Nomura Report India Economy: केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के फैसले के बाद अब आम लोगों की जेब पर और असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म Nomura ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में सरकार कई और बड़े आर्थिक फैसले ले सकती है। इनमें पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से लेकर गैर-जरूरी आयात पर सख्ती और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नई नीतियां शामिल हो सकती हैं।
हाल ही में केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। सरकार का मकसद कीमती धातुओं के आयात को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को घटाना बताया जा रहा है। सरकार का मानना है कि सोना-चांदी जैसी गैर-जरूरी चीजों के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है।
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सरकार के अगले कदम क्या हो सकते हैं? Nomura Report India Economy
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार सरकार अब सिर्फ सोने-चांदी तक सीमित नहीं रहने वाली है। आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर भी सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए डॉलर बॉन्ड जारी करने और विदेशी निवेशकों को टैक्स में राहत देने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आयातकों के लिए करेंसी हेजिंग नियमों में बदलाव किया जा सकता है ताकि डॉलर की मांग को नियंत्रित किया जा सके। सरकार का फोकस अब आयात और निर्यात के बीच बढ़ते अंतर को कम करने पर है।
पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं महंगे
सबसे ज्यादा चर्चा पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर हो रही है। नोमुरा ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा है कि सरकार फ्यूल प्राइस में करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर सकती है। ऐसा करने का मकसद राजकोषीय बोझ को कम करना और तेल कंपनियों पर दबाव घटाना हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की CPI बास्केट में पेट्रोल और डीजल का वजन करीब 4.8 प्रतिशत है। ऐसे में अगर ईंधन की कीमतों में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो खुदरा महंगाई दर में लगभग 25 से 30 बेसिस पॉइंट तक का असर देखने को मिल सकता है। यानी आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
पीएम की अपील से मिले थे संकेत
नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा को लेकर प्रधानमंत्री की हालिया अपील से पहले ही संकेत मिल गए थे कि सरकार दोहरे घाटे यानी फिस्कल डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट को और बढ़ने से रोकना चाहती है। यही वजह है कि अब सरकार आयात पर नियंत्रण और विदेशी मुद्रा बचाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
सोने-चांदी के दामों में जोरदार उछाल
सरकार के फैसले का असर बाजार में तुरंत देखने को मिला। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद सोने की कीमतों में एक दिन में करीब 11 हजार रुपये तक की तेजी दर्ज की गई। वहीं चांदी के दाम में भी लगभग 22 हजार रुपये प्रति किलो का उछाल देखा गया। हालांकि बाद में कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन बाजार में अभी भी तेजी का माहौल बना हुआ है।
MCX पर आज भी सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिल रही है। जानकारों का कहना है कि अगर सरकार आगे भी आयात को लेकर सख्ती बढ़ाती है, तो आने वाले समय में कीमती धातुओं और ईंधन दोनों की कीमतों में असर दिखाई दे सकता है।





























