दरियादिली: 'मैं 85 का हूं…अपनी जिंदगी जी चुका', ये कहकर RSS से जुड़े बुजुर्ग ने युवक को दे दिया बेड, फिर हो गई मौत!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 28 अप्रैल 2021, 05:30 AM Updated: 28 अप्रैल 2021, 05:30 AM
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देश इस वक्त कोरोना के भयंकर संकट से जूझ रहा है। महामारी के इस दौर में जिस तरह से लोग एक दूसरे की मदद कर रहे हैं, वो सराहनीय है। आप सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म पर जाकर देख लें, इस वक्त मदद की ट्वीट की बाढ़ आई हुई है। कोई किसी के लिए ऑक्सीजन का इंतेजाम कर रहा है, तो कोई बेड का।

40 साल के युवक के लिए छोड़ा बेड

इस दौरान महाराष्ट्र में 85 साल के बुजुर्ग ने भी इंसानियत की मिसाल पेश की। नारायण दाभाडकर नाम के बुजुर्ग ने ये कहकर 40 साल के एक युवक के लिए अस्पताल में बेड छोड़ दिया कि उन्होंने अपनी जिंदगी जी ली है और युवक को इसकी उनसे ज्यादा जरूरत है। इसके तीन दिन बाद ही नारायण दामभाडकर की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक वो RSS से जुड़े हुए थे। 

मिली जानकारी के अनुसार नागपुर के रहने वाले नारायण दाभाडकर कोरोना से संक्रमित हो गए थे। इलाज के लिए उनको अस्पताल में बेड चाहिए था, लेकिन वो मिल नहीं रहा था। काफी मशक्कत के बाद परिवार ने एक अस्पताल में बेड का इंतेजाम किया। कागजी कार्रवाई चल ही रही थी कि इसी दौरान एक महिला अपने पति को लेकर अस्पताल आई। 

‘मेरा कर्तव्य कि मैं जान बचाऊं’ 

महिला भी अपने पति के लिए बेड की तलाश कर रही थी, लेकिन वो उसे मिल नहीं रहा था। महिला डॉक्टर्स के आगे गिड़गिड़ाने लगी। नारायण दाभाडकर ने महिला का दर्द देखा नहीं गया और उन्होनें डॉक्टर से अपना बेड महिला के पति को देने को कहा। 

नारायण दाभाडकर बोले कि मेरी उम्र 85 के ऊपर हो गई। काफी कुछ देख लिया, मैनें अपनी जिंदगी जी ली है। इस बेड की जरूरत मुझसे ज्यादा महिला के पति को है। उस व्यक्ति के बच्चों को अपने पिता की जरूरत है।’

डॉक्टरों से नारायण ने कहा कि अगर महिला के पति की मौत हो गई तो बच्चे अनाथ हो जाएंगे। इसलिए ये मेरा कर्तव्य बनता है कि मैं उसकी जान बचाऊं। 

इसके बाद नारायण ने अपने बेड को महिला के पति को दे दिया। इसके बाद घर में ही नारायण का इलाज किया जाने लगा, लेकिन तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई। 

बताया गया कि दाभाडेकर कोरोना संक्रमित हो गए थे। उनका ऑक्सीजन लेवल 60 तक पहुंच गया था। बेटी और दामाद उनको इंदिरा गांधी शासकीय अस्पताल लेकर गए, जहां बड़ी मुश्किल से इलाज के लिए एक बेड मिला, लेकिन किसी दूसरे की जान बचाने के लिए उन्होंने अपना बेड त्याग दिया।

दरियादिली की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल

सोशल मीडिया पर नारायण दाभाडेकर की ये दरियादिली वाली कहानी वायरल होने लगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसको लेकर ट्वीट करते हुए कहा- “दूसरे व्यक्ति की प्राण रक्षा करते हुए श्री नारायण जी तीन दिनों में इस संसार से विदा हो गये। समाज और राष्ट्र के सच्चे सेवक ही ऐसा त्याग कर सकते हैं, आपके पवित्र सेवा भाव को प्रणाम!आप समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। दिव्यात्मा को विनम्र श्रद्धांजलि। ॐ शांति!”

वहीं बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा- “ये है संघ के संस्कार…नागपुर के श्री नारायण भाऊराव दाभाड़कर RSS के वो कार्यकर्ता जिन्होंने एक Covid मरीज के लिए हॉस्पिटल में अपना बेड छोड़ दिया था! वे उस महिला का रुदन नहीं देख सके जिसके पति को बेड नहीं मिल रहा था! घर आने के तीसरे दिन उनका निधन हो गया!”

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