी हासिल करना है। उन्होंने रजिस्ट्री को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि भविष्य में इस व्यक्ति की कोई भी पीआईएल (PIL) स्वीकार न की जाए। कोर्ट ने चेतावनी भी दी कि यदि याचिकाकर्ता ने अपनी हरकतों में सुधार नहीं किया, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

जब याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ‘इस बार मामला अलग है’, तो कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसी हरकतें जारी रहीं और अदालत का समय बर्बाद किया गया, तो याचिकाकर्ता की सुप्रीम कोर्ट में एंट्री ही बंद कर दी जाएगी।

आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने का निर्देश

याचिका में एक और प्रमुख मांग यह भी की गई थी कि केंद्र सरकार को 1947 में भारत की आजादी के पीछे की ‘वास्तविक वजहों’ पर एक आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों और कारणों से अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

सुनवाई करने से ही इनकार

लेकिन कोर्ट ने इन सभी मांगों पर सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया और साफ संकेत दे दिया कि बार-बार एक जैसे मुद्दों पर याचिका दाखिल करना न्यायालय का समय बर्बाद करना है। कुल मिलाकर यह मामला दर्शाता है कि सुप्रीम कोर्ट अब ऐसी याचिकाओं को लेकर काफी सख्त रुख अपना रहा है, खासकर जब वे बार-बार बिना नए आधार के दाखिल की जाती हैं।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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