Sassi Punnu Qissa: पंजाब की वो दर्दनाक प्रेम कहानी, जिसने सदियों तक दिलों पर राज किया

Shikha Mishra | Nedrick News Punjab Published: 21 अगस्त 2026, 10:20 PM Updated: 21 अगस्त 2026, 10:20 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Sassi Punnu Qissa: पंजाबी पृष्ठभूमि पर कई ऐसी प्रेम कहानी हुई जिसके दुखद अंत के बाद भी उन्हें करोड़ों लोग पसंद करते है। वो पंजाब के ही नहीं बल्कि पूरे भारत के प्रेमी जोड़े के लिए आदर्श कहनियाँ कहलाती है, जिनकी मिसालें दी जाती है। हीर रांझा और सोहनी महिवाल की कहानियां ऐसे ही प्रेम कहानी है जिनका अंत बेहद पीड़ादायक रहा था, लेकिन इनकी प्रेम कहानी अमर हो गई, लेकिन इसी पंजाब की धरती पर एक प्रेम कहानी ऐसी भी हुई जो भले ही इतनी प्रचलित नहीं हुई लेकिन पंजाब की परंपरा और संस्कृति में बेहद अहम मानी जाती है। हम बात कर रहे सासी और पन्नू की प्रेम कहानी की। जहां सासी एक राजकुमारी होते हुए धोबिन की जिंदगी जीने पर मजबूर हुई औऱ अपने प्यार के लिए सूखे रेगिस्तान में चलते चलते दुनिया से चली गई तो वहीं पन्नू अपने प्यार के लिए जिंदा ही जमीन में चला गया। अपने इस लेख में हम सासी पन्नू की इसी अमर प्रेम कथा के बारे में जानेंगे जो पंजाब की मिट्टी में घुली हुई है।

और पढ़े: पार्टियों में ड्रग्स, कास्टिंग काउच और पार्टनर की अदला-बदली… टीवी एक्ट्रेस ने खोली ग्लैमर दुनिया की पोल| Aanchal Khurana News

क्या है सासी पन्नू की कहानी

सस्सुई पुन्नहुन  की लोककथा केवल पंजाब में ही नहीं बल्कि सिंध और बलूतिस्तान की हवाओं में घुली हुआ एक त्रासदीपूर्ण प्रेम कहानी के रूप में कही जाती है। 15वी शताब्दी में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के पहले सिंधी सूफी कवि काज़ी कदान की ग्रंथो में सासी पन्नु की प्रेम कहानी का जिक्र मिलता है। काजी कदान शास्त्रीय सिंधी कविता का जनक भी कहा जाता है। लेकिन सासी पन्नु की लोक कथाये प्रचलित तब होनी शुरु हुई जब 16वी शताब्दी में शाह आलम करीम बुलरी, जो कि एक सिंधी सूफी कवि थे, उनकी रचनाओं में सासी पन्नु को विशेष स्थान दिया गया। उनकी प्रसिद्ध रचना करीम जो रिसालो में सासी पन्नु की प्रेम कहानी को इस तरह से दर्शाया गया है कि वो लोगो के जेहन में बसने लगी, और सिंघ के साथ साथ बलूच औऱ पंजाब के अन्य हिस्सों मे भी काफी लोकप्रिय हो गई।

सासी को एक संदूक में बंद कर सिंधू नदी में बहा दिया

लोककथाओं के अनुसार सासी जिसे सस्सुई भी कहा जाता है, वो सिंध के भंबोर के राजा के घर पैदा हुई थी, लेकिन उसके जन्म के बाद राज्य पर संकट आ गया, जिससे राजपुरोहितों ने कहा कि उन्हें उस कन्या का त्याग कर देना चाहिए, अन्यथा राज्य पूरी तरह से तबाह हो जायेगा, राजा ने राज्य बचाने के लिए सासी को एक संदूक में बंद कर सिंधू नदी में बहा दिया। वो संदूक नदी किनारे बैठ कर कपड़े धोने वाले एक धोबी को मिला..उसकी अपनी कोई संतान नहीं थी इसलिए उसने तुरंत सासी को पालने का फैसला किया। सासी जो कि एक राजकुमारी थी, एक गरीब धोबी के घर पलने लगी थी, लेकिन जैसे जैसे वो बड़ी होती गई, उसकी सुंदरता भी बढ़ती गई, जिसे टक्कर देने वाला कोई नहीं था। उसकी सुंदरता की चर्चा बलूचिस्तान के केच के बलूच शासक जाम आली के महल में भी पहुंची थी.. यहीं का राजकुमार था पुन्नू जिन्हें बलोच लोग पुन्नहुन कहते है।

पुन्नु के डेडीकशन को देखते हुए सासी के पिता मान गए

सासी की खूबसूरती को देखने के लिए पुन्नू खुद सासी से मिलने के लिए भंबोर गांव पहुंचा। जहां जब उसने सासी को देखा तो वो देखता रह गया। सासी ने भी पुन्नु को देखा और दोनो को पहली ही नजर में बेहद गहरा प्यार हो गया। लेकिन सासी के पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे.. वो चाहते थे कि धोबी होने के नाते सासी की शादी किसी धोबी से हो,.. उन्होंने पुन्नु के सामने शर्त रखी कि वो धोबी बन कर पहले उनका दिल जीते.. पुन्नु तैयार हो गया लेकिन जब पुन्नु ने कपड़े धोये तो सारे कपड़े फट गए..लेकिन यहां पुन्नु ने चालाकी की औऱ सभी कपड़ो में सोने के मोहरे रख दी, ताकि गांव वालें कुछ न बोले.. औऱ हुआ भी यहीं..पुन्नु के डेडीकशन को देखते हुए सासी के पिता मान गए। लेकिन जब इसकी जानकारी पुन्नु के भाईयो को लगी तो वो नाराज हो गए। एक धोबी की बेटी की शादी वो भी एक राजकुमार से.. ये नामुमकिन था। फिर भी जब पुन्नु के भाईयो ने देखा कि पुन्नु सासी के पीछे किस तरह दीवाना है तो उन लोगो ने एक साजिश रची.. वो खुशी खुशी शादी में शामिल हुआ, औऱ शादी के जश्न के नाम पर पुन्नु को नशीली शराब पिलाई और उसे नशे की हालत में ही रात के अंधेरे में अपने नगर कैच ले गए।

दो प्यार करने वाले बिछड़ कर भी एक हो गए

अगले दिन सासी को जब सारी बात पता चली तो वो पागल सी हो गई और पुन्नु के लिए कैच तरफ नंगे पैर ही भाग निकली.. मीलो रेगिस्तान, सूखे जंगलो को पार कर कैच जाते समय वो बार बार पुन्हुन पुन्हुन की रट लगा रही थी। प्यास के मारे जब उसका गला सूखने लगा तो उसने एक चरवाहे से पानी मांगी.. लेकिन सासी की सुंदरता को देख कर उसकी नियत खराब हो गई, चरवाहे ने पानी देने के बहाने उसके साथ जब जबरदस्ती करने की कोशिश की जो सासी किसी तरह से बच निकली.. और धरती से प्रार्थना की कि उसे अपने अंदर छिपा कर बचा लें। तुरंत धरती फटी और सासी धरती में समा गई.. वहीं दूसरी तरफ जब पुन्नु को होश आया तो वो सासी से मिलने के लिए भागा.. भागते भागते वो उसी स्थान पर पहुंचा जहां सासी ने खुद को धरती की गोद में सौंपा था.. पुन्नु की हालात और सासी का नाम सुनकर चरवाहे ने सारी बात बताई.. पुन्नु अपनी सासी के बारे में दहाड़े मारकर रोने लगा औऱ उसने भी प्रार्थना की कि अगर उशका प्रेम सच्चा और पवित्र है तो उसे भी उसी घाटी में जगह मिल जाये जहां सासी समाई है.. उसके तुरंत बाद धरती फिर से फटी और पुन्नु भी वहां समा गया। दो प्यार करने वाले बिछड़ कर भी एक हो गए थे। सूफी कवि शाह अब्दुल लतीफ भिट्टाई पुन्नु और सासी की कहानी को शाश्वत प्रेम और ईश्वर के साथ मिलन के उदाहरण के रूप में देखते है। सासी पुन्हुन की काल्पनिक कब्रें बलूचिस्तान के लासबेला में मौजूद है जो दोनों की अमर प्रेम को दर्शाती है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

Recent News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds