नेपाल की त्रासदी तो सिर्फ ट्रेलर है? अगर धरती की सारी बर्फ पिघल गई तो नक्शे से गायब हो जाएंगे ये देश! Nepal glacier burst impact

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 04 सितम्बर 2026, 05:39 PM Updated: 04 सितम्बर 2026, 05:39 PM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Nepal glacier burst impact: नेपाल और तिब्बत सीमा पर बीते महीने ग्लेशियर फटने के बाद आई प्रलयंकारी बाढ़ ने जिस तरह तबाही मचाई, उसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी ने एक बार फिर ग्लोबल वार्मिंग और तेजी से बदलते मौसम के खतरे को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। इस घटना के बाद पर्यावरण वैज्ञानिकों के बीच एक बड़ा सवाल फिर से उठने लगा है कि अगर भविष्य में हमारी धरती पर जमी सारी बर्फ पिघल गई, तो दुनिया का क्या होगा और हमारे शहर किस हाल में होंगे?

वैज्ञानिकों का मानना है कि रातों-रात बर्फ का पूरा पिघलना मुमकिन नहीं है, लेकिन अगर इंसानों ने फॉसिल फ्यूल (कोयला, पेट्रोल, डीजल) जलाना और पर्यावरण में कार्बन छोड़ना बंद नहीं किया, तो वो दिन दूर नहीं जब धरती के ध्रुवों और ऊंचे पहाड़ों से बर्फ का नामोनिशान मिट जाएगा।

और पढ़ें: 100 साल राज किया, अब बोरिया-बिस्तर समेटो! टाटा ग्रुप को इस देश के राष्ट्रपति ने क्यों दिखाया बाहर का रास्ता? Kenyan Tata company out

धरती पर मौजूद है 50 लाख क्यूबिक मील बर्फ, 216 फीट ऊपर आ जाएगा समुद्र| Nepal glacier burst impact

 रिसर्च के मुताबिक धरती पर करीब 50 लाख क्यूबिक मील से ज्यादा बर्फ मौजूद है। इसे पूरी तरह पिघलने में करीब 5,000 साल से अधिक का वक्त लग सकता है। लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो धरती का औसत तापमान आज के 58 डिग्री फारेनहाइट से सीधे छलांग लगाकर 80 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच सकता है। बर्फ के पानी में बदलने से समुद्र का जलस्तर 216 फीट (करीब 66 मीटर) तक ऊपर उठ जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि दुनिया का भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा और महाद्वीपों का मौजूदा नक्शा हमेशा के लिए मिट जाएगा।

जानिए किस महाद्वीप पर क्या पड़ेगा असर:

  • एशिया (भारत और चीन पर सबसे बड़ा संकट): समुद्र का जलस्तर बढ़ने से एशिया सबसे बुरी मार झेलेगा। चीन की लगभग 60 करोड़ आबादी वाले रिहायशी इलाके पानी में समा जाएंगे। भारत के ज्यादातर तटीय शहर और राज्य डूब जाएंगे, जबकि पड़ोसी देश बांग्लादेश का अस्तित्व लगभग खत्म हो जाएगा। मेकांग डेल्टा डूबने से कंबोडिया के मशहूर कार्डमम पहाड़ एक अकेले टापू की तरह नजर आएंगे।
  • यूरोप: लंदन जैसा ऐतिहासिक शहर सिर्फ यादों और किताबों में सिमट जाएगा। वेनिस शहर एड्रियाटिक सागर में विलीन हो जाएगा, जबकि नीदरलैंड्स और डेनमार्क का नामोनिशान मिट जाएगा। भूमध्य सागर का पानी बढ़ने से ब्लैक सी और कैस्पियन सागर के किनारे भी डूब जाएंगे।
  • उत्तरी अमेरिका: अमेरिका का पूरा अटलांटिक तटीय किनारा, फ्लोरिडा और गल्फ कोस्ट पानी में विलीन हो जाएंगे। कैलिफोर्निया की सैन फ्रांसिस्को की पहाड़ियां केवल छोटे द्वीपों में बदल जाएंगी और सैन डिएगो पूरी तरह गायब हो जाएगा।
  • दक्षिण अमेरिका: अमेजन और पराग्वे नदी बेसिन समुद्र की खाड़ी का रूप ले लेंगे। ब्यूनस आयर्स, तटीय उरुग्वे और पराग्वे का बड़ा इलाका जलमग्न हो जाएगा। केवल कैरिबियन तट और मध्य अमेरिका के ऊंचे पहाड़ी इलाके ही सुरक्षित रह सकेंगे।
  • अफ्रीका: बाकी महाद्वीपों के मुकाबले यहां जमीन भले ही कम डूबे, लेकिन जानलेवा गर्मी के चलते अफ्रीका का ज्यादातर हिस्सा इंसानों के रहने लायक नहीं रहेगा। मिस्र के अलेक्जेंड्रिया और काहिरा शहर भूमध्य सागर में समा जाएंगे।
  • ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी इलाके में एक विशाल अंदरूनी समुद्र बन जाएगा, लेकिन वह अपनी उस संकरी तटीय जमीन को खो देगा जहां आज देश की 80 फीसदी (पांच में से चार) आबादी रहती है।

अंटार्कटिका पर मंडराता खतरा

पृथ्वी की कुल बर्फ का करीब 80 फीसदी (चार-पांचवां हिस्सा) पूर्वी अंटार्कटिका में जमा है, जो अब तक बेहद मजबूत माना जाता रहा है। लेकिन अगर कार्बन उत्सर्जन से पुराने ‘इओसीन काल’ जैसी भीषण गर्मी लौटी, तो इसका बचना भी नामुमकिन हो जाएगा। वहीं, वेस्ट अंटार्कटिका की स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक है। यह समुद्र तल से नीचे की चट्टानों पर टिकी है, जिसे गर्म समुद्री पानी नीचे से लगातार पिघला रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 1992 से अब तक यहां हर साल औसतन 6.5 करोड़ (65 मिलियन) मीट्रिक टन बर्फ लगातार घट रही है, जो भविष्य के महाविनाश की ओर साफ इशारा कर रही है।

और पढ़ें: पाकिस्तान की राह पर नेपाल! आपदा के बीच भारत से मांगा हर्जाना, क्या नई दिल्ली को देना पड़ेगा लॉस एंड डैमेज का पैसा? India Nepal climate compensation controversy

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Recent News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds