कोरोना के लक्षण, फिर भी रिपोर्ट आई Negative…तो सीटी स्कैन से लगाए संक्रमण का पता, जानिए कब ये टेस्ट कराने की जरूरत?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 28 अप्रैल 2021, 05:30 AM Updated: 28 अप्रैल 2021, 05:30 AM
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कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों ने हर किसी की चिंता बढ़ाई हुई है। देश में कोरोना की वजह से हालात ऑउट ऑफ कंट्रोल हो गए हैं। रोजाना लाखों की संख्या में लोग इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं, जबकि हजारों लोगों की मौत हो रही है। 

लक्षण के बावजूद रिपोर्ट आ रही नेगेटिव

कोरोना संक्रमण की बेकाबू रफ्तार के बीच एक टेंशन टेस्ट को लेकर भी है। दरअसल, अब कुछ लोगों की RT-PCR टेस्ट रिपोर्ट्स गलत आ रही है, जो चिंता का एक कारण बनी हुई है। कई लोग ऐसे हैं, जिनमें कोरोना के लक्षण है, लेकिन उनकी टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आ रही। 

इसकी एक वजह म्यूटेट वायरस मानी जा रही है। ऐसा बताया जा रहा है कि म्यूटेट वायरस आसानी से RT-PCR टेस्ट को चकमा देने में कामयाबहो रहा है। इसलिए अगर कुछ लोगों में कोरोना के गंभीर लक्षण है और फिर भी टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई, तो दोबारा टेस्ट कराने की जगह CT स्कैन कराने की सलाह दी जा रही है।

सीटी स्कैन करता है मदद

दरअसल, शरीर में वायरल इंफेक्शन की मौजूदगी का पता लगाने का एक अलग तरीका है। छाती का स्कैन उन लोगों को पड़ती है, जिनमें इंफेक्शन के कॉमन लक्षण हो, लेकिन टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। 

एक ओर जहां रैपिड एंटीजन और RT-PCR टेस्ट के लिए नाक या गले से सैंपल लिए जाते हैं। तो वहीं सीटी स्कैन डायग्नोस्टिक टूल है, जिससे फेफड़ों की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी देता है। 

दरअसल, ऐसा अनुमान है कि ये जो नया म्यूटेट वायरस है, वो शुरुआती दिनों में फेफड़ों को ही डैमेज कर रहा है। ऐसी स्थिति में सीटी स्कैन के जरिए वायरल इंफेक्शन की गंभीरता और उसके प्रसार की सटीक जानकारी दे रहा है। साथ में इससे मरीज को सही इलाज देने में भी मदद मिल रही है। 

हालांकि सीटी स्कैन डॉक्टर की सलाह पर ही तब कराया जाता है, जब किसी शख्स में कोरोना के हल्के या फिर गंभीर लक्षण हो। 

कैसे की जाती है इसकी रीडिंग?

आमतौर पर सीटी स्कैन की रीडिंग CORAD स्कोर और CT स्कोर के माप के आधार पर ही की जाती है। ये RT-PCR में डिटेक्ट की जानी वाली CT वेल्यू से अलग होती है।

CORAD की स्कोरिंग 1-6 अंक के बीच में होती है। 1 का ये मतलब होता है कि संदिग्ध शख्स कोरोना नेगेटिव है। वहीं 2-4 के बीच के स्कोर का मतलब होता है कि वायरल इंफेक्शन की संभावना है। 5 स्कोर का मतलब ये होता है कि व्यक्ति में कोविड-19 के हल्के लक्षण से है। वहीं अगर स्कोर 6 हो तो इसका मतलब ये होता है कि मरीज में कोरोना का खतरा बहुत ज्यादा है।  

CORADS के अलावा सीटी स्कैन को कई बार CT सीवियरिटी स्कोर भी मेंशन करते हैं। ये फेफड़ों की वास्तविक हालत की जानकारी देता है। वैसे हर लैब में इसको रीड करने का तरीका अलग होता है। अधिकार लैब में इसको 1-40 या 1-25 के बीच अंकित किया जाता है। स्केल पर ज्यादा स्कोर का ये मतलब होता है कि फेफड़ों पर बड़ा खतरा है और ये कोविड-19 की गंभीरता को भी दर्शाता है।

सिर्फ इन लोगों को कराना चाहिए ये…

जैसे जैसे सीटी स्कैन की मांग बढ़ने लगी, इसकी कीमत में भी इजाफा हो गया। बड़ी संख्या में लोग इसे कराने के लिए पहुंच रहे है। हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो सभी लोगों को इसकी जरूरत नहीं होती। 

एक्सपर्ट्स के अनुसार RT-PCR रिपोर्ट नेगेटिव आए और फिर भी उसमें कोरोना के कॉमन लक्षण नजर आ रहे हैं, तो सीटी स्कैन इसमें मददगार साबित हो सकता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई और एक हफ्ते बाद भी लक्षणों में आराम नहीं तो भी इसे कराया जा सकता है।

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