क्यों जोड़ा जाता है सिख धर्म से राधा स्वामी मत? जानें पूरा सच – Radha Soami vs Sikhism

Shikha Mishra | Nedrick News Ghaziabad Published: 22 अप्रैल 2026, 04:31 PM Updated: 22 अप्रैल 2026, 04:31 PM
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Radha Soami vs Sikhism: सिख धर्म की स्थापना और सिख गुरुओ के बनाये नियमों और उनकी सख्ती से पालन करने को लेकर अक्सर बातें होती है, खालसा पंथ और उनके नियमों का पालन करना.. हर एक सिख के लिए अहम होता है,…. सिखों के पंच ककार का महत्व तो पूरी दुनिया जानती है.. लेकिन क्या आप ये जानते है कि सिख धर्म से ही मिलता जुलता एक और मत है, जिसे लेकर अक्सर ये गलत फहमी हो जाती है कि वो सिख पंथ का ही हिस्सा है, लेकिन ये पंथ सिखों से बिल्कुल अलग है, सिखों से मिलते जुलते इस पंथ को राधा स्वामी कहा जाता है। राधा स्वामी को लेकर कई तरह की गलतफहमी है.. अपने इस लेख में हम सिख धर्म और राधा स्वामी के बीच का फर्क जानेंगे.. साथ ही कैसे शुरु हुआ राधा स्वामी पंथ।

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क्या है राधा स्वामी पंथ – Radha Soami vs Sikhism

राधास्वामी (Radha Soami) संप्रदाय अथवा पंथ की शुरुआत श्री सेठ शिव दयाल सिंह जी महाराज ने केवल अपने चंद शिष्यों के लिए ही 18वी सदी में किया था लेकिन स्वामी जी के विचारों के प्रभावित होकर स्वामी जी के एक शिष्य राय बहादुर सालिग राम जी महाराज (हुजूर महाराज) के अनुरोध पर इसे आम लोगो के लिए 1861 में वसंत पंचमी के दिन भी शुरु कर दिया गया। इस संप्रदाय को शुरु करने वाले स्वामी सेठ शिव दयाल सिंह जी महाराज का जन्म 25 अगस्त 1818 को पन्नी गली, आगरा में हुआ था। जो कि वैसे तो हिंदू धर्म से आते थे, लेकिन वो हिंदू धर्म को मानने के बजाय बचपन से ही सिख धर्म और सिख गुरुओं की बताई  शब्द योग के प्रति आकर्षित हो गए और उसमें ही लीन रहने लगे। आज भी आगरा का दयालबाग राधास्वामी संप्रदायो को मानने वालो के लिए एक प्रमुख स्थान है।

संतदास कबीर जी ने शुरु किया राधास्वामी – Radha Soami vs Sikhism

राधास्वामी मत में माना जाता है कि जो मत परम संतदास कबीर जी ने शुरु किया था राधास्वामी (Radha Soami) मत भी उसे ही फॉलो करता है।  और इसी सूरत शब्द को सिख धर्म के पहले गुरु गुरु नानक देव जी ने भी फॉलो किया है। वैसे तो ये एक धार्मिक संप्रदाय या आध्यात्मिक परंपरा है जिसे राधा स्वामी को मानने वाले ही फॉलो करते है, इसमें केवल शब्द ध्यान के कारण ही इसे सिख धर्म से जोड़ा जाता है। राधास्वामी मत को मानने वालों को ये बताया जाता है कि केवल आप अपने आध्यत्म के दम पर सीधे आत्मा औऱ परमात्मा को जोड़ सकते है। ये संप्रदाय  सेवा और सहअस्तित्व को मानने पर भरोसा करता है।

जो कि  आध्यात्म, नैतिक जीवन, शाकाहारी आहार विचार और सेवा के माध्यम से गुरु की भक्ति कर सकता है। राधा स्वामी (Radha Soami) में ध्यान करने के तरीके को सूरत शब्द कहा जाता है, जिसमें दोनो आंखो को बंद करके गुरु का ध्यान करते हुए अपने मन की आवाद को सुनने की कोशिश की जाती है..  सूरत शब्द का मतलब होता है आत्मा का शब्द के साथ मिलन’। जिसके जरिए व्यक्ति को उसके शारीरिक मोह से निकल कर आपको  भीतर के आध्यात्मिक लोकों की यात्रा करने के लिए प्रेरणा दी जाती है। ताकि व्यक्ति अंत में परमात्मा से मिल सकें।

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दयाल सिंह के माता पिता नानकपंथी – Radha Soami vs Sikhism

राधास्वामी मत का सिख धर्म से प्रभावित होने का कारण था सेठ शिव दयाल सिंह के माता पिता का नानकपंथी होना। वो लोग आजीवन नानकपंथी रहे थे लेकिन सिख धर्म के अनुयायी होने कारण घर का माहौल वैसा ही थी, जिसका असर सेठ शिव दयाल पर दिखने लगा था। वहीं वो संत कवि तुलसी साहिब को भी अकसर पढ़ते औऱ सुनते थे, जिसका उनके व्यक्तित्व पर काफी असर पड़ा था। उन्होंने देखा था कि तुलसी साहिब किस तरह सिख धर्म की ही तरह जातपात, पूजा पाठ, संप्रादायिक कट्टरता का विरोध कर रहे है, जबकि सिख भी धीरे धीरे एक विचार नहीं बल्कि धर्म में परिवर्तित हो गया था, इसलिए राधास्वामी ने तुलसी साहिब को ही अपना गुरु माना था।

11 गुरु पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब – Radha Soami vs Sikhism

राधा स्वामी परंपरा के लोग आज भी जीवित गुरु को मानते है, लेकिन सिख धर्म में केवल 10 गुरु हुए और 11 गुरु पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब ही है। जो आज भी यहीं मान्यता को मानते है। राधास्वामी (Radha Soami) मानते है कि मार्गदर्शण के लिए जीवित गुरु का होना अनिवार्य है। वहीं सिख केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बातों के अनुसार ही चलते है लेकिन राधा स्वामी (Radha Soami) पवित्र ग्रंथ के साथ साथ अपने गुरुओं की वाणी का भी पालन करना अनिवार्य मानते है।

दसवें सिख गुरु के ऐलान के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब के बाद कोई गुरु नहीं हुआ और न ही होगा.. लेकिन राधा स्वामी बिना जीवित गुरु के नहीं रहता है। यहीं कारण है कि सिखों और राधास्वामी (Radha Soami) के बीच हमेशा डिस्प्यूट रहता है। लेकिन दोनो ही आत्मा को परमात्मा के मार्ग पर ले जाने वाले रास्ते ही प्रशस्त करते है। ये तो व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वो किस मार्ग पर चलना चाहते है। क्या आपने राधास्वानी (Radha Soami) मत के बारे में सुना है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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