Punjab history Books Ban: अभी हाल ही में 13 अप्रैल 2026 को पंजाब की भगवंत मान सरकार ने सिखों के पवित्र ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओ पर रोक लगाने के लिए जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 पास किया था, जिसमें ये कानून पारित हुआ था कि जो भी पवित्र ग्रंथ साहिब का अपमान करेगा, उसे आजीवन कारावास, 25 लाख रूपय तक का जुर्माना, गैर जमानती वारंट लागू करने के सजा का प्रावधान लागू किया गया था।
जिससे अब अपराधियों के बच निकलने की कोई गुंजाइश नहीं बचती.. लेकिन क्या आप ये जानते है ये पहली बार नहीं था जब भगवंत मान सरकार ने धर्म ग्रंथो और सिखों के धर्म गुरुओं का अपमान करने वाले लोगो पर नकेल कसने के लिए सख्ती की हो, इससे पहले भी काफी लंबे समय से सिख धर्म का अपमान करने वाली किताबो को लेकर भी पंजाब सीएम ने एक कड़ा फैसला सुनाया था और एक साथ तीन तीन इतिहास की किताबों को बैन कर दिया था। अपने इस लेख में जानेंगे कि आखिर कौन कौन सी थी वो किताबें और क्यों कर दिया गया उसे बैन।
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सीएम ने किताबों के बैन करने का कारण बताया – Punjab history Books Ban
1 मई 2022 को पंजाब के शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने एक ट्वीट किया था, इस ट्वीट ने एक तऱफ पंजाब में चली आ रही कई दशको से पुरानी शिक्षा व्यवस्था पर सवालियां निशान खड़ा कर दिया था तो वहीं सिखों के जिस महान इतिहास को लोग पूजते है, उससे बरगलाने का भी मामला सामने आया। दरअसल पंजाब के सीएम भगवंत मान ने 12वी कक्षा की तीन इतिहास की किताबों पर बैन लगाने की घोषणा की थी, ये किताबें मंजीत सिंह सोढ़ी की लिखी किताब ‘मॉडर्न एबीसी ऑफ हिस्टरी ऑफ पंजाब, महिंदरपाल कौर की लिखित किताब ‘पंजाब का इतिहास’ और कक्षा 12 के लिए एम एस मान द्वारा लिखी गई किताब ‘पंजाब का इतिहास’ शामिल थी। सीएम ने किताबों के बैन को लेकर कारण बताया कि इन किताबों में सिखों और पंजाब के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर गलत तरीके से बताया गया है। ये तीनो किताबें जालंधर के तीन अलग-अलग पब्लिकेशन में छापी गई थी।
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विधायक बरिंदर कुमार गोयल ने उठाया था ये मुद्दा – Punjab history Books Ban
इंस्टीट्यूट ऑफ सिख स्टडीज के पूर्व अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह ने बताया कि 2017 में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने इन किताबों में सिखों के इतिहास के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए इन तीन किताबों की जांच करने और उन्हें बैन करने की मांग रखी थी, वहीं आम आदमी पार्टी के लहरा से विधायक बरिंदर कुमार गोयल ने भी तब इस मुद्दे को उठाया था कि किताबों में कुछ तथ्य ऐसे है जो गलत है, जो सिखों और पंजाब की छवि को खराब करते है। जिसके बाद डॉ कृपाल सिंह कमिटी का गठन किया गया.. जब जांच पूरी हुई तो रिपोर्ट में सामने आया कि किसाब नेता के लगाये गए आरोप बिल्कुल सहीं है, किताबों में सिख धर्म और पंजाब से जुड़े तथ्यों के साथ तोड़ मरोड़ की गई है। सिख गुरुओ को लेकर ऐसी टिप्पणी की गई जो तथ्यों के आधार पर थे ही नहीं.. जो उनकी छवि को धूमिल करने वाले थे। नतीजा इसे बैन करने की घोषणा की गई थी।
क्यों नहीं हुआ तब बैन – Punjab history Books Ban
विंडबना ये थी कि सिखों के इतिहास के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था लेकिन बैन के बाद भी इसे पढ़ाना जारी रखा गया क्योंकि उस वक्त उन किताबों का कोई और विकल्प नहीं था.. लेकिन 2022 में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद सीएम भगवंत मान ने इस पर कड़ा फैसला लेते हुए इन किताबों को हमेशा के लिए बैन कर दिया.. न तो अब इसका पब्लिकेशन होगा और न ही ये कहीं बिकेंगी। जिसकी पुष्टि खुद पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) के चेयरमैन योगराज सिंह ने की थी। वहीं सरकार ने किताब के लेखक और प्रकाशक के खिलाफ सख्त कार्यवाई करने और जांच के भी आदेश जारी किये थे।
क्या क्या की गई गलतियां – Punjab history Books Ban
किताब में कई गलतियां की गई, जिसमें सबसे पहले तो सिख गुरुओ के संघर्ष और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को गलत तरीके से पेश किया गया था, वहीं पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की गुरुबाणी की अवहेलना करते हुए गलत तरीके से लिखा गया था… साथ ही भारत की आजादी के वक्त सिखों के साथ जो भी बर्बरता हुई, उसे लेकर भी गलत तथ्य पेश किये गए थे, जिससे सिख पीड़ित नही बल्कि उत्पीड़क बन रहे थे। सिखों की भूमिका पर ही सवालियां निशान खड़े कर दिये गए थे। जो इन किताबों को पढ़वे वाले बच्चो के दिमाग में सिखों और सिख गुरुओ को लेकर नकारात्मक विचार पैदा कर सकते थे। इसलिए पंजाब के छात्रो को गलत इतिहास सिखा कर बरगलाने वाली इन तीन किताबों पर हमेशा के लिए बैन लगा दिया गया है।
सिख धर्म कितना महान है, उसका इतिहास कितना महान है, उसके आपको अनगिनत सबूत मिल जायेंगे, ऐसे में सिख धर्म को बदनाम करने की कोशिश की गई.. ये कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन इस तरह की किताबे बच्चों की मानसिकता पर गहरा प्रभाव डाल सकती है इसलिए जरूरी है कि कभी भी कोई किताब बच्चों के हाथों में जाने से पहले उसकी बेहतर तरीके से जांच की जानी चाहिए.. नहीं तो बच्चें कभी अपने सही इतिहास को नहीं जान पायेंगे, नहीं समझ पायेंगे। आपकी इस पर क्या राय है।




























